UCC के बाद धामी सरकार का दूसरा बड़ा धमाका! देश में पहली बार बदलेगा निकाह का नियम, काजियों में मची खलबली
देश भर में सबसे पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर मिसाल कायम करने वाला उत्तराखंड अब एक और बड़े सुधार की ओर कदम बढ़ा रहा है। पुष्कर सिंह धामी सरकार राज्य में देश का पहला मानकीकृत निकाहनामा लाने की तैयारी में जुटी है। इस नई पहल के केंद्र में निकाह कराने वाले काजी-मौलवियों का आधिकारिक पंजीकरण, दस्तावेजों की पुख्ता व्यवस्था और मुस्लिम महिलाओं के वैवाहिक अधिकारों की सुरक्षा है। आगामी विधानसभा चुनावों की सियासी सरगर्मियों के बीच सरकार और राज्य वक्फ बोर्ड इसे व्यवस्था को पारदर्शी बनाने वाला कदम बता रहे हैं, जबकि समुदाय के भीतर इसकी व्यावहारिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास के अनुसार, सरकार निकाह के कागजी दस्तावेजों को कानूनी रूप से अधिक ठोस और व्यवस्थित बनाना चाहती है। इसी के मद्देनजर निकाह संपन्न कराने वाले मौलवियों और काजियों के अनिवार्य पंजीकरण की योजना पर काम चल रहा है, ताकि निकाह से जुड़े वैवाहिक रिश्तों के प्रमाण पत्रों में किसी प्रकार की धोखाधड़ी की गुंजाइश न रहे। उन्होंने बताया कि अगले दो से तीन महीनों के भीतर इस नई नियमावली का पूरा प्रारूप सामने आ जाएगा। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि जिस तरह UCC लागू करते समय आशंकाओं के विपरीत शांति बनी रही, उसी तरह इस प्रशासनिक सुधार को लेकर भी किसी समुदाय में कोई विरोध नहीं देखा गया है।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस व्यवस्था के तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट किया। उनके अनुसार, UCC को अपनाए जाने के बाद अब निकाह की प्रक्रिया को भी उसी कानूनी ढांचे के अनुरूप ढालना जरूरी है। प्रस्तावित ड्राफ्ट के तहत निकाह कराने वाले हर काजी या मौलवी को एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UID) जारी किया जाएगा। साथ ही, निकाहनामे में शामिल होने वाले गवाहों के पहचान दस्तावेज और पते का पूरा विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा। शादाब शम्स ने स्पष्ट किया कि UCC के तहत बहुविवाह पूरी तरह गैर-कानूनी हो चुका है और इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य परिवारों को टूटने से बचाना, तीन तलाक व हलाला जैसी कुप्रथाओं पर लगाम लगाना तथा बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार सुनिश्चित करना है। महिलाओं के मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए जल्द ही एक विशेष हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी।
कानूनी दृष्टिकोण से वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता एससी बिरमानी का मानना है कि यह पहल समाज और व्यवस्था के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगी। निकाहनामे को सीधे राज्य के आधिकारिक UCC पोर्टल से जोड़ने की योजना है। ऐसा होने पर दूल्हा-दुल्हन आसानी से अपना निकाहनामा ऑनलाइन दर्ज कर विवाह प्रमाण पत्र हासिल कर सकेंगे और उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। काजियों के पंजीकृत होने से उनके काम को भी आधिकारिक प्रशासनिक मान्यता मिलेगी, जिससे पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ेगी।
दूसरी ओर, इस्लामिक मामलों के जानकारों का कहना है कि मुस्लिम समाज में मस्जिदों के जरिए निकाह का रिकॉर्ड रखने की परंपरा पहले से मौजूद है, जहां गवाहों और मेहर का पूरा ब्योरा दर्ज होता है। जानकारों के मुताबिक, यदि सरकार इस व्यवस्था को औपचारिक पहचान देती है तो यह स्वागत योग्य है, लेकिन नई नियमावली तय करते समय जमीनी परंपराओं और लोगों की व्यावहारिक सहूलियतों का ध्यान रखना अनिवार्य होना चाहिए। वहीं, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय संयोजिका डॉ. शालिनी अली ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि इससे मुस्लिम युवतियों को निकाह से पहले अपनी शर्तें रखने और अपनी सहमति को मजबूती देने का अधिकार मिलेगा। चुनावी माहौल के बीच, धामी सरकार के इस कदम पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं कि आने वाले महीनों में यह नया निकाहनामा जमीन पर किस तरह आकार लेता है।