PoK में बड़ा विस्फोट! मुज़फ्फराबाद मार्च को कुचलने के लिए ISI रच रही 'फॉल्स फ्लैग' की साजिश, 20 हजार जवान तैनात, इंटरनेट पूरी तरह बंद

PoK में बड़ा विस्फोट! मुज़फ्फराबाद मार्च को कुचलने के लिए ISI रच रही 'फॉल्स फ्लैग' की साजिश, 20 हजार जवान तैनात, इंटरनेट पूरी तरह बंद

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुनियादी अधिकारों, बेतहाशा महंगाई, आटे पर सब्सिडी और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चल रहा 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) का नागरिक आंदोलन अब एक बेहद खतरनाक और हिंसक मोड़ पर पहुंच गया है। मुज़फ्फराबाद की तरफ होने वाले एक बहुत बड़े 'लॉन्ग मार्च' से ठीक पहले खुफिया स्रोतों से एक ऐसा चौंकाने वाला इनपुट सामने आया है, जिसने हड़कंप मचा दिया है। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी ISI इस शांतिपूर्ण जन-आंदोलन को पूरी तरह कुचलने और बदनाम करने के लिए एक खौफनाक 'फॉल्स फ्लैग' (False Flag) ऑपरेशन की साजिश रच रही है।

भीड़ में खूंखार तत्वों को घुसाने का 'डर्टी प्लान'

खुफिया इनपुट के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान (Military Establishment) मुज़फ्फराबाद मार्च में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के गुर्गों और उपद्रवियों को आम नागरिकों के भेष में घुसाने की तैयारी में है। इस 'डर्टी गेम' का मुख्य उद्देश्य यह है कि ये घुसपैठिए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबलों पर हमला करें, सरकारी संपत्तियों में तोड़फोड़ और आगजनी करें। जैसे ही यह नागरिक आंदोलन हिंसक रूप लेगा, पाकिस्तानी सेना को इसे एक "राष्ट्र-विरोधी और हिंसक साजिश" घोषित करने का मौका मिल जाएगा। इसके बाद सेना आम नागरिकों के खिलाफ कड़े मिलिट्री और दमनकारी ऑपरेशन शुरू कर सकेगी।

आर्थिक और बुनियादी मांगों को 'जिहादी नैरेटिव' में बदलने की कोशिश

अब तक PoK का यह आंदोलन पूरी तरह गैर-धार्मिक और आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित रहा है, जिसमें बिजली बिलों में कटौती और स्थानीय अधिकारों की मांग की जा रही है। लेकिन, ISI की रणनीति इस आंदोलन के मूल मुद्दों को दबाकर वहां 'कट्टरपंथी एजेंडा' और 'भारत-विरोधी बयानबाजी' को आगे बढ़ाना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस जायज नागरिक आंदोलन की साख को पूरी तरह खत्म किया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना लश्कर और जैश के 'डिनाइबल नेटवर्क' के जरिए आंदोलन के मुख्य आयोजकों को डराने, अगवा करने या उन्हें रास्ते से हटाने की योजना बना रही है।

छावनी में बदला पूरा PoK: 20 हजार जवान तैनात और डिजिटल स्ट्राइक

जमीनी हालात की बात करें तो मुज़फ्फराबाद, रावलाकोट और सुधनोती जैसे इलाकों को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। प्रदर्शनकारियों को रोकने और उन्हें बंधक बनाने के लिए पाकिस्तान रेंजर्स और फ्रंटियर कोर (FC) के लगभग 20 हजार से अधिक अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही, इस अत्याचार की तस्वीरें दुनिया के सामने न आ सकें, इसलिए पूरे इलाके में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक (Internet Shutdown) कर दिया गया है। इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण स्थानीय नागरिकों का सूचना तंत्र पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे वहां की जनता में भारी खौफ और असुरक्षा का माहौल है।

प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग, कई लोगों की मौत से तनाव चरम पर

यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब सुरक्षाबलों की ओर से की गई कथित फायरिंग में अब तक कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं। रावलाकोट और मुज़फ्फराबाद के बाहरी इलाकों में हजारों की संख्या में आंदोलनकारी डटे हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान सरकार की इस दमनकारी नीति पर गहरी चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तानी सेना अपने ही नागरिकों की आवाज दबाने के लिए इन आतंकी लॉन्च पैड्स और गुर्गों का इस्तेमाल एक 'हथियार' के रूप में करती है, तो आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह अनियंत्रित हो सकती है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी PoJK के हालात पर बयान जारी कर कहा है कि यह दशकों से किए जा रहे सिस्टेमेटिक शोषण और प्रशासनिक दमन का नतीजा है।

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