पलायन का दर्द झेल रहे पहाड़ी गांवों की चमकेगी किस्मत, केंद्र सरकार का बड़ा तोहफा!
उत्तराखंड के उन सुदूर इलाकों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है जो चीन और नेपाल की सीमाओं से जुड़े हैं। अक्सर जंगलों के कड़े नियमों के कारण इन दुर्गम क्षेत्रों में सड़क या पुल बनाना एक लंबा और थकाऊ काम होता था। लेकिन अब केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए इन सामरिक महत्व वाले इलाकों को वन कानूनों से बड़ी छूट दी है। इस फैसले से न केवल सीमा पर तैनात हमारी सेना की ताकत दोगुनी होगी बल्कि पलायन का दर्द झेल रहे पहाड़ी गांवों की तकदीर भी बदल जाएगी।
क्या है नया नियम और किसे मिलेगा फायदा?
केंद्र के वन (संरक्षण एवं संवर्धन) संशोधन अधिनियम 2023 के तहत एक नया प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार अब वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) नियंत्रण रेखा (LOC) या अंतरराष्ट्रीय सीमा से 100 किलोमीटर के एरियल दायरे में आने वाले महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को जंगल की जमीन के इस्तेमाल में कड़े नियमों से नहीं गुजरना पड़ेगा।
हालांकि यह छूट हर किसी काम के लिए नहीं है। इसका सीधा लाभ सिर्फ उन खास परियोजनाओं को मिलेगा जिन्हें भारत का रक्षा मंत्रालय या गृह मंत्रालय देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी मानकर अपनी मंजूरी देंगे।
उत्तराखंड सरकार ने दिखाई फुर्ती, 15 दिन का दिया अल्टीमेटम
राज्य सरकार ने भी इस मौके का फायदा उठाने में कोई देरी नहीं की है। ग्राम्य विकास विभाग के सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने आदेश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटी ऐसी सभी सड़कों और परियोजनाओं की लिस्ट 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से शासन को सौंप दें। इससे वन विभाग की आपत्तियों के कारण सालों से अटकी पड़ी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की कई सड़कों के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा।
क्यों माना जा रहा है इसे एक 'गेम चेंजर' कदम?
उत्तराखंड का भौगोलिक ढांचा बेहद कठिन है। बॉर्डर तक सेना की गाड़ियां और रसद पहुंचाने के लिए चौड़ी और पक्की सड़कों का होना बहुत जरूरी है। इस नई छूट से सेना की आवाजाही काफी तेज और आसान हो जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि सीमांत गांवों में कनेक्टिविटी सुधरेगी। जब अच्छी सड़कें बनेंगी तो वहां पर्यटन और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। साथ ही आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं भी समय पर पहुंच सकेंगी जिससे लोग गांव छोड़कर शहरों की तरफ पलायन नहीं करेंगे।
देहरादून में भारत-नेपाल के बीच सुरक्षा पर महामंथन
सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी बड़ी पहल हो रही है। 20 और 21 अगस्त को देहरादून में भारत और नेपाल के बीच 'संयुक्त कार्य समूह' (JWG) की 14वीं उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की देखरेख में हो रही इस दो दिवसीय बैठक में दोनों देशों के विदेश और गृह मंत्रालय के बड़े अधिकारी शामिल हो रहे हैं। नेपाल की तरफ से इस दल का नेतृत्व वहां के गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आनंद काफ्ले कर रहे हैं। याद रहे कि दोनों देशों के बीच इससे पिछली (13वीं) बैठक नेपाल के खूबसूरत शहर पोखरा में हुई थी।
घुसपैठ और तस्करी पर नकेल कसने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार इस बैठक का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच की खुली सीमाओं की सुरक्षा को और ज्यादा पुख्ता करना है। दोनों देश मिलकर एक ऐसा मजबूत तंत्र बनाएंगे जिससे तीसरे देश के नागरिकों की अवैध एंट्री और घुसपैठ को पूरी तरह रोका जा सके। इसके अलावा बॉर्डर के रास्ते होने वाले ड्रग्स की तस्करी और अवैध हथियारों के काले कारोबार को जड़ से खत्म करने पर भी गंभीर मंथन होगा।