सड़क से उठाकर मंत्री तक बनवाया', सामने आए रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू

सड़क से उठाकर मंत्री तक बनवाया', सामने आए रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू

उत्तराखंड की राजनीति के गलियारों से एक ऐसी विस्फोटक और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने राज्य के सियासी पारे को एक झटके में आसमान पर पहुंचा दिया है। उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य (Rekha Arya) और उनके पति गिरधारी लाल साहू (Girdhari Lal Sahu) के बीच का पारिवारिक और राजनीतिक विवाद अब परदे के पीछे नहीं रहा, बल्कि खुलकर सार्वजनिक चौखट पर आ गया है। हाल ही में मीडिया के सामने आए गिरधारी लाल साहू ने बहुत ही तीखे और आक्रामक तेवर दिखाते हुए एक ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक पंडितों और विपक्षी दलों दोनों को ही हैरानी में डाल दिया है। साहू ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उन्होंने अपनी पत्नी को एक साधारण स्थिति से निकालकर और 'सड़क से उठाकर मंत्री पद तक पहुंचाया है', लेकिन अब उनके साथ जो व्यवहार किया जा रहा है, उसका वे बहुत जल्द कड़ा जवाब देंगे और सबकी असलियत दुनिया के सामने बेनकाब करेंगे। आइए एक वरिष्ठ राजनीतिक और इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि इस हाई-प्रोफाइल विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है और इसके क्या दूरगामी राजनीतिक मायने हैं।

क्या है गिरधारी लाल साहू और मंत्री रेखा आर्य के बीच उपजे इस विवाद की असली जड़?

पिछले कुछ समय से उत्तराखंड के राजनीतिक हलकों में यह चर्चा दबी जुबान से चल रही थी कि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दोनों के बीच वैचारिक और पारिवारिक दूरियां इतनी बढ़ चुकी हैं कि अब यह सार्वजनिक मंचों और बयानों के जरिए खुलकर सामने आने लगी है। गिरधारी लाल साहू ने मीडिया से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी जिंदगी का हर पल अपनी पत्नी के राजनीतिक करियर को संवारने और उन्हें एक मजबूत नेत्री बनाने में झोंक दिया था। उन्होंने दावा किया कि शुरुआती संघर्ष के दिनों से लेकर आज सत्ता के इस मुकाम तक पहुंचाने में उनकी भूमिका सबसे अहम रही है, लेकिन अब उन्हें ही किनारे करने की साजिश रची जा रही है। इस खुलासे के बाद से उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है और हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर इस सत्ता के गलियारे में पर्दे के पीछे ऐसा क्या पक रहा है जो अब बाहर आ रहा है।

'जल्द खोलूंगा सबकी कलई': गिरधारी लाल साहू के इस अल्टीमेटम से क्यों डरे हुए हैं सियासी दिग्गज?

अपने गुस्से का इजहार करते हुए गिरधारी लाल साहू ने जिस अंदाज में यह कहा है कि वे 'जल्द ही सबकी कलई खोलेंगे', उससे सत्तारूढ़ दल और प्रशासनिक अमले में भारी बेचैनी देखी जा रही है। एक तरफ जहां मंत्री रेखा आर्य इस पूरे मामले पर अभी तक बहुत सधा हुआ और नपा-तुला रुख अपनाए हुए हैं, वहीं उनके पति के तेवर लगातार आक्रामक होते जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि साहू वाकई में कोई बड़ा दस्तावेज, ऑडियो या वीडियो सार्वजनिक करते हैं या फिर सत्ता के भीतर चल रही किसी गड़बड़ी के सुबूत सामने लाते हैं, तो यह आने वाले चुनावों और सरकार की छवि के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है। विपक्षी दल भी इस पूरे पारिवारिक-राजनीतिक ड्रामे पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और उन्हें बैठे-बिठाए सरकार पर हमला बोलने का एक बड़ा हथियार मिल गया है।

उत्तराखंड की सियासत पर इस हाई-प्रोफाइल कलह का कितना गहरा असर पड़ेगा?

उत्तराखंड की राजनीति में महिला नेत्रियों के रूप में रेखा आर्य एक मजबूत और प्रभावी चेहरा मानी जाती हैं, और उनके विभाग तथा प्रशासनिक फैसलों की अक्सर चर्चा होती रहती है। ऐसे में, उनके निजी जीवन और पति के साथ चल रहे इस मतभेद का असर उनकी राजनीतिक साख पर पड़ना स्वाभाविक है। पार्टी संगठन के भीतर भी इस बात की सुगबुगाहट तेज हो गई है कि इस तरह के बयानों से सरकार की किरकिरी हो रही है और शीर्ष नेतृत्व इस मामले पर अंदरखाने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश में जुट गया है। हालांकि, गिरधारी लाल साहू के तेवर को देखकर ऐसा लगता है कि वे पीछे हटने के मूड में बिल्कुल भी नहीं हैं और आने वाले दिनों में वे कुछ ऐसे खुलासे कर सकते हैं जो उत्तराखंड की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को बदल सकते हैं।

जनता और विपक्ष की प्रतिक्रिया: क्या यह मामला बनेगा आने वाले दिनों का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा?

जैसे-जैसे यह मामला मीडिया की सुर्खियों में छाया हुआ है, आम जनता और सोशल मीडिया पर भी इस पर बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर लोग इसे पारिवारिक मामलों की निजी सीमाएं लांघना बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे सत्ता और रसूख की जंग के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए सरकार की नैतिकता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। बहरहाल, गिरधारी लाल साहू के इस अल्टीमेटम के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वे कब और कौन से नए खुलासे करते हैं, और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य इस पूरे विवाद पर अपना आधिकारिक रुख कब साफ करती हैं।