अमेरिकी चुनाव में चीनी सेंधमारी का महा-विस्फोट: 22 करोड़ अमेरिकी वोटर्स का डेटा चोरी; डोनल्ड ट्रंप का दावा-

अमेरिकी चुनाव में चीनी सेंधमारी का महा-विस्फोट: 22 करोड़ अमेरिकी वोटर्स का डेटा चोरी; डोनल्ड ट्रंप का दावा- "इतिहास का सबसे बड़ा हमला"

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम से देश को संबोधित करते हुए एक ऐसा दावा किया है जिसने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। ट्रंप का दावा है कि चीन ने अमेरिकी चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी साइबर सेंधमारी को अंजाम दिया है।

ट्रंप ने हाल ही में डीक्लासिफाइड (सार्वजनिक किए गए) खुफिया दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) ने अमेरिका के लगभग 22 करोड़ (220 मिलियन) मतदाताओं की व्यक्तिगत और संवेदनशील फाइलों पर अवैध कब्जा कर लिया है।

लीक डेटा में क्या-क्या है शामिल?

ट्रंप के अनुसार, चीन द्वारा चुराए गए इस डेटाबेस में अमेरिकी नागरिकों की बेहद निजी और संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता था:

  • वोटर्स की व्यक्तिगत जानकारी: नाम, घर का पता, ईमेल आईडी और फोन नंबर।

  • राजनीतिक प्राथमिकताएं: मतदाता किस राजनीतिक दल (डेमोक्रेट या रिपब्लिकन) की तरफ झुकाव रखता है।

  • रजिस्ट्रेशन डेटा: वोट डालने के लिए जरूरी अन्य संवेदनशील डेटा और डॉक्युमेंट्स।

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का कड़ा बयान: "यह देश के इतिहास का सबसे भयानक 'इलेक्शन सिक्योरिटी नाइटमेयर' (चुनावी सुरक्षा का दुःस्वप्न) है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी नहीं चाहती थी कि मैं राष्ट्रपति बनूं, और इसके लिए उन्होंने हर हथकंडा अपनाया। सबसे शर्मनाक बात यह है कि हमारे देश के 'डीप स्टेट' (खुफिया विभाग के कुछ लोगों) ने इस सच को सालों तक मुझसे और अमेरिकी जनता से छिपाए रखा।"

"डीप स्टेट" पर भड़के ट्रंप: सच छिपाने का लगाया आरोप

अपने 25 मिनट के संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप केवल चीन पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और मुख्यधारा की मीडिया पर भी जमकर बरसे।

  1. सच दबाने का आरोप: ट्रंप ने आरोप लगाया कि खुफिया तंत्र के कुछ "बेहद प्रसिद्ध लोगों" ने चीन की इस हरकत को दबाने और छिपाने का काम किया ताकि उनके पहले कार्यकाल और 2020 के चुनाव अभियानों को नुकसान पहुंचाया जा सके।

  2. राज्यों को अलर्ट जारी: ट्रंप ने घोषणा की है कि गृह सुरक्षा विभाग (DHS) उन 18 राज्यों को तुरंत सूचित कर रहा है जिनका डेटा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, ताकि आगामी 2026 के मिडटर्म इलेक्शन (मध्यावधि चुनाव) से पहले सुरक्षा चाक-चौबंद की जा सके।

  3. वोटर आईडी कानून की मांग: इस कथित सुरक्षा चूक को ढाल बनाकर ट्रंप ने एक बार फिर पूरे अमेरिका में बेहद कड़े 'वोटर आईडी' कानूनों को लागू करने की वकालत की है।

चीन की सफाई: "हमारा कोई लेना-देना नहीं"

ट्रंप के इन तीखे और सीधे हमलों के बाद वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है। चीनी प्रवक्ता ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया।

चीनी दूतावास का बयान: "चीन दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल न देने की नीति का हमेशा पालन करता है। अमेरिकी चुनाव अमेरिका का आंतरिक मामला है और चीन ने कभी भी इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया है और न ही कभी करेगा।"

राजनीतिक घमासान: विपक्ष ने बताया "डराने की राजनीति"

ट्रंप के इस भाषण पर अमेरिका के भीतर ही राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। विपक्षी दल डेमोक्रेट्स और सीनेट के नेताओं ने इसे आगामी मिडटर्म चुनाव से पहले मतदाताओं के मन में डर पैदा करने और चुनावी व्यवस्था पर से भरोसा उठाने की एक राजनीतिक चाल बताया है। अमेरिकी खुफिया विभाग की पुरानी रिपोर्ट्स के अनुसार, हालांकि चीन के पास डेटा खंगालने की क्षमताएं हैं, लेकिन 2020 के चुनाव परिणामों में किसी भी तरह की प्रत्यक्ष हेरफेर या वोट बदलने के कोई सबूत नहीं मिले हैं।

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