PoJK में महा-विस्फोट: 39 दिनों से शहरों में पूर्ण तालाबंदी, गोलियां, गिरफ्तारियां और लापता लोग... आखिर दुनिया से क्या छिपा रहा है पाकिस्तान?

PoJK में महा-विस्फोट: 39 दिनों से शहरों में पूर्ण तालाबंदी, गोलियां, गिरफ्तारियां और लापता लोग... आखिर दुनिया से क्या छिपा रहा है पाकिस्तान?

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) से मानवाधिकारों के हनन और दमन की एक ऐसी खौफनाक और दिल दहला देने वाली ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। मुजफ्फरबाद, रावलाकोट, पुंछ और मीरपुर समेत पूरा इलाका पिछले 39 दिनों से भयंकर तनाव और पूर्ण तालाबंदी (Lockdown) की चपेट में है। स्थानीय प्रशासन द्वारा इंटरनेट शटडाउन, भारी गोलाबारी, आंसू गैस के गोलों की बौछार और निर्दोष नागरिकों की अंधाधुंध गिरफ्तारियों के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर पाकिस्तानी हुकूमत और उसकी सेना PoJK के भीतर ऐसा क्या कर रही है, जिसे दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए इतनी बड़ी 'डिजिटल और फिजिकल दीवार' खड़ी कर दी गई है?

जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर बैन और 600+ गिरफ्तारियां

इस भयंकर अशांति और आक्रोश की मुख्य वजह 'जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा नागरिक अधिकार आंदोलन है। पाकिस्तानी प्रशासन ने दमनकारी रुख अपनाते हुए इस जन-आंदोलन को कुचलने के लिए JAAC को आतंकवाद विरोधी अधिनियम (Anti-Terrorism Act) के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए अब तक 600 से अधिक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, स्थानीय व्यापारियों और छात्र नेताओं को रातों-रात घरों से उठाकर जेलों में ठूस दिया गया है। दर्जनों लोग अचानक लापता (Missing Persons) हो चुके हैं, जिनका परिजनों को कोई अता-पता नहीं है।

38 सूत्रीय मांगें, 12 रिफ्यूजी सीटें और आर्थिक नाकाबंदी का 'हथियार'

प्रदर्शनकारियों ने हुकूमत के सामने 38 सूत्रीय मांगों का एक लंबा चार्टर रखा है। इसमें आटे-गेहूं पर सब्सिडी, बिजली दरों में भारी कटौती और वीआईपी कल्चर की समाप्ति के साथ-साथ सबसे बड़ी मांग PoJK विधानसभा में पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रह रहे तथाकथित 12 रिफ्यूजी (शरणार्थियों) के लिए आरक्षित सीटों को खत्म करने की है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि इन 12 सीटों के जरिए इस्लामाबाद और पाकिस्तानी सेना PoJK की राजनीति में अवैध हस्तक्षेप करती है। इस मांग के फेल होने पर जब नागरिकों ने मुजफ्फरबाद मार्च का ऐलान किया, तो पाकिस्तानी सेना ने पूरे इलाके की आर्थिक नाकाबंदी (Economic Blockade) कर दी, जिससे वहां भोजन, आटा और जीवन रक्षक दवाओं का भयंकर संकट पैदा हो गया है।

इंटरनेट ब्लैकआउट और मीडिया सेंसरशिप: क्या छिपा रही है पाकिस्तानी सेना?

PoJK के नागरिकों का कहना है कि वहां की स्थिति किसी 'ओपन-एयर जेल' (खुली जेल) जैसी हो गई है। पिछले कई हफ्तों से मोबाइल इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाओं को पूरी तरह ठप (Internet Shutdown) कर दिया गया है। बैंकों का कामकाज ठप है और शैक्षणिक संस्थान बंद हैं। स्थानीय पत्रकारों पर कड़ा पहरा है और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी है। मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने भी इस इंटरनेट शटडाउन और सेना द्वारा की जा रही बर्बरता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान डर रहा है कि यदि सेना द्वारा नागरिकों पर की जा रही अंधाधुंध गोलीबारी और दमन के वास्तविक वीडियो और तस्वीरें वैश्विक मंच पर आ गए, तो संयुक्त राष्ट्र (UN) समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी भारी किरकिरी होगी।

भारत का कड़ा रुख और आगामी 27 जुलाई के चुनाव पर संशय

रावलाकोट और पुंछ बेल्ट में हुई हिंसक झड़पों में अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है। यह पूरा महा-संकट ऐसे समय में आया है जब PoJK में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इस भयंकर जनाक्रोश को देखते हुए चुनावों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। दूसरी तरफ, भारत सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी PoJK के इन हालातों पर पैनी नजर बना रखी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साफ किया है कि पाकिस्तान द्वारा अपने कब्जे वाले हिस्से में दशकों से किया जा रहा सिस्टेमेटिक शोषण और दमन अब वहां के नागरिकों के सब्र का बांध तोड़ चुका है।

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