मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दिवाली पर कौन-सा श्री यंत्र करें स्थापित? खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दिवाली पर कौन-सा श्री यंत्र करें स्थापित? खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

सनातन धर्म में धन, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दीपावली का पावन पर्व सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है। दिवाली की महालक्ष्मी पूजा के दौरान घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तरह-तरह के धार्मिक और आध्यात्मिक उपाय किए जाते हैं। इन्हीं सिद्ध उपायों में से एक है 'श्री यंत्र' (Shree Yantra) की स्थापना। धार्मिक मान्यताओं और वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, श्री यंत्र को सभी यंत्रों का राजा यानी 'यंत्रराज' कहा जाता है। इसे मां लक्ष्मी का साक्षात भौतिक स्वरूप माना गया है। जिस घर या व्यापारिक स्थल पर पूरे विधि-विधान से सिद्ध श्री यंत्र स्थापित होता है, वहां कभी भी धन-धान्य, वैभव और सुख-समृद्धि की कमी नहीं होती। हालांकि, बाजार में कई तरह के श्री यंत्र उपलब्ध होते हैं, जिससे श्रद्धालुओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि दीपावली की पूजा के लिए कौन-सा श्री यंत्र सबसे शुभ और फलदायी होता है? इसके साथ ही श्री यंत्र की खरीदारी करते समय किन विशेष बातों और नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, आइए जानते हैं इस विस्तृत रिपोर्ट में।

दीपावली पूजन के लिए कौन-सा श्री यंत्र माना जाता है सर्वोत्तम?

वैदिक ग्रंथों और तंत्र शास्त्र के अनुसार, श्री यंत्र मुख्य रूप से तीन प्रकार के रूपों और विभिन्न धातुओं में निर्मित होते हैं। इनमें 'स्फटिक श्री यंत्र' (Crystal Shree Yantra), 'कछुआ पीठ यानी कूर्माकार श्री यंत्र' और 'तांबे या पंचधातु का श्री यंत्र' सबसे अधिक पूजनीय और प्रभावशाली माने गए हैं। दीपावली की रात महालक्ष्मी पूजन के लिए स्फटिक से निर्मित श्री यंत्र को सर्वोत्तम स्थान दिया गया है। स्फटिक को सकारात्मक ऊर्जा और शांति का प्रतीक माना जाता है, जो मां लक्ष्मी के चंचल स्वभाव को घर में स्थिर करने में मदद करता है। इसके अलावा, यदि आप व्यापार में उन्नति और धन वृद्धि की कामना रखते हैं, तो अष्टधातु या तांबे की प्लेट पर उकेरा गया अथवा कछुए की पीठ पर स्थापित कूर्माकार श्री यंत्र लाना अत्यंत शुभ माना जाता है। कछुआ वास्तु शास्त्र में स्थायित्व का प्रतीक होता है, जो धन को लंबे समय तक आपके पास बनाए रखता है।

श्री यंत्र खरीदते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां: रखें इन बातों का ध्यान

बाजार या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से श्री यंत्र खरीदते समय श्रद्धालुओं को अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है, क्योंकि गलत या त्रुटिपूर्ण श्री यंत्र घर लाने से शुभ के बजाय अशुभ परिणाम भी मिल सकते हैं। सबसे पहली बात यह ध्यान रखनी चाहिए कि श्री यंत्र पूरी तरह से शुद्ध और निर्दोष धातु या स्फटिक का बना होना चाहिए। श्री यंत्र की बनावट में बने 9 त्रिकोण (Triangle) पूरी तरह से सटीक, संरेखित (Aligned) और स्पष्ट रूप से उकेरे होने चाहिए। यदि त्रिकोण आपस में सही तरीके से नहीं कटते हैं या कोई रेखा टूटी हुई है, तो ऐसा खंडित श्री यंत्र घर में स्थापित नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही, प्लास्टिक, कांच के नकली टुकड़ों या किसी सस्ती अशुद्ध धातु से बने श्री यंत्र को पूजा में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। हमेशा किसी विश्वसनीय और प्रामाणिक धार्मिक संस्थान से ही सिद्ध श्री यंत्र खरीदना चाहिए।

दीपावली पर श्री यंत्र की स्थापना की सही और प्रामाणिक विधि

दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा के शुभ मुहूर्त में श्री यंत्र की स्थापना करने का विशेष विधान है। सर्वप्रथम दीपावली की रात शुभ मुहूर्त में पूजा स्थान पर एक लाल या पीले रंग का स्वच्छ रेशमी कपड़ा बिछाएं। इसके बाद श्री यंत्र को गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक कराकर पूरी तरह पवित्र कर लें। पवित्र करने के पश्चात श्री यंत्र को उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) या अपने घर के मुख्य पूजा स्थल पर स्थापित करें। स्थापना के समय श्री यंत्र पर कुमकुम, अक्षत, लाल चंदन और गुलाबी या लाल रंग के कमल के फूल अर्पित करें। श्री यंत्र के सामने गाय के शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं और 'ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊं महालक्ष्म्यै नमः' अथवा 'श्री सूक्त' का कम से कम 108 बार पाठ करें। ऐसा करने से श्री यंत्र जाग्रत और प्राण-प्रतिष्ठित हो जाता है।

घर और व्यापार में श्री यंत्र स्थापित करने के अद्भूत लाभ

दीपावली पर विधि-विधान से स्थापित किया गया श्री यंत्र घर की संपूर्ण नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोषों को पूरी तरह से समाप्त कर देता है। ज्योतिषविदों के अनुसार, जो व्यक्ति प्रतिदिन श्री यंत्र के दर्शन करता है और उसकी धूप-दीप से पूजा करता है, उसके जीवन से आर्थिक तंगी, कर्ज और धन की बर्बादी जैसी समस्याएं हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं। व्यापारिक प्रतिष्ठानों, दुकानों और ऑफिस के गल्ले (tills) में श्री यंत्र रखने से व्यापार में तेजी से वृद्धि होती है और नए आय के स्रोत बनते हैं। यह न केवल धन आकर्षित करता है, बल्कि घर के सदस्यों के बीच मानसिक शांति, आपसी प्रेम और स्वास्थ्य में भी अभूतपूर्व सुधार लाता है।

नियमित पूजा और रखरखाव के बेहद जरूरी नियम

श्री यंत्र की स्थापना केवल दीपावली के दिन कर देना ही काफी नहीं होता, बल्कि इसकी पवित्रता और नियमित पूजा-अर्चना को बनाए रखना बेहद जरूरी है। श्री यंत्र को कभी भी गंदे हाथों से नहीं छूना चाहिए और न ही इसके आसपास गंदगी जमा होने देनी चाहिए। हर शुक्रवार को श्री यंत्र पर इत्र अर्पित करना और पंचामृत से स्नान कराना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि आप श्री यंत्र के सामने रोजाना श्री सूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो मां लक्ष्मी की असीम कृपा आपके परिवार पर सदैव बनी रहती है। इस दीपावली यदि आप भी अपने जीवन में सुख, शांति और अखंड धन-धान्य की कामना रखते हैं, तो पूरी सावधानी और नियमों का पालन करते हुए अपने घर में सिद्ध श्री यंत्र अवश्य लाएं।