हिंद महासागर और भारतीय तटीय सुरक्षा पर मंडराता नया सामरिक खतरा
वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) के मोर्चे पर इन दिनों दक्षिण एशिया का क्षेत्र एक बार फिर से बेहद संवेदनशील और हलचल भरा दौर देख रहा है। भारत की बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताकत से बौखलाए उसके पड़ोसी देश लगातार ऐसे कदम उठा रहे हैं जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। हाल ही में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों और रणनीतिक विश्लेषकों की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने अपने सदाबहार सहयोगी चीन की तकनीकी सहायता और उसकी एक अत्याधुनिक पनडुब्बी का इस्तेमाल करते हुए एक खतरनाक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण के तुरंत बाद से ही भारत के तीन सबसे बड़े और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बंदरगाहों (Ports) की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। ड्रैगन यानी चीन इस पूरी गतिविधि से बेहद खुश नजर आ रहा है, क्योंकि इसके जरिए वह हिंद महासागर में भारत के सामरिक दबदबे को चुनौती देने के अपने पुराने खेल को आगे बढ़ा रहा है।
पाकिस्तान और चीन की नापाक धुरी और पनडुब्बी मिसाइल टेस्ट की असलियत
रक्षा मामलों के जानकारों का यह मानना है कि पाकिस्तान की नौसेना के पास अपनी ऐसी कोई स्वदेशी और उन्नत तकनीक नहीं है जिसके दम पर वह समुद्र के भीतर से इस तरह के हाई-एंड मिसाइल परीक्षण को अंजाम दे सके। इस पूरे सैन्य अभ्यास के पीछे चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA Navy) की वह नापाक चाल छिपी है जिसके तहत वह हिंद महासागर में भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान को एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। चीनी पनडुब्बी के जरिए किए गए इस मिसाइल परीक्षण का मुख्य उद्देश्य पानी के भीतर से सतह पर या जमीन पर सटीक निशाना लगाने की अपनी मारक क्षमता को परखना था। चीन लगातार पाकिस्तान को अत्याधुनिक पनडुब्बियां, युद्धपोत और मिसाइल तकनीक मुहैया करा रहा है ताकि वह अरब सागर और हिंद महासागर के रणनीतिक रास्तों पर अपनी पकड़ मजबूत कर सके। इस परीक्षण ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि बीजिंग और इस्लामाबाद की यह धुरी भारत की समुद्री सीमाओं के लिए एक बड़ा और निरंतर खतरा बनी हुई है।
भारत के तीन सबसे बड़े बंदरगाहों के सामरिक और आर्थिक मायने
भारत की तटीय सीमाएं हजारों किलोमीटर लंबी हैं और देश का अधिकांश अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री मार्ग यानी इन्हीं बंदरगाहों के जरिए संचालित होता है। जिन तीन प्रमुख बंदरगाहों के पास इस नए खतरे की सुगबुगाहट तेज हुई है, वे न केवल देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि नौसेना की सामरिक गतिविधियों के लिहाज से भी अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। जब इस तरह की मारक मिसाइलें पाकिस्तान के बेड़े में शामिल होती हैं और उन्हें चीनी तकनीक का समर्थन मिलता है, तो वे भारतीय तटों के करीब तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर सकती हैं। भारतीय नौसेना (Indian Navy) इस पूरी घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए है। देश के तटीय रक्षक बल (Coast Guard), नौसैनिक युद्धपोत और पनडुब्बी रोधी युद्धक विमान (ASW aircraft) लगातार अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक गश्त बढ़ा चुके हैं, ताकि किसी भी अप्रिय और दुस्साहसिक गतिविधि का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।
भारतीय नौसेना की मुस्तैदी और सामरिक मोर्चे पर भारत का कड़ा रुख
पाकिस्तान और चीन की इस मिलीभगत से भले ही पड़ोसी देश अपनी पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन भारतीय नौसेना की ताकत और उसकी तकनीकी तैयारी इतनी मजबूत है कि वह हर मोर्चे पर दुश्मन के हर नापाक मंसूब्रे को नाकाम करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी नौसैनिक क्षमताओं, आधुनिक स्वदेशी युद्धपोतों, परमाणु पनडुब्बियों और अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स का जो जाल बुना है, वह किसी भी बाहरी आक्रमण का सटीक जवाब देने की ताकत रखता है। रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि भारत को केवल रक्षात्मक रवैया अपनाने के बजाय हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति को और अधिक आक्रामक और मजबूत करना होगा, ताकि चीन और पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश मिल सके कि भारतीय सीमाओं की ओर उठने वाली किसी भी बुरी नजर को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।