हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान बिछड़ा 11 साल का मासूम: पुलिस की त्वरित सूझबूझ से परिवार से मिला ठाकुर सिंह, छाई खुशियां
पवित्र कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ा हुआ है, लेकिन इस भारी भीड़भाड़ के बीच कई बार अपनों के बिछड़ने की दर्दनाक घटनाएं भी सामने आती हैं। ऐसी ही एक घटना में उत्तर प्रदेश के मेरठ से अपने परिवार के साथ कांवड़ यात्रा में शामिल होने आया 11 साल का एक मासूम बच्चा अचानक परिवार से बिछड़ गया और बुरी तरह घबराकर रोने लगा।
गनीमत यह रही कि मौके पर मुस्तैद हरिद्वार पुलिस ने संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए न केवल बच्चे को संभाला, बल्कि कुछ ही घंटों में उसे सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचाकर एक मिसाल पेश की है।
सेक्टर-52 केशव आश्रम पर रोते हुए मिला 11 वर्षीय ठाकुर सिंह
जानकारी के अनुसार, कांवड़ मेला ड्यूटी के दौरान सेक्टर-52 स्थित केशव आश्रम के पास तैनात पुलिसकर्मियों की नजर एक बच्चे पर पड़ी जो बुरी तरह डरा हुआ था और रो रहा था। पुलिस ने तुरंत मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उसे अपनी सुरक्षा में लिया और उससे पूछताछ की। बच्चे ने अपनी पहचान 11 वर्षीय ठाकुर सिंह पुत्र प्रताप सिंह के रूप में बताई, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ के जाहिदपुर सब्जी मंडी इलाके का रहने वाला है। बच्चे ने रोते हुए पुलिस को बताया कि वह अपने परिवार के साथ कांवड़ यात्रा पर हरिद्वार आया था, लेकिन भारी भीड़ के दबाव के कारण वह अपने माता-पिता और परिजनों से बिछड़ गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और लाउडस्पीकर से तलाश
बच्चे के रोने और उसकी परेशानी को देखते हुए पुलिस टीम ने बिना एक पल गंवाए एक्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने सबसे पहले बच्चे को ढांढस बंधाया और उसके बाद कांवड़ मेला क्षेत्र में लगे लाउडस्पीकरों के माध्यम से लगातार घोषणा करानी शुरू कर दी। इसके साथ ही स्थानीय पुलिस ने अपने संपर्कों और अन्य ड्यूटी पॉइंट्स पर तैनात कर्मियों की मदद से कांवड़ पटरी व आसपास के इलाकों में उसकी तलाश तेज कर दी। पुलिस के इस सामूहिक और तेज प्रयास का परिणाम यह निकला कि कुछ ही समय के भीतर बच्चे के परिजनों का सही पता चल गया।
कानूनी प्रक्रिया पूरी कर परिजनों को सौंपा गया मासूम
परिजनों का पता चलने के बाद पुलिस ने सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कीं। इसके बाद बच्चे के पिता प्रताप सिंह और अन्य परिजनों को थाने बुलाकर सुरक्षित रूप से बालक उनके सुपुर्द कर दिया गया। काफी तलाश के बाद अपने जिगर के टुकड़े को सुरक्षित पाकर माता-पिता की आंखें नम हो गईं और उन्होंने राहत की सांस ली। परिजनों ने हरिद्वार पुलिस की इस मानवीय संवेदनशीलता, त्वरित कार्यशैली और सराहनीय जिम्मेदारी की जमकर प्रशंसा की और पुलिस प्रशासन का दिल से आभार व्यक्त किया।