4 साल की सेवा के बाद नहीं घूमेंगे बेरोजगार, उत्तराखंड में रिटायर होते ही अग्निवीरों को मिली सीधी सरकारी नौकरी
सेना से चार साल की सेवा पूरी कर लौटने वाले युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय सेना से नवंबर 2026 में रिटायर होने जा रहे पहले बैच के उत्तराखंड निवासी दो अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी पीएसी (प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी) के रिक्त पदों पर सीधे समायोजित करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। राज्य सरकार का यह फैसला उन युवाओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो सशस्त्र बलों से सेवामुक्त होकर नागरिक जीवन में वापसी कर रहे हैं। केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव की ओर से आए औपचारिक पत्र पर त्वरित संज्ञान लेते हुए सीएम ने इस समायोजन प्रस्ताव पर अपनी अंतिम मुहर लगाई।
मुख्यमंत्री धामी ने इस निर्णय पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई अग्निपथ योजना ने देश के युवाओं में अदम्य साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का मजबूत जज्बा भरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना में रहकर हासिल किया गया सैन्य कौशल और अनुशासन अमूल्य धरोहर है, जिसका सीधा लाभ राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में लिया जाएगा। वर्दीधारी पीएसी सेवा में इन प्रशिक्षित युवाओं के शामिल होने से राज्य पुलिस बल की कार्यक्षमता और आपातकालीन प्रबंधन को भी नई ताकत मिलेगी। सरकार का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश की सरहदों पर पराक्रम दिखाने वाले वीरों को अपने गृह राज्य में सम्मानजनक आजीविका और सेवा का निरंतर अवसर मिले।
गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार पहले से ही पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास को लेकर ठोस नीतियां लागू कर चुकी है। राज्य के भीतर समूह 'ग' के सभी वर्दीधारी पदों पर सेवानिवृत्त अग्निवीरों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की व्यवस्था पहले ही प्रभावी की जा चुकी है। इसके अलावा, सेवामुक्त जवानों को उनकी योग्यता के अनुसार सही रोजगार, मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए एक विशेष 'अग्निवीर रोजगार सेल' भी गठित किया गया है। पीएसी में समायोजन का यह नया कदम राज्य के युवाओं के बीच सकारात्मक संदेश दे रहा है कि चार साल की सेवा के बाद भी उनके करियर और सम्मान की पूरी गारंटी व्यवस्था के भीतर मौजूद है।