बाबा रामदेव के पतंजलि फूड पार्क से CISF सुरक्षा हटाने का बड़ा फैसला
भारतीय औद्योगिक और व्यावसायिक जगत में पिछले कुछ दशकों के दौरान अपनी एक अलग और विशाल पहचान बनाने वाले पतंजलि योगपीठ और उससे जुड़े संस्थानों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित पतंजलि फूड पार्क (Patanjali Food Park) को मिलने वाली केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की सुरक्षा व्यवस्था को अब आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से हटा लिया गया है। देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण सुरक्षा बलों में शुमार सीआईएसएफ को किसी निजी औद्योगिक संस्थान से वापस बुलाए जाने का यह निर्णय देश भर के मीडिया गलियारों और व्यापारिक जगत में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। इस पूरी कार्रवाई के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) की ओर से सख्त निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके अंतर्गत इस संस्थान पर तैनात सुरक्षा दस्ते से जुड़े सभी 34 पदों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश दिया गया है। इस अचानक हुए बड़े प्रशासनिक बदलाव के बाद से ही राजनीतिक और व्यावसायिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
गृह मंत्रालय के निर्देश और सुरक्षा समीक्षा के आधार पर उठाया गया कदम
किसी भी निजी या सार्वजनिक संस्थान को जब केंद्र सरकार द्वारा सीआईएसएफ जैसी अति-विशिष्ट केंद्रीय सुरक्षा मुहैया कराई जाती है, तो उसकी एक लंबी और बेहद कड़ाई से परखी जाने वाली प्रक्रिया होती है। सूत्रों और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समय-समय पर देश भर के विभिन्न संस्थानों की सुरक्षा समीक्षा (Security Audit) की जाती है। इस समीक्षा प्रक्रिया के दौरान यह आंका जाता है कि संबंधित संस्थान या परिसर को वर्तमान समय में किसी प्रकार का वास्तविक और गंभीर खतरा (Threat Perception) है या नहीं। पतंजलि फूड पार्क के मामले में भी जब हाल ही में उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक आयोजित की गई, तो यह पाया गया कि अब इस परिसर को केंद्रीय स्तर पर सशस्त्र सीआईएसएफ सुरक्षा घेरे में रखने की उतनी आवश्यकता नहीं है जितनी पहले महसूस की गई थी। इसी खुफिया और प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने बिना किसी देरी के इस सुरक्षा कवर को वापस लेने का अंतिम फैसला लिया और यूनिट को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
पतंजलि फूड पार्क से हटे सभी 34 पद और अब आगे की व्यवस्था
गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आदेशों के मुताबिक, हरिद्वार स्थित इस फूड पार्क की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के जवानों के लिए स्वीकृत किए गए सभी 34 पदों को पूरी तरह से समाप्त (Abolished) कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब वहां न तो केंद्र सरकार के ये सशस्त्र जवान तैनात रहेंगे और न ही इस यूनिट का कोई आधिकारिक अस्तित्व उस परिसर में रह जाएगा। आमतौर पर इस प्रकार के औद्योगिक पार्कों में अंदरूनी सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी निजी सुरक्षा एजेंसियों (Private Security Guards) के कंधों पर होती है, और अब पतंजलि प्रबंधन को भी अपने इस विशाल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से निजी सुरक्षा कर्मियों या स्थानीय पुलिस के समन्वय से ही संभालनी होगी। इस बड़े बदलाव के बाद से पतंजलि समूह की तरफ से इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह संस्थान देश भर में अपने उत्पादों और विशाल नेटवर्क के लिए जाना जाता है।
निजी संस्थानों को वीआईपी सुरक्षा देने के नियमों पर उठते सवाल
भारत में जब भी किसी निजी संस्थान, उद्योगपति या धार्मिक-व्यापारी प्रतिष्ठान को केंद्र सरकार द्वारा सीआईएसएफ या अन्य केंद्रीय बलों की सुरक्षा (Paid CISF Security for Private Entities) दी जाती है, तब उस पर अक्सर सार्वजनिक और राजनीतिक मंचों पर बहस छिड़ जाती है। आलोचकों का यह तर्क रहा है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों का मुख्य कार्य देश की संवेदनशील रणनीतिक संपत्तियों, सरकारी उपक्रमों, एयरपोर्ट्स और राष्ट्र की सुरक्षा करना है, इसलिए निजी व्यावसायिक घरानों को इस तरह की सुरक्षा मिलना कई बार भेदभावपूर्ण या अनुचित प्रतीत होता है। हालांकि, सरकार का हमेशा से यह पक्ष रहा है कि जिन संस्थानों से देश की अर्थव्यवस्था या किसी विशिष्ट व्यक्ति को वास्तविक खतरा होता है, उन्हें तय नियमों और पूरे भुगतान (Paid Basis) के आधार पर सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। पतंजलि फूड पार्क से इस सुरक्षा कवच का हटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार अब समय-समय पर इन सुरक्षा समझौतों की समीक्षा करके उन्हें युक्तिसंगत (Rationalize) बनाने के रास्ते पर चल रही है।