रूस में 97 दिनों तक नर्क जैसी जिंदगी! उत्तराखंड के दो सगे भाइयों को एजेंट ने बेचा, बंधुआ मजदूर बनाकर कराया अमानवीय काम

रूस में 97 दिनों तक नर्क जैसी जिंदगी! उत्तराखंड के दो सगे भाइयों को एजेंट ने बेचा, बंधुआ मजदूर बनाकर कराया अमानवीय काम

आजकल हर युवा विदेश जाकर खूब पैसा कमाना चाहता है। लेकिन बिना सही जानकारी के उठाया गया यह कदम जिंदगी को नर्क बना सकता है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवासी आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की के साथ बिल्कुल ऐसा ही हुआ। विदेश में अच्छी नौकरी का लालच देकर उन्हें ऐसे जाल में फंसाया गया जहां से जिंदा लौटना किसी चमत्कार से कम नहीं था।

करीब 97 दिन तक रूस में बंधुआ मजदूरों की तरह खौफनाक जिंदगी जीने के बाद आखिरकार दोनों भाई अपने वतन लौट आए हैं। यह घटना उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो बिना सोचे-समझे एजेंटों पर भरोसा कर लेते हैं।

एजेंट का बिछाया जाल और 8 लाख का भारी कर्ज

इन दोनों भाइयों को सितारगंज के रहने वाले एक एजेंट ने सुनहरे सपने दिखाए थे। उनसे कहा गया था कि रूस की एक बहुत बड़ी कंपनी में उन्हें काम मिलेगा। वहां उन्हें हर दिन सिर्फ दस घंटे काम करना होगा और बदले में 60 से 80 हजार रुपये हर महीने सैलरी मिलेगी। इस बात पर भरोसा करके दोनों ने बैंक से 8 लाख रुपये का बड़ा कर्ज ले लिया। बीते छह मई को वे रूस की धरती पर पहुंचे लेकिन वहां कदम रखते ही सच्चाई सामने आ गई। कोई बड़ी कंपनी नहीं थी बल्कि उन्हें एक दक्षिण अफ्रीकी ठेकेदार के हवाले कर दिया गया।

97 दिनों तक झेला जुल्म और अमानवीय बर्ताव

रूस में दोनों भाइयों की जिंदगी किसी बुरे सपने में बदल गई। जिस जगह उन्हें रखा गया वह एक बिल्कुल अनजान इलाका था। काम का समय 10 घंटे से बढ़ाकर 14 घंटे कर दिया गया। इतनी कड़ी मेहनत के बाद भी उन्हें खाने के लिए पूरे दिन में सिर्फ एक पाव रोटी और एक उबला हुआ अंडा मिलता था। प्यास लगने पर पानी की एक छोटी बोतल के लिए उन्हें सौ रुपये देने पड़ते थे। शुरुआत की चार रातें तो उन्हें जंगलों में गुजारनी पड़ीं। हालत यह थी कि लगातार 17 दिनों तक दोनों भाई एक ही कपड़े पहने रहे।

सरकार और मीडिया की मदद से मिली आजादी

इनकी यह दर्दनाक स्थिति जब एक समाचार संस्थान के जरिए सामने आई तो शासन प्रशासन तुरंत हरकत में आया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गंभीरता को समझा। उन्होंने विदेश मंत्रालय और रूस में मौजूद भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क साधा। इस पूरी प्रक्रिया में यूकेडी नेता काशी सिंह ऐरी और सामाजिक कार्यकर्ता रामदेव वर्मा ने भी काफी मदद की। सरकार की लगातार कोशिशों का ही नतीजा था कि इन दोनों की सकुशल भारत वापसी हो पाई। वापसी के बाद मुख्यमंत्री ने खुद फोन करके दोनों का हालचाल जाना और राज्य के हर नागरिक की सुरक्षा का भरोसा दिया।

परिवार में लौटी खुशियां और न्याय की गुहार

लंबे समय बाद अपने घर पिथौरागढ़ पहुंचने पर परिवार वालों की जान में जान आई। आनंद की गर्भवती पत्नी तनुजा और बाकी परिजनों की आंखें खुशी से भर आईं। घर वालों ने मीडिया और मुख्यमंत्री का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से अपील की है कि उनके साथ धोखाधड़ी करने वाले उस एजेंट से 8 लाख रुपये की रकम वापस दिलाई जाए। यह घटना दिखाती है कि बिना पूरी जांच पड़ताल के विदेश जाने का फैसला कितना घातक हो सकता है।

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