अयोध्या में दिखेगा देवभूमि उत्तराखंड का भव्य रंग.... करोड़ की लागत से बनेगा शानदार अतिथि गृह
उत्तर प्रदेश की पावन और ऐतिहासिक नगरी अयोध्या में इन दिनों राम मंदिर के निर्माण के बाद से जो अभूतपूर्व विकास की लहर दौड़ रही है, उसने पूरी दुनिया के पर्यटकों और श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इसी कड़ी में अब श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या के पावन आंचल में देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और वास्तुकला की एक बहुत ही मनमोहक झलक देखने को मिलने वाली है, जिसके लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार ने मिलकर एक बेहद महत्वपूर्ण और भव्य परियोजना पर मुहर लगा दी है। भगवान श्री राम के दर्शन के लिए देश-विदेश से आने वाले लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं और विशेषकर उत्तराखंड से आने वाले यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अयोध्या में लगभग 67.83 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक अत्याधुनिक और भव्य उत्तराखंड अतिथि गृह का निर्माण किया जाने वाला है। इस विशेष अतिथि गृह की सबसे बड़ी और खास विशेषता यह होगी कि इसके निर्माण में उत्तराखंड की पारंपरिक वास्तुकला की छाप तो दिखेगी ही, साथ ही इसके कमरों और परिसरों में पर्यटकों को हिमालय की वादियों और प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के प्राकृतिक नजारों का अहसास कराने वाली अद्भुत थीम भी देखने को मिलेगी। इस विस्तृत, आकर्षक और जमीनी रिपोर्ट के माध्यम से हम आपको अयोध्या में बनने वाले इस भव्य उत्तराखंड अतिथि गृह की पूरी रूपरेखा, लागत, सुविधाओं और उससे जुड़ी हर एक खास बात के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।
अयोध्या में उत्तराखंड अतिथि गृह के निर्माण का यह भव्य प्रोजेक्ट और इसकी कुल लागत
जब से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ है और रामलला अपने गर्भगृह में विराजमान हुए हैं, तब से देश के हर एक राज्य की यह इच्छा रही है कि उनका भी अपना एक विशेष सांस्कृतिक और आवासीय केंद्र इस धर्मनगरी में स्थापित हो। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए उत्तराखंड सरकार ने अयोध्या प्रशासन के सहयोग से एक बहुत ही शानदार और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अतिथि गृह बनाने का निर्णय लिया है, जिस पर कुल 67.83 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया है। इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए अयोध्या के एक बेहद प्राइम लोकेशन पर जमीन का चयन कर लिया गया है, जहां बहुत जल्द निर्माण कार्य पूरी गति के साथ शुरू होने वाला है। इस अतिथि गृह का उद्देश्य केवल एक साधारण होटल या विश्राम गृह जैसा ढांचा तैयार करना नहीं है, बल्कि इसका मकसद अयोध्या आने वाले हर उत्तराखंड निवासी और देश-विदेश के पर्यटकों को एक ऐसा सांस्कृतिक ठिकाना देना है जहां उन्हें अपने ही राज्य की मिट्टी की सौंधी खुशबू और मेहमाननवाजी का अहसास मिल सके।
वास्तुकला में दिखेगी देवभूमि की झलक: हिमालय की चोटियों और कॉर्बेट के जंगलों की अनूठी थीम
इस प्रस्तावित उत्तराखंड अतिथि गृह की सबसे बड़ी खासियत इसकी विशिष्ट वास्तुकला (Architecture) और इंटीरियर डिजाइनिंग होने वाली है, जो उत्तर प्रदेश की समतल भूमि पर उत्तराखंड के पहाड़ी सौंदर्य को जीवंत कर देगी। इस भवन के बाहरी और आंतरिक हिस्सों को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि वहां आने वाले पर्यटकों को ऐसा महसूस हो मानो वे उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों से सीधे उत्तराखंड की गोद में यानी हिमालय की बर्फीली वादियों और हरे-भरे जंगलों के बीच पहुंच गए हों। अतिथि गृह के कमरों, लॉबी और दीवारों पर उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों, केदारनाथ, बद्रीनाथ, फूलों की घाटी और विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के वन्यजीवों तथा प्राकृतिक दृश्यों को दर्शाती हुई सुंदर पेंटिंग्स और कलाकृतियां उकेरी जाएंगी। इसके अलावा, पहाड़ी शैली की लकड़ी की नक्काशी और पारंपरिक निर्माण कला का बेजोड़ संगम इस पूरी इमारत को अयोध्या आने वाले हर सैलानी के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना देगा, जो अपनी संस्कृति से प्रेम करने वालों को मंत्रमुग्ध कर देगा।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे कमरे और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का भी मिलेगा भरपूर आनंद
केवल सुंदरता के मामले में ही नहीं, बल्कि आधुनिक सुख-सुविधाओं और मेहमानों के आराम के मामले में भी यह उत्तराखंड अतिथि गृह किसी फाइव-स्टार होटल से कम नहीं होने वाला है, जहां यात्रियों को सभी प्रकार की विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। इस बहुमंजिला अतिथि गृह में ठहरने के लिए एक साथ सैकड़ों लोगों की क्षमता वाले सुसज्जित और हवादार कमरे, वीआईपी सुइट्स, कांफ्रेंस हॉल और बहुउद्देशीय सांस्कृतिक सभागार बनाए जाएंगे, ताकि सरकारी आयोजनों और धार्मिक अनुष्ठानों को सुगमता से संपन्न किया जा सके। इसके साथ ही, इस परिसर के भीतर एक ऐसा विशेष भोजनालय (Restaurant) भी स्थापित किया जाएगा जहां पर्यटकों को उत्तराखंड के पारंपरिक और पौष्टिक पहाड़ी व्यंजन जैसे कि बादी, मंडवे की रोटी, गहत की दाल, फाणू और स्थानीय मिठाइयों का स्वाद चखने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूती मिलेगी, बल्कि वहां के स्थानीय खानपान और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान भी प्राप्त होगी।
अयोध्या और उत्तराखंड के बीच सांस्कृतिक सेतु और पर्यटन को मिलने वाला जबरदस्त बढ़ावा
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का पुराना और बहुत गहरा आत्मीय रिश्ता रहा है, क्योंकि एक समय में उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा हुआ करता था और आज भी दोनों राज्यों के बीच धार्मिक तथा पारिवारिक जुड़ाव अटूट है। अयोध्या में इस भव्य अतिथि गृह के बनने से उत्तराखंड से आने वाले तीर्थयात्रियों को एक ऐसा अपनापन और सुरक्षित ठिकाना मिल जाएगा जहां वे बिना किसी होटल की भागदौड़ के आराम से रुक सकेंगे और रामलला के दर्शन कर सकेंगे। पर्यटन विशेषज्ञों का यह मानना है कि इस प्रकार के सांस्कृतिक और आवासीय केंद्रों के निर्माण से अयोध्या में धार्मिक पर्यटन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा और देश के कोने-कोने से आने वाले लोगों को भारत की विविधता में एकता के दर्शन एक ही स्थान पर हो सकेंगे। इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद से ही अयोध्या और उत्तराखंड दोनों राज्यों के पर्यटन विभागों में भारी उत्साह देखा जा रहा है, और लोग इस शानदार प्रोजेक्ट के जल्द से जल्द पूरा होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।