कूलर और गमलों से लेकर पुराने टायरों तक, जानिए कैसे हरिद्वार प्रशासन ने घर-घर जाकर मिटाया डेंगू का खतरा

कूलर और गमलों से लेकर पुराने टायरों तक, जानिए कैसे हरिद्वार प्रशासन ने घर-घर जाकर मिटाया डेंगू का खतरा

बदलते मौसम और मच्छर जनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने हरिद्वार में डेंगू सोर्स रिडक्शन और जनजागरूकता अभियान को बेहद तेज कर दिया है।

पिछले कुछ हफ्तों से लगातार चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत स्वास्थ्य कर्मियों और वालंटियर्स की टीमें घर-घर जाकर डेंगू के लार्वा की तलाश कर रही हैं और लोगों को बचाव के प्रति सतर्क कर रही हैं। राहत देने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक जिले में डेंगू का एक भी पॉजिटिव मरीज सामने नहीं आया है, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली है।

युद्ध स्तर पर चल रही जांच, एक दिन में हजारों घरों का निरीक्षण

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके सिंह के निर्देशन और जिला मलेरिया अधिकारी इंद्रपाल सिंह की निगरानी में यह अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। इसमें लगभग 1,730 आशा कार्यकर्ता और 46 विशेष डेंगू वालंटियर्स कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ एक दिन के भीतर स्वास्थ्य टीमों ने 4,357 घरों और 17,223 पानी के कंटेनरों की बारीकी से जांच की। इस दौरान 497 घरों और 564 कंटेनरों में डेंगू का लार्वा मिलने पर टीमों ने तुरंत निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें नष्ट किया। अभियान की शुरुआत से अब तक कुल 91,804 से अधिक घरों का सर्वेक्षण किया जा चुका है।

पानी जमा न होने दें, जनभागीदारी से ही रुकेगा डेंगू का प्रसार

स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास पानी इकट्ठा न होने दें। कूलर, गमलों, पानी की टंकियों, टूटे-फूट बर्तनों और पुराने टायरों की नियमित सफाई बेहद जरूरी है क्योंकि यही वे प्रमुख स्थान हैं जहाँ डेंगू के मच्छर पनपते हैं। अधिकारियों का मानना है कि सरकारी प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों का सहयोग भी उतना ही जरूरी है। इसके अलावा संदिग्ध मामलों की पहचान के लिए अब तक 476 रैपिड टेस्ट और एलाइजा जांच कराई जा चुकी है। पिछले साल जिले में 110 मरीज मिले थे जिसे देखते हुए इस बार प्रशासन शुरुआत से ही पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।

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