उत्तराखंड में आसमानी आफत: अगले 48 घंटे बेहद भारी, 9 जिलों में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की चेतावनी; देहरादून-पौड़ी समेत कई जगह स्कूल बंद
उत्तराखंड में मानसून के रौद्र रूप ने एक बार फिर जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य में अगले कुछ दिनों के लिए मूसलाधार बारिश का भीषण अलर्ट जारी किया है। प्रदेश की राजधानी देहरादून समेत कई पहाड़ी और मैदानी इलाकों में आधी रात से ही लगातार रुक-रुक कर भारी बारिश हो रही है, जिससे नदी-नाले उफान पर आ गए हैं और कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। मौसम की इस मार और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रभावित जिलों में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।
इन 9 जिलों में 'ऑरेंज अलर्ट', अचानक बाढ़ (Flash Flood) का खतरा
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के पहाड़ी भूगोल को देखते हुए संवेदनशील इलाकों के लिए कड़ा 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। आईएमडी (IMD) के अनुसार देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और पौड़ी जनपदों में कुछ स्थानों पर बहुत भारी से अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का भी तीव्र दौर देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि तेज बारिश के कारण पहाड़ी नदी-नालों में अचानक जलस्तर बढ़ने से फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) आ सकती है, इसलिए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
देहरादून, पौड़ी और पिथौरागढ़ में बंद किए गए स्कूल
लगातार बिगड़ते मौसम और भारी बारिश की आधिकारिक चेतावनियों के बाद संबंधित जिलाधिकारियों (DMs) ने एहतियाती कदम उठाए हैं। देहरादून, पौड़ी, पिथौरागढ़ और नैनीताल सहित भारी बारिश से प्रभावित अन्य जिलों में आज सभी सरकारी व निजी स्कूलों के साथ-साथ आंगनवाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यह आदेश छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है और सभी शिक्षण संस्थानों को इसका कड़ाई से पालन करना होगा। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे मौसम सामान्य होने तक बच्चों को घरों से बाहर न निकालें।
पहाड़ी रास्तों पर सफर न करने की सलाह, भूस्खलन का बढ़ा जोखिम
भारी बारिश का सबसे बड़ा असर उत्तराखंड के लाइफलाइन माने जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और लिंक रोड्स पर पड़ रहा है。 आईएमडी की सात दिनों की रिपोर्ट में संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में हल्के से मध्यम भूस्खलन (Landslides) और चट्टान गिरने की घटनाएं बढ़ने की आशंका जताई गई है। जिला आपदा प्रबंधन टीमों (DDMA) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। चारधाम यात्रा मार्ग समेत अन्य पर्वतीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों और स्थानीय वाहन चालकों को बेहद सतर्क रहने और केवल आवश्यक होने पर ही सफर करने की हिदायत दी गई है।
नदियों के किनारे जाने पर पूरी तरह पाबंदी, प्रशासन मुस्तैद
ऋषिकेश, हरिद्वार, हल्द्वानी और रुद्रप्रयाग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में गंगा, अलकनंदा, मंदाकिनी और गौला जैसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों के नदी किनारों, घाटों और संवेदनशील जलस्रोतों के पास जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और जल पुलिस की टीमों को जलभराव और तटीय इलाकों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।