बद्रीनाथ हादसे के बाद DGCA के नए सेफ्टी नियमों पर घमासान, ऑपरेटरों ने को-पायलट रखने से किया इनकार

बद्रीनाथ हादसे के बाद DGCA के नए सेफ्टी नियमों पर घमासान, ऑपरेटरों ने को-पायलट रखने से किया इनकार

बद्रीनाथ से देहरादून लौटते समय हाल ही में हुए भीषण हेलीकॉप्टर क्रैश में पायलट समेत छह लोगों की दर्दनाक मौत के बाद चारधाम हवाई सेवा पर बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत संकट खड़ा हो गया है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर संचालन को अभेद्य और सुरक्षित बनाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश तय किए थे, जिन्हें 2 नवंबर से अनिवार्य रूप से लागू किया जाना था।

मगर हेली ऑपरेटर एसोसिएशन ने अचानक इन नए दिशा-निर्देशों, खासतौर पर अनिवार्य 'को-पायलट' (दो पायलट) रखने के नियम को मानने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। ऑपरेटरों के इस बगावती तेवर के बाद चारधाम के लिए संचालित होने वाली चार्टर्ड हेलीकॉप्टर उड़ानों पर भारी अनिश्चितता और संशय के बादल मंडराने लगे हैं।

डीजीसीए और यूकाडा द्वारा तैयार किए गए संशोधित सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक, चारधाम के किसी भी रूट पर उड़ान भरने वाले हर चार्टर्ड हेलीकॉप्टर में अब दो पायलटों की मौजूदगी अनिवार्य की गई थी। इसके साथ ही उड़ान भरने से पूर्व देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड पर तैनात यूकाडा के हेड ऑफ ऑपरेशंस (HoO) से गंतव्य की लिखित मंजूरी लेना अनिवार्य किया गया था। 

नए नियमों में और क्या

नए नियमों में यह भी तय हुआ था कि हर सुरक्षित लैंडिंग के तुरंत बाद को-पायलट तय फॉर्मेट में मौसम की मौजूदा स्थिति और विजिबिलिटी की रियल-टाइम रिपोर्ट यूकाडा कंट्रोल रूम को भेजेगा, ताकि आगे उड़ने वाले चॉपर्स के लिए सटीक फैसला लिया जा सके। हालांकि, हेली ऑपरेटर एसोसिएशन ने डीजीसीए को पत्र भेजकर विरोध दर्ज कराया है कि हर उड़ान में को-पायलट अनिवार्य करने से संचालन खर्च में भारी इजाफा होगा, जिसे वहन करना संभव नहीं है। इस विवाद पर यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) प्रतीक जैन ने स्पष्ट किया है कि प्राधिकरण की भूमिका केवल तय नियमों के तहत सुरक्षित संचालन कराने तक सीमित है।

ऑपरेटरों की व्यवहारिक दिक्कतों को देखते हुए नियामक ने नियमों में कुछ ढील भी दी थी। इसके तहत पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान का तजुर्बा रखने वाले 60 वर्ष से अधिक उम्र के अनुभवी पायलटों को को-पायलट के तौर पर तैनात करने की अनुमति दी गई थी, बशर्ते मुख्य पायलट-इन-कमांड डीजीसीए के तय मानकों और उड़ान घंटों को पूरी तरह पूरा करता हो। इसके अलावा ट्विन-पायलट की जरूरत के मद्देनजर पायलट क्रॉस-यूटिलाइजेशन के आवेदनों को फोन और त्वरित डिजिटल माध्यमों से तुरंत मंजूरी देने का भरोसा भी दिया गया था, मगर ऑपरेटर अतिरिक्त वित्तीय भार का हवाला देकर बैकफुट पर जाने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।

दूसरी तरफ, शुक्रवार को हुए इस दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे के सभी छह मृतकों के शव रविवार को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके परिजनों को सौंप दिए गए। अत्यंत दुर्गम पहाड़ी इलाके में चले लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचाव दलों ने सभी शवों को बॉडी बैग में रखकर पैदल तोली सड़क तक पहुंचाया, जहां से एंबुलेंस के जरिए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योतिर्मठ लाया गया। 

प्राथमिक डॉक्टरी जांच के बाद शवों को दो विशेष हेलीकॉप्टरों से ऋषिकेश एम्स भेजा गया, जहां परिजनों ने कपड़ों, आभूषणों और शारीरिक निशानों से उनकी शिनाख्त की। दिल्ली निवासी 48 वर्षीय मुख्य पायलट हिमांशु सभरवाल का पार्थिव शरीर उनके परिजन सड़क मार्ग से दिल्ली ले गए, जबकि कर्नाटक के रहने वाले अन्य पांच मृतकों—प्रताप (41), क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर अरुण सालुंके (44), केवीबी शंकर गौड़ा (39), सुधीर (50) और एसएस नटराजा (51) के पार्थिव शरीरों को हवाई मार्ग से उनके गृह राज्य भेजा गया।