उत्तराखंड में एस्मा लागू! अगले 6 महीने तक कर्मचारियों की हड़ताल पर पूरी तरह प्रतिबंध, सरकार का बड़ा एक्शन

उत्तराखंड में एस्मा लागू! अगले 6 महीने तक कर्मचारियों की हड़ताल पर पूरी तरह प्रतिबंध, सरकार का बड़ा एक्शन

उत्तराखंड सरकार ने अगले छह महीनों के लिए अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर हड़तालों पर रोक लगा दी है। कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश को कर्मचारी संगठनों के प्रस्तावित आंदोलनों के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कर्मचारी संगठन आठवें वेतन आयोग से पहले एसीपी की पुरानी व्यवस्था लागू करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। इसी बीच माध्यमिक सहायक अध्यापक भर्ती में कथित अनियमितताओं के विरोध में कांग्रेस और डीएलएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और आयोग के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। प्रदर्शनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की, जिसके बाद आयोग ने शेष पदों के दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित कर दी।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन-1905 पर 18 अप्रैल से 28 जुलाई के बीच प्राप्त 67,843 शिकायतों की समीक्षा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों के समाधान में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। पेयजल विभाग से सर्वाधिक शिकायतें मिलने पर मुख्यमंत्री ने सात दिन के भीतर स्थिति सुधारने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि संतोषजनक प्रगति नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हर सोमवार मनेगा "समाधान दिवस", पेंशन में देरी पर गिरेगी गाज

समीक्षा के दौरान वन विभाग, पर्यावरण बोर्ड, उच्च शिक्षा निदेशालय तथा सूचना एवं संस्कृति विभाग के कुछ अधिकारियों की शिकायत निस्तारण दर शून्य पाए जाने पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों से अपने प्रारंभिक कार्यक्षेत्रों में जनसुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए नवाचार संबंधी सुझाव 50 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने को भी कहा। साथ ही भूमि विवादों के शीघ्र निस्तारण और प्रत्येक सोमवार को "समाधान दिवस" आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन समय पर जारी करने पर भी जोर देते हुए कहा कि रिटायरमेंट के बाद पहले ही महीने से पेंशन मिलनी चाहिए और इसमें किसी प्रकार की देरी के लिए विभागाध्यक्ष जिम्मेदार होंगे। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने कुछ शिकायतकर्ताओं से सीधे फोन पर बातचीत कर समाधान की स्थिति जानी। साथ ही यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में शिकायतों को गलत तरीके से बंद कर दिया गया या अनुचित श्रेणी में डाल दिया गया था। इस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और पारदर्शी शिकायत निस्तारण व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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