बागेश्वर-टिहरी समेत 6 जिलों में भारी बारिश और भयंकर बिजली गिरने का येलो अलर्ट जारी

बागेश्वर-टिहरी समेत 6 जिलों में भारी बारिश और भयंकर बिजली गिरने का येलो अलर्ट जारी

देवभूमि उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर बहुत ही नाटकीय मोड़ पर आ गया है, जहां मानसून की विदाई से ठीक पहले बादलों का एक नया और आक्रामक दौर सक्रिय हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने अपनी ताजा चेतावनी जारी करते हुए राज्य के बागेश्वर और टिहरी गढ़वाल समेत लगभग 6 से 7 संवेदनशील जिलों में मूसलाधार बारिश और आसमान से कड़कती भयंकर आकाशीय बिजली को लेकर येलो अलर्ट घोषित किया है। राज्य की राजधानी देहरादून समेत कई प्रमुख पर्वतीय और मैदानी इलाकों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बनी हुई उमस भरी और पसीने वाली गर्मी के बाद सोमवार की सुबह अचानक बादलों ने डेरा डाल दिया, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 72 घंटे यानी तीन दिनों तक पर्वतीय अंचलों में बादलों की यह आंख मिचौली और बारिश का यह दौर यूं ही जारी रह सकता है, जिससे स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस विस्तृत और ग्राउंड-जीरो रिपोर्ट के माध्यम से हम आपको उत्तराखंड के ताजा मौसम मिजाज, प्रभावित जिलों की सूची और बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

उत्तराखंड के इन 6 से 7 जिलों पर मंडरा रहा है भारी बारिश और आकाशीय बिजली का सबसे बड़ा खतरा

मौसम विभाग की नवीनतम भविष्यवाणियों के मुताबिक, उत्तराखंड के पर्वतीय और सीमावर्ती जिलों में अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम का मिजाज बेहद तीखा और खतरनाक बना रह सकता है। जिन प्रमुख जिलों के लिए विशेष चेतावनी जारी की गई है उनमें बागेश्वर, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पौड़ी गढ़वाल का नाम सबसे ऊपर है। इन सभी क्षेत्रों में दोपहर या शाम के समय अचानक काले घने बादलों के उमड़ने और गरज-चमक के साथ मूसलाधार बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। विशेष रूप से बागेश्वर और पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले इलाकों में बादलों की सक्रियता सबसे अधिक रहने के आसार हैं, जिससे वहां अचानक जलस्तर बढ़ने या भूस्खलन जैसी घटनाएं सामने आ सकती हैं। मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि इन इलाकों में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बहुत ही संभलकर रहने की जरूरत है क्योंकि अचानक होने वाली यह बारिश रास्तों को अवरुद्ध कर सकती है।

राजधानी देहरादून में बदला मौसम का मिजाज: छाए काले बादल और ठंडी हवाओं ने दिलाई उमस से राहत

पर्वतीय जिलों के साथ-साथ अगर बात करें राजधानी देहरादून और उसके आसपास के मैदानी तथा तराई वाले क्षेत्रों की, तो सोमवार की सुबह से ही यहां मौसम का रुख पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। पिछले कई दिनों से लगातार खिली धूप और तेज उमस के कारण लोग परेशान हो रहे थे, लेकिन सुबह होते ही आसमान में बादलों ने डेरा डाल लिया और राजपुर रोड, सहस्रधारा तथा मसूरी की तलहटी से लेकर शहर के तमाम हिस्सों में ठंडी हवाओं के झोंके चलने लगे। शहर के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बौछारें भी रिकॉर्ड की गई हैं, जिससे तापमान में खासी गिरावट आई है और लोगों को चिपचिपी गर्मी से बड़ी राहत मिली है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि देहरादून और उसके आसपास के इलाकों में अगले एक-दो दिन तक आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर गरज के साथ छिटपुट बौछारें पड़ने का यह सिलसिला बना रहेगा।

मानसून की विदाई से पहले बादलों की आखिरी सक्रियता और आने वाले 72 घंटों का पूरा वेदर पूर्वानुमान

मौसम विज्ञानियों का विश्लेषण यह कहता है कि सितंबर महीने के इस पड़ाव पर आकर उत्तराखंड से मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू होने वाली होती है, लेकिन उससे पहले वायुमंडल में बनने वाले नमी वाले सिस्टम के कारण बादलों की यह आखिरी और बड़ी सक्रियता देखने को मिलती है। आगामी 17 और 18 सितंबर के बाद ही राज्य में बारिश की गतिविधियों और इसकी तीव्रता में व्यापक कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है, तब तक पर्वतीय अंचलों में छिटपुट से लेकर भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी जनपदों में भी हालांकि बहुत भारी बारिश की संभावना तो नहीं है, लेकिन तेज बादलों की आवाजाही और हल्की फुहारें वहां भी मौसम को सुहाना बनाए रखेंगी। इस बदलते हुए मौसम के बीच सबसे बड़ा कंसर्न आकाशीय बिजली का गिरना है, जिसे लेकर किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

चारधाम यात्रियों और स्थानीय नागरिकों के लिए जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई खास एडवाइजरी

चूंकि उत्तराखंड में इन दिनों बड़ी संख्या में देश के कोने-कोने से चारधाम यात्रा के तीर्थयात्री और पर्यटक पहुंच रहे हैं, इसलिए इस खराब मौसम के अलर्ट ने प्रशासन की धड़कनों को थोड़ा बढ़ा दिया है। सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से यह सख्त अपील की गई है कि सभी यात्री संवेदनशील पहाड़ी मार्गों, विशेषकर भूस्खलन संभावित (Landslide Prone Zones) क्षेत्रों में यात्रा करते समय पूरी सतर्कता बरतें। गरज-चमक और वज्रपात (Lightning) के दौरान कभी भी खुले आसमान के नीचे, बड़े पेड़ों के पास या बिजली के खंभों के नजदीक बिल्कुल न खड़े हों, बल्कि किसी सुरक्षित और पक्के भवन में शरण लें। इसके अलावा किसी भी उफनते हुए नाले या गदेरे को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और आपकी यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रह सके।