जिसने सरकार गिराई, उसे हीरो बना रहे हैं; उमेश कुमार की एंट्री पर फूटा हरीश रावत का गुस्सा, आर-पार के मूड में पूर्व CM

जिसने सरकार गिराई, उसे हीरो बना रहे हैं; उमेश कुमार की एंट्री पर फूटा हरीश रावत का गुस्सा, आर-पार के मूड में पूर्व CM

उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। खानपुर सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं ने पार्टी के सबसे कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तेवर तीखे कर दिए हैं। रावत ने साफ शब्दों में अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि जिस शख्स ने 2016 में उनकी चुनी हुई सरकार को गिराने में मुख्य भूमिका निभाई थी, आज हरिद्वार और उसके आसपास के कुछ हुड़दंगी कांग्रेसी उसी को पार्टी में लाकर हीरो बनाने पर तुले हैं।

हरीश रावत की हालिया 'धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा' के बाद पार्टी संगठन में मची रार की असली जड़ भी इसी खींचतान को माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा कि जिन्होंने कांग्रेस की सरकार बचाने के लिए खून-पसीना एक किया, वे आज कुछ लोगों की नजर में विलन बन गए हैं, जबकि जिसके षड्यंत्र से राज्य में पार्टी 10 साल के लिए सत्ता से बाहर हो गई, वह आज वंदनीय नजर आ रहा है। उन्होंने उमेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पैसे और रसूख के दम पर यह सब किया जा रहा है और उस दौलत का बड़ा हिस्सा 2016 में सरकार गिराने के बाद ही जुटाया गया है।

इस सियासी बवंडर और प्रदेश प्रभारी की आपत्तियों के बीच हरीश रावत ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है। मंगलवार को ऊधमसिंह नगर के किच्छा पहुंचे रावत ने अपने समर्थक कार्यकर्ताओं के साथ बंद कमरे में आगे की रणनीति तय की। तय कार्यक्रम के अनुसार उन्हें किच्छा से सीधे देहरादून लौटना था, लेकिन बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के कारण उन्होंने अपना शेड्यूल बदल दिया। अब वे बुधवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं, जहां वे कांग्रेस हाईकमान के सामने अपनी बात मजबूती से रखेंगे। उनकी मुलाकात संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा से होगी, जिसके बाद ही राज्य कांग्रेस में इस अंदरूनी खींचतान का कोई अंतिम समाधान निकलने की उम्मीद है।

पूरा विवाद 2016 के बहुचर्चित स्टिंग प्रकरण से जुड़ा है, जब उमेश कुमार एक निजी समाचार चैनल के कर्ता-धर्ता और पत्रकार थे। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत का विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक स्टिंग ऑपरेशन प्रसारित किया था, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ और कांग्रेस सरकार संकट में आ गई थी। बाद में 2022 के विधानसभा चुनाव में उमेश कुमार खानपुर सीट से निर्दलीय मैदान में उतरे और जीत हासिल कर पहली बार विधानसभा पहुंचे। वहीं हरीश रावत भी हाल के दिनों में इसी खानपुर सीट से खुद चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं, जिससे दोनों नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग और ज्यादा तेज हो गई है।