28 जेसीबी, 10 पोकलैंड और 4 घंटे में 81 आलीशान मकान जमींदोज! उत्तराखंड के रामनगर में इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई
उत्तराखंड के नैनीताल जिले अंतर्गत रामनगर में तराई पश्चिम वन प्रभाग की जमीन पर दशकों से जमे अतिक्रमण के खिलाफ शनिवार को अब तक का सबसे बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया। भारी पुलिस और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में 28 जेसीबी और 10 भारी पोकलैंड मशीनों ने गरजते हुए पुछड़ी इलाके के मुल्ला पट्टी और मस्जिद मोहल्ले में बने 81 दो से तीन मंजिला पक्के और आलीशान मकानों को देखते ही देखते जमींदोज कर दिया।
कार्रवाई के दौरान घरों को टूटता देख स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़पें हुईं, लेकिन भारी सुरक्षा घेरे के चलते विरोध टिक नहीं पाया। करीब चार घंटे तक चले इस सघन ऑपरेशन में संयुक्त टीम ने जंगलात की 10 बीघा बेशकीमती जमीन को अवैध कब्जे से पूरी तरह मुक्त कराकर अपने नियंत्रण में ले लिया।
शेष 81 निर्माणों को ढहा दिया गया
तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) पुनीत तोमर के अनुसार, कोसी नदी के तटीय क्षेत्र में लगभग 226 हेक्टेयर वन भूमि पर लंबे समय से अवैध बस्तियां बसाई गई थीं। विभाग ने विधिक प्रक्रिया के तहत 91 अतिक्रमणकारियों को बेदखली नोटिस जारी किए थे, जिनमें से 9 मामलों में अदालत में सुनवाई विचाराधीन होने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि नोटिस खारिज होते ही शेष 81 निर्माणों को ढहा दिया गया।
मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 800 से अधिक पुलिसकर्मी, 300 वनकर्मी और पीएसी की तीन कंपनियां तैनात की गई थीं। एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि कानून-व्यवस्था को लेकर पुछड़ी के चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात रही और तोड़े गए भवनों के मलबे को डंपरों के जरिए तुरंत हटाने का काम शुरू कर दिया गया।
अभियान को अंजाम देने के लिए प्रशासन ने पूरे पुछड़ी क्षेत्र को 2 सुपर जोन, 7 जोन और 14 सेक्टरों में बांटकर किले में तब्दील कर दिया था। कोतवाल सुशील कुमार ने जानकारी दी कि 5 अपर पुलिस अधीक्षक, 6 सीओ, 25 इंस्पेक्टर, 82 सब-इंस्पेक्टर, 310 हेड कांस्टेबल और 125 महिला आरक्षियों को संवेदनशील प्वाइंट्स पर तैनात किया गया था। कार्रवाई की भनक लगते ही संभावित बवाल को रोकने के लिए पुलिस ने सुबह साढ़े चार बजे से ही भवानीगंज, श्मशान घाट और चिल्किया की तरफ से पुछड़ी में दाखिल होने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर 6 मजबूत बैरियर लगाकर 'नो-एंट्री' लागू कर दी थी। शहर के अन्य हिस्सों में भी खुफिया एजेंसियां और पुलिस बल लगातार निगरानी बनाए हुए थे, जबकि शांति भंग की आशंका में 23 चिह्नित लोगों को पहले ही निरोधात्मक नोटिस थमाए गए थे।
इस बड़े ध्वस्तीकरण के बीच कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मुल्ला पट्टी निवासी फातिमा का परिवार अपनी बेटी तमन्ना के निकाह की तैयारियां कर रहा था, जिसकी बारात आगामी 5 नवंबर को उत्तर प्रदेश के मसवासी से आनी थी। शादी के लिए संजोकर रखा गया अधिकांश दहेज और घरेलू सामान मलबे के नीचे दबकर बर्बाद हो गया। रोती-बिलखती फातिमा ने बताया कि जीवनभर की मेहनत की कमाई से यह पक्का आशियाना बनाया था, जो शादी से ठीक चार दिन पहले मलबे का ढेर बन गया। बेटी को आनन-फानन में एक रिश्तेदार के घर भेजा गया है और अब खुले आसमान के नीचे शादी के आयोजन को लेकर गहरा संकट खड़ा हो गया है। ध्वस्तीकरण के दौरान अपना घर टूटता देख एक महिला गश खाकर गिर पड़ी, जबकि सामान निकालते वक्त छत से गिरने और टिन शेड की चपेट में आने से दो अन्य लोग घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस व्यापक कार्रवाई पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कांग्रेस नेता विजय शर्मा ने 81 परिवारों के घरों को एक झटके में ध्वस्त किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए इसे अमानवीय करार दिया है। उन्होंने कहा कि मकान सिर्फ ईंट और गारे की दीवारें नहीं होते, बल्कि गरीब की जीवनभर की कमाई और बच्चों का भविष्य होते हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार, वन विभाग और जिला प्रशासन से मानवीय रुख अपनाते हुए बेघर हुए प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत शिविर, वैकल्पिक आवास और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था करने की पुरजोर मांग उठाई है।