पाकिस्तान में 7 महीनों से तड़प रहे 6 भारतीय नागरिक, बिना किसी गुनाह के कैसे बने जहाज के कैदी?
अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमाओं और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की क्रूरता से जुड़ी एक बेहद दिल दहला देने वाली और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। भारतीय सीमाओं से दूर पाकिस्तानी जलक्षेत्र और कराची तट के पास पिछले सात लंबे महीनों से भारत के 6 बेकसूर नागरिक अमानवीय परिस्थितियों में तड़पने को मजबूर हैं। बिना किसी गुनाह या आपराधिक रिकॉर्ड के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग एजेंसियों की लापरवाही और पाकिस्तानी अधिकारियों की बेरुखी के चलते ये भारतीय मर्चेंट नेवी कर्मी एक मालवाहक जहाज के भीतर बंधक जैसी जिंदगी जीने को विवश हो गए हैं। खाने-पीने के राशन की भारी किल्लत, पीने के साफ पानी के अभाव और मेडिकल सुविधाओं की अनुपस्थिति में समुद्र की लहरों के बीच कैद ये भारतीय नागरिक पल-पल अपनी जिंदगी की भीख मांग रहे हैं। पाकिस्तान के कराची बंदरगाह और वहां के अधिकारियों के इस अड़ियल रवैये ने न केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों (Maritime Laws) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पीड़ित परिवारों के दिलों में गहरा खौफ और मातम भर दिया है।
कैसे शुरू हुई मुसीबत और बिना किसी जुर्म के समुद्र के बीच कैदी बने 6 भारतीय नागरिक?
इस दर्दनाक दास्तान की शुरुआत लगभग सात महीने पहले हुई थी जब ये 6 भारतीय नागरिक मर्चेंट नेवी के एक कमर्शियल कार्गो शिप पर अपनी ड्यूटी पूरी करने के लिए सवार हुए थे। जहाज की यात्रा के दौरान अचानक तकनीकी खराबी और शिपिंग कंपनी के वित्तीय विवादों के कारण इस मालवाहक जहाज को पाकिस्तानी समुद्री सीमा के पास रुकने पर मजबूर होना पड़ा। पाकिस्तानी कोस्ट गार्ड और कराची पोर्ट अथॉरिटी ने जहाज को अपने नियंत्रण में ले लिया और उस पर मौजूद क्रू मेंबर्स के उतरने तथा वापस भारत लौटने पर कानूनी अड़चनें लगा दीं। भारत के ये नागरिक केवल अपना काम कर रहे पेशेवर कर्मी थे, जिनका किसी भी प्रकार की तस्करी, सीमा उल्लंघन या आपराधिक गतिविधि से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। इसके बावजूद पिछले सात महीनों से उन्हें न तो जहाज से बाहर निकलने दिया जा रहा है और न ही स्वदेश वापस आने की अनुमति दी जा रही है।
पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे भारतीय कर्मी: अमानवीय हालात और टूटती सांसों की आपबीती
कराची के पास समुद्र में खड़े इस जहाज के भीतर से जो रिपोर्ट्स और वीडियो संदेश बाहर आए हैं, वे किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी हैं। जहाज पर राशन और ताजा पीने का पानी लगभग खत्म हो चुका है। भयानक गर्मी और समुद्र की नम हवाओं के बीच ये 6 भारतीय नागरिक बूंद-बूंद पानी और सूखी रोटियों के सहारे अपनी सांसें बचा रहे हैं। कई क्रू मेंबर्स त्वचा संक्रमण, डिहाइड्रेशन और मानसिक अवसाद (Depression) जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। जहाज पर प्राथमिक चिकित्सा का कोई सामान नहीं बचा है, और पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई डॉक्टरी सहायता नहीं पहुंचाई जा रही है। एक तरह से यह जहाज इन भारतीय नागरिकों के लिए एक तैरती हुई जेल बन चुका है, जहां वे हर दिन अपनी मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
बिलख रहे परिजन: भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से तत्काल सुरक्षित वतन वापसी की गुहार
उधर भारत में मौजूद पीड़ित कर्मियों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के रहने वाले इन 6 भारतीय नागरिकों के परिजनों ने दिल्ली में विदेश मंत्रालय (MEA) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का दरवाजा खटखटाया है। परिजनों का कहना है कि जब उनके अपनों ने कोई अपराध ही नहीं किया है, तो उन्हें किसी दूसरे देश में इस तरह सजा क्यों दी जा रही है? परिजनों ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से हस्तक्षेप करने की भावुक अपील करते हुए कहा है कि कूटनीतिक चैनलों के जरिए पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाया जाए और कराची में फंसे इन निर्दोष नागरिकों को सुरक्षित निकालकर तुरंत भारत वापस लाया जाए। परिजनों की रातें रोते-बिलखते कट रही हैं और उन्हें डर है कि अगर समय रहते मदद नहीं पहुंची तो अनहोनी हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का सरेआम उल्लंघन और कराची प्रशासन की संवेदनहीनता
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और मैरीटाइम लेबर कन्वेंशन (MLC) के स्थापित नियमों के मुताबिक, यदि कोई मालवाहक जहाज किसी देश के जलक्षेत्र में रुकता है या कंपनी विवाद में फंसता है, तो भी उस पर मौजूद निर्दोष क्रू मेंबर्स के मानवाधिकारों की रक्षा करना और उन्हें स्वदेश भेजने (Repatriation) की व्यवस्था करना तटीय देश और शिपिंग एजेंसी की कानूनी जिम्मेदारी होती है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार और कराची पोर्ट ट्रस्ट (KPT) इन अंतरराष्ट्रीय संधियों और मानवीय मूल्यों को पूरी तरह से दरकिनार कर रहे हैं। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत के प्रति अपनी पुरानी राजनीतिक खुन्नस निकालने के लिए पाकिस्तान इन बेकसूर नाविकों को मोहरा बना रहा है, जो कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसके मानवाधिकार रिकॉर्ड की पोल खोलता है।
कूटनीतिक हल की उम्मीद: कब खत्म होगा इन 6 भारतीयों का यह खौफनाक यातना गृह?
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद अब भारतीय उच्चायोग (Indian High Commission) और भारतीय विदेश मंत्रालय हरकत में आ गया है। इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के जरिए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के सामने यह मुद्दा बेहद सख्ती से उठाया जा रहा है ताकि भारतीय नागरिकों को राजनयिक पहुंच (Consular Access) प्रदान की जा सके और उनके इलाज तथा भोजन का तुरंत बंदोबस्त हो सके। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और समुद्री मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार को संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों के जरिए पाकिस्तान पर कड़ा दबाव बनाना चाहिए। पूरे देश की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान के इस 'समुद्री कैद' से छूटकर भारत के ये 6 लाल कब सकुशल अपनी मातृभूमि वापस लौटते हैं।