नैनीताल जाने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी; लेक ब्रिज और बारापत्थर पर FASTag शुरू, जाम से हमेशा के लिए मुक्ति!
सरोवर नगरी नैनीताल आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। शहर के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर चुंगी पर अब फास्टैग (FASTag) के जरिए टोल टैक्स वसूली शुरू कर दी गई है।
इस आधुनिक प्रणाली को लागू करने वाली नैनीताल पालिका समूचे उत्तराखंड की पहली नगर पालिका बन गई है। नई व्यवस्था के तहत प्रति वाहन टोल शुल्क कटने में महज तीन से पांच सेकंड का वक्त लग रहा है, जिससे चुंगी नाकों पर लगने वाली गाड़ियों की लंबी कतारों और जाम की समस्या से बड़ी निजात मिल रही है। पालिका के ईओ रोहिताश शर्मा के अनुसार, वर्तमान में प्राथमिकता के आधार पर फास्टैग से शुल्क काटा जा रहा है, जबकि जिन वाहनों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है उनके लिए ऑनलाइन मशीन और मैनुअल पर्ची का विकल्प भी खुला रखा गया है।
नैनीताल पालिका द्वारा निर्धारित मौजूदा दरों के मुताबिक, बाहरी राज्यों और उत्तराखंड के अन्य जिलों से आने वाले चार पहिया वाहनों को 300 रुपये का टोल टैक्स देना होता है, जबकि नैनीताल जिले के रजिस्टर्ड स्थानीय वाहनों के लिए यह दर 200 रुपये तय है। चुंगी ठेकेदार प्रतिनिधि बुद्धा राघव ने बताया कि फिलहाल फास्टैग व्यवस्था को पूरी तरह ऑटोमेटिक मोड में नहीं डाला गया है क्योंकि पालिका स्तर से टैक्स छूट प्राप्त वाहनों की आधिकारिक सूची का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही छूट प्राप्त गाड़ियों का विवरण सिस्टम में दर्ज हो जाएगा, फास्टैग को पूरी तरह ऑटोमैटिक कर दिया जाएगा।
अक्टूबर महीने की सुस्ती के बाद इस वीकेंड पर नैनीताल और आसपास के पर्यटन स्थलों में सैलानियों की रौनक फिर से लौटती दिखाई दी। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय बिष्ट के मुताबिक, रविवार को पर्यटकों की आमद में करीब 10 प्रतिशत का उछाल देखा गया और होटलों में दीपावली तक सामान्य बुकिंग का रुझान बना हुआ है। हालांकि सुबह और शाम के वक्त चेक-इन और चेक-आउट के समय मॉल रोड और प्रमुख संपर्क मार्गों पर हल्का ट्रैफिक दबाव देखने को मिला।
उधर, विश्व विख्यात कैंची धाम में रविवार को आस्था का बड़ा सैलाब उमड़ा। बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन-पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। सुरक्षा के कड़े इंतजामों और भवाली प्रशासन द्वारा संचालित शटल सेवा के बीच दिनभर में लगभग 15 हजार भक्तों ने बाबा के दरबार में माथा टेका।