शेख हसीना के बयानों पर बांग्लादेश सरकार का कड़ा रुख, कहा- 'अपनी सरजमीं से न उगलवाएं जहर, अब उनके लिए कोई जगह नहीं'

शेख हसीना के बयानों पर बांग्लादेश सरकार का कड़ा रुख, कहा- 'अपनी सरजमीं से न उगलवाएं जहर, अब उनके लिए कोई जगह नहीं'

भारत और बांग्लादेश के बीच के कूटनीतिक रिश्तों में एक बार फिर भारी तनाव और गर्माहट देखने को मिल रही है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा लगातार दिए जा रहे बयानों और हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अंतरिम सरकार ने बेहद सख्त तेवर अपना लिए हैं। ढाका ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि भारत की सरजमीं से शेख हसीना द्वारा लगातार सरकार के खिलाफ जहर उगला जा रहा है, जिसे अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बांग्लादेश ने दो टूक कह दिया है कि देश की राजनीति में अब उनके लिए या उनके बयानों के लिए कोई स्थान नहीं बचा है।

भारत में बैठकर दिए जा रहे बयानों से भड़का ढाका

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और प्रशासनिक हलकों में शेख हसीना की हालिया राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री पड़ोसी देश में शरण लेने के बावजूद लगातार वीडियो संदेशों और बयानों के जरिए देश की आंतरिक शांति को भंग करने की कोशिश कर रही हैं। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय और शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि किस तरह राजनीतिक मंचों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बयानों का दौर जारी है, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

प्रत्यर्पण और कानूनी कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज

शेख हसीना के बयानों के तीखे तेवर सामने आने के बाद बांग्लादेश में उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की मांग और अधिक तेज हो गई है। ढाका पहले ही भारत सरकार से उनके प्रत्यर्पण को लेकर आधिकारिक तौर पर बातचीत कर चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री के बयानों के बाद अंतरिम सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक दबाव बनाने की कोशिश करेगी। बांग्लादेशी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि देश में हुए बड़े राजनीतिक बदलाव और जनआंदोलन के बाद अब पुरानी व्यवस्था या पुराने नेतृत्व की वापसी का कोई भी रास्ता पूरी तरह से बंद हो चुका है।

द्विपक्षीय रिश्तों पर मंडराए कूटनीतिक बादल

इस ताज़ा घटनाक्रम के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संतुलन साधना एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारत ने पहले ही स्पष्ट किया था कि शेख हसीना को मानवीय आधार पर शरण दी गई है, लेकिन उनके राजनीतिक बयानों के कारण ढाका की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। बांग्लादेशी अवाम और नई सरकार के रुख से यह साफ जाहिर होता है कि पड़ोसी देश की राजनीति में शेख हसीना के भविष्य को लेकर अब टकराव और अधिक गहरा सकता है।

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