यूएन में बेंजामिन नेतन्याहू का ऐतिहासिक और दहाड़ता भाषण, बोले- यहूदी अब असहाय नहीं हैं
संयुक्त राष्ट्र (UN) की महासभा में इस बार इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ जहां वैश्विक मंचों पर इस्राइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर तीखी आलोचनाओं का दौर चल रहा है, वहीं नेतन्याहू ने बेहद आक्रामक तेवर अपनाते हुए दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। अपने इस हाई-प्रोफाइल संबोधन के दौरान इस्रायली प्रधानमंत्री ने दुनिया को यह संदेश दिया कि आधुनिक इस्राइल अपने आत्मरक्षा के अधिकार और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास के पन्नों में यहूदियों पर हुए अत्याचारों का दौर अब हमेशा के लिए बीत चुका है और आज का इस्राइल हर मोर्चे पर अपने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देना अच्छी तरह जानता है।
संयुक्त राष्ट्र के मंच से नेतन्याहू की दो टूक: इस्राइल अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए अकेले लड़ने को भी तैयार
संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच से दुनिया भर के नेताओं को संबोधित करते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर बेबाक राय रखी। उन्होंने मंच से साफ कर दिया कि इस्राइल के खिलाफ रचे जा रहे षड्यंत्रों और लगातार मिल रही धमकियों के सामने देश की सेना और नेतृत्व कभी पीछे हटने वाले नहीं हैं। नेतन्याहू ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव या कूटनीतिक आलोचनाओं के बावजूद इस्राइल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सैन्य अभियानों को तब तक जारी रखेगा जब तक देश पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक मंचों पर इस्राइल के खिलाफ किस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, लेकिन देश की जनता और सरकार का मनोबल इन बयानों से जरा भी नहीं डगमगाने वाला है। इस्रायली पीएम का यह रुख साफ करता है कि देश अपनी संप्रभुता के मामले में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
यहूदियों का बदल चुका है इतिहास: अब असहाय नहीं बल्कि दुनिया को जवाब देना जानता है इस्राइल
अपने संबोधन के सबसे भावनात्मक और आक्रामक हिस्से में बेंजामिन नेतन्याहू ने यहूदी इतिहास और वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि अतीत के दर्दनाक और असहाय दिनों को बहुत पीछे छोड़ दिया गया है। उन्होंने पूरी दुनिया को यह याद दिलाया कि द्वितीय विश्व युद्ध और उससे पहले के दौर में यहूदियों को किस प्रकार दुनिया भर में प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था, तब उनके पास अपनी रक्षा के लिए कोई देश या मजबूत सेना नहीं थी। लेकिन आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है और इस्राइल दुनिया का एकमात्र ऐसा यहूदी राष्ट्र है जो अपनी रक्षा स्वयं करने में पूरी तरह सक्षम है। नेतन्याहू ने गर्व के साथ कहा कि आज का यहूदी समाज किसी के रहमों-करम पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह अपने दुश्मनों की हर चाल का कड़ा और निर्णायक जवाब देने की पूरी ताकत रखता है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर प्रहार: वैश्विक दोहरे मानदंडों को लेकर बरसे नेतन्याहू
वर्तमान समय में पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में सुलग रही आग और लगातार विकृत होते जा रहे भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया के कई देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की बात तो बड़े मंचों से करते हैं, लेकिन जब इस्राइल अपनी धरती और जनता की सुरक्षा के लिए आतंकवादियों का खात्मा करता है, तो वही देश दोहरे मापदंड अपनाने लगते हैं। नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस्राइल को अकेले ही अपने अस्तित्व की इस लंबी और कठिन लड़ाई को लड़ना पड़ रहा है, और यदि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट नहीं होती है, तो आने वाले समय में इसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने अपने देश के रुख को दोहराते हुए कहा कि इस्राइल अपनी रक्षा के लिए किसी की अनुमति का मोहताज नहीं है।
शांति और संघर्ष के दो छोर: नेतन्याहू के भाषण ने तय की आने वाले दिनों की वैश्विक राजनीति की दिशा
संयुक्त राष्ट्र महासभा में बेंजामिन नेतन्याहू का यह भाषण आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और पश्चिम एशिया के हालातों की दिशा तय करने वाला एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। एक तरफ जहां उनके इस बयान से इस्राइल के समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विरोधी देशों और संगठनों की तरफ से प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस भाषण के बाद गाजा और लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में सैन्य तनाव और अधिक गहरा सकता है क्योंकि इस्राइल अपने सैन्य लक्ष्यों से पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है। बहरहाल, 'न मेरी आवाज दबेगी और न इस्राइल झुकेगा' का यह उद्घोष दुनिया के पटल पर एक बार फिर यह साबित कर गया है कि इस्राइल वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अपनी शर्तों पर जीने और अपनी सुरक्षा करने वाला देश है।