यमन के तीसरे सबसे बड़े शहर ताइज पर हूतियों का खूनी हमला और कड़ी घेराबंदी
मध्य पूर्व एशिया का एक और देश इस वक्त भीषण मानवीय और सामरिक संकट के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है, जहाँ यमन के सबसे महत्वपूर्ण और तीसरे सबसे बड़े शहर ताइज (Taiz) को लेकर हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। यमन के इस दक्षिण-पश्चिमी रणनीतिक शहर पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर से चौतरफा शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। हूती लड़ाकों द्वारा ताइज शहर को पूरी तरह से घेर लिए जाने और इसके मुख्य आपूर्ति मार्गों (Supply Routes) तथा रास्तों को बंद कर दिए जाने के बाद वहां की स्थिति बेहद भयावह हो गई है। इस क्रूर घेराबंदी के कारण शहर के भीतर रह रहे लाखों नागरिकों के सामने खाने-पीने की वस्तुओं, जीवन रक्षक दवाओं और ईंधन का भारी संकट पैदा हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) और उसके शीर्ष मानवाधिकार अधिकारियों ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस नाकाबंदी को जल्द से जल्द खत्म नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र एक बड़े मानवीय नरसंहार और तबाही का गवाह बन जाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं कि यमन के ताइज शहर में चल रहे इस खूनी संघर्ष और घेराबंदी के पीछे की पूरी और असल कहानी क्या है।
हूती विद्रोहियों की ओर से ताइज शहर की कड़ी घेराबंदी और मुख्य रास्तों पर कब्जा
यमन के गृह युद्ध और संघर्ष के इतिहास में ताइज शहर हमेशा से एक मुख्य रणनीतिक केंद्र रहा है, जिस पर नियंत्रण पाने के लिए पिछले एक दशक से अधिक समय से विभिन्न गुटों के बीच संघर्ष जारी है। वर्तमान घटनाक्रम के तहत हूती विद्रोहियों ने ताइज के आसपास के इलाकों में अपनी सैन्य गतिविधियों को अत्यधिक तीव्र कर दिया है। शहर के अंदरूनी हिस्सों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार की सेनाओं और स्थानीय सुरक्षा बलों का नियंत्रण तो अभी भी बना हुआ है, लेकिन हूती लड़ाकों ने शहर को बाहर की दुनिया से जोड़ने वाले तमाम मुख्य रास्तों और हाईवे को अपने कब्जे में लेते हुए पूरी तरह से सील कर दिया है। रास्तों के बंद हो जाने के कारण न तो शहर के अंदर कोई राहत सामग्री पहुंच पा रही है और न ही गंभीर रूप से घायल या बीमार मरीजों को बाहर के अस्पतालों में ले जाया जा सकता है। स्थानीय प्रशासन और चश्मदीदों के अनुसार, हूतियों द्वारा लगातार रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोलाबारी की जा रही है, जिससे आम नागरिकों का जीना मुहाल हो चुका है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) की गंभीर चेतावनी, भोजन और ईंधन के दाम दोगुने होने से मचा हाहाकार
ताइज शहर में उपजे इस गंभीर मानवीय संकट पर संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और मानवाधिकार एजेंसियों ने गहरी आपत्ति जताई है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि हूतियों द्वारा आपूर्ति मार्गों की नाकाबंदी किए जाने के कारण ताइज और उसके आसपास के जिलों में रहने वाले लाखों लोग बुनियादी जरूरतों के लिए मोहताज हो गए हैं। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि शहर के भीतर बचे-कुचे खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतें मात्र कुछ ही दिनों में दोगुनी से अधिक हो चुकी हैं। अस्पतालों में जनरेटर चलाने के लिए डीजल खत्म होने की कगार पर है, जिससे वहां भर्ती नवजात शिशुओं और गंभीर मरीजों की जान पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि इस क्रूर घेराबंदी को तुरंत नहीं हटाया गया और मानवीय सहायता ट्रकों को शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली, तो आने वाले दिनों में यहां भुखमरी से बड़े पैमाने पर मौतें हो सकती हैं।
यमन सरकार की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार, शांति और सुरक्षा के प्रयासों को लगा बड़ा झटका
इस दर्दनाक और गंभीर स्थिति को देखते हुए यमन की सरकार और विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से तत्काल हस्तक्षेप करने और हूतियों की इस नाकाबंदी को जबरन हटवाने की पुरजोर अपील की है। यमन के शीर्ष नेतृत्व ने हूती हमलों और इस अमानवीय घेराबंदी को 'युद्ध अपराध' की संज्ञा दी है, जो सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन करती है। दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में इस बात पर मंथन चल रहा है कि किस प्रकार इस क्षेत्र में फिर से शांति बहाल की जाए और आम नागरिकों को सुरक्षित निकाला जाए। बहरहाल, चारों तरफ से घिरे ताइज शहर के मासूम नागरिक इस वक्त मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष कर रहे हैं, और उनकी निगाहें केवल इस बात पर टिकी हैं कि कब दुनिया की बड़ी ताकतें और संयुक्त राष्ट्र उनके लिए राहत के द्वार खोलते हैं।