अगर अब नहीं गए तो करना पड़ेगा लंबा इंतजार, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने की तारीखें घोषित

अगर अब नहीं गए तो करना पड़ेगा लंबा इंतजार, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने की तारीखें घोषित

विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर अग्रसर है, जिसके साथ ही गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद करने की तिथियों की विधिवत घोषणा कर दी गई है। मंदिर समितियों द्वारा निकाले गए पंचांग मुहूर्त के अनुसार, आगामी 10 नवंबर को अन्नकूट व गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 बजे गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए जाएंगे।

कपाट बंदी के उपरांत मां गंगा की उत्सव डोली पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ अपने शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव के लिए प्रस्थान करेगी, जहां 11 नवंबर को भैयादूज के दिन पहुंचकर मां गंगा की शीतकालीन पूजा-अर्चना शुरू होगी। वहीं, दूसरी ओर यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर 2026 को भैयादूज के पावन पर्व पर शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि, अनुराधा नक्षत्र, सौम्य योग और धनु लग्न में सुबह 10:28 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके बाद मां यमुना की डोली उनके शीतकालीन प्रवास खरसाली (खुशीमठ) पहुंचेगी, जहां आगामी छह महीनों तक श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन व पूजन कर सकेंगे।

कपाट बंदी की तिथि घोषित होने के साथ ही इस वर्ष की यात्रा में अब केवल 20 दिन का समय शेष बचा है। 19 अप्रैल से शुरू हुई इस यात्रा में मानसून के बाद भी देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल के अनुसार, उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यह पहला ऐतिहासिक अवसर होगा जब गंगोत्री धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 10 लाख के पार पहुंचेगी। बीते 193 दिनों में 9,42,168 श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन कर चुके हैं, और शेष बचे दिनों में भारी संख्या में तीर्थयात्रियों के पहुंचने की संभावना है। यात्रा के अंतिम चरण में भी श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ रही आवाजाही से स्थानीय व्यापारियों, होटल-धर्मशाला संचालकों और तीर्थ पुरोहितों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।