सोनप्रयाग-त्रियुगीनारायण में कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा! दो साल से जर्जर है पुलिया, भगवान भरोसे चल रहा है आवागमन

सोनप्रयाग-त्रियुगीनारायण में कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा! दो साल से जर्जर है पुलिया, भगवान भरोसे चल रहा है आवागमन

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने उत्तराखंड में पहाड़ों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। अब सिर्फ मोटर मार्ग ही नहीं, बल्कि पैदल रास्तों पर भी मौत का साया मंडराने लगा है। सबसे खौफनाक स्थिति सोनप्रयाग-त्रियुगीनारायण पैदल मार्ग की है।

यहां घट गधेरे (बरसाती नाले) के ऊपर बनी अस्थायी लोहे की पुलिया के पिलर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि लोहे के ये पट्टे किसी भी वक्त तेज बहाव में बह सकते हैं या नीचे गिर सकते हैं। इसके बावजूद स्थानीय ग्रामीण, स्कूली बच्चे और यात्री अपनी जान हथेली पर रखकर इसी जर्जर रास्ते से आवाजाही करने को मजबूर हैं।

दो साल पहले बह गई थी पक्की पुलिया, अब अस्थायी जुगाड़ भी फेल

ये कोई अचानक पैदा हुई समस्या नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो साल पहले भारी बारिश और घट गधेरे में आई भीषण बाढ़ ने यहां बनी पक्की सीसी (कंक्रीट) पुलिया को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया था।

उस वक्त लोक निर्माण विभाग (PWD) उखीमठ ने फौरी राहत देते हुए लोहे के पट्टों के सहारे एक अस्थायी पुलिया तैयार की थी। अब बारिश के कहर से यह 'जुगाड़' वाली व्यवस्था भी दम तोड़ रही है। ग्राम पंचायत त्रियुगीनारायण के किमाना और बगीचा तोक के दर्जनों परिवारों के लिए यह एकमात्र रास्ता है, जो अब एक बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।

शिव-पार्वती विवाह स्थल के श्रद्धालुओं का अहम रास्ता

सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र सेमवाल इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हैं। उनका कहना है कि त्रियुगीनारायण की पहचान भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र विवाह स्थल के रूप में पूरी दुनिया में है। यहां हर साल देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। बरसात के मौसम में जब मुख्य मोटर मार्ग लैंडस्लाइड के कारण बंद हो जाते हैं, तो यही पैदल रास्ता साधु-संतों, घोड़ा-खच्चर संचालकों और यात्रियों का सबसे बड़ा सहारा बनता है। ग्रामीण कई बार विभाग से स्थायी पुल बनाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जमीनी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों को लंबा और बेहद खतरनाक रास्ता चुनना पड़ रहा है।

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