उत्तराखंड में मदरसों पर धामी सरकार का बड़ा हंटर; जुमे की छुट्टी होगी खत्म, अब रविवार को ही बंद रहेंगे मदरसे
उत्तराखंड के मदरसों में वर्षों से चली आ रही शुक्रवार (जुमे) की साप्ताहिक छुट्टी की व्यवस्था अब जल्द खत्म होने जा रही है। प्रदेश सरकार अब सामान्य स्कूलों की तर्ज पर मदरसों में भी रविवार को ही अवकाश लागू करने की तैयारी में है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने इस बाबत शिक्षा विभाग को विधिवत पत्र भेज दिया है, जहां से जल्द ही औपचारिक शासनादेश जारी होने की उम्मीद है। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजने की पुष्टि की है।
इस बड़े नीतिगत बदलाव पर रुख साफ करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो टूक कहा कि मान्यता प्राप्त होने के बाद मदरसों पर भी वही नियम लागू होंगे जो राज्य के बाकी सामान्य स्कूलों पर होते हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार तुष्टिकरण वाली शिक्षा नीति के पक्ष में नहीं है। उनका लक्ष्य सभी बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेताया कि जो भी संस्थान सरकार द्वारा तय नियमों और कायदों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें प्रदेश में संचालित करने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड को पूरी तरह भंग कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया था। इस प्रशासनिक बदलाव के बाद प्रदेश के 452 मदरसों में से आधे से ज्यादा संस्थानों को प्रबंधकों ने खुद ही बंद कर दिया। वर्तमान में शिक्षा विभाग ने महज 76 मदरसों को औपचारिक मान्यता दी है, जबकि 100 से अधिक आवेदन अभी प्रक्रिया में हैं। इसके अलावा 35 मदरसों ने प्राधिकरण से विशुद्ध धार्मिक शिक्षा प्रदान करने की अनुमति ली है।
प्रशासनिक फेरबदल के बीच जमीनी स्तर पर पढ़ रहे बच्चों की दिक्कतें भी खुलकर सामने आ रही हैं। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिलों के मदरसों में छात्रों को जरूरी किताबों और मिड-डे मील के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। केबीएन एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के सचिव निजाम अख्तर के मुताबिक, पीएम पोषण योजना के तहत भोजन की आपूर्ति सुचारू नहीं हो पाई है और न ही बच्चों को एनसीईआरटी की पूरी किताबें मिली हैं। इस मामले में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष पहले ही शिक्षा निदेशालय को पत्र लिख चुके हैं, जबकि मदरसा प्रतिनिधियों ने अल्पसंख्यक आयोग और बाल अधिकार संरक्षण आयोग से मामले में दखल देने की अपील की है।