14 नवजातों की मौत पर भड़के बिलावल, अपने निकाह की अफवाह को लेकर अपनी सरकार को लताड़ा
राजनीतिक गलियारों में कब क्या हो जाए और कौन सी खबर अचानक सुर्खियों में आ जाए, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। पड़ोसी देश पाकिस्तान में इस समय राजनीतिक उथल-पुथल का दौर अपने चरम पर है, जहां गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अक्सर ऐसी चर्चाएं गढ़ दी जाती हैं जो जनता के मूल सवालों को दबा दें। हाल ही में कुछ ऐसा ही वाकया देखने को मिला जब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी अपनी ही सरकार के रवैये पर बुरी तरह भड़क उठे। एक तरफ देश के अस्पतालों में बदइंतमी के चलते मासूम बच्चों की जान जा रही है, तो दूसरी तरफ सत्ता के गलियारों में बिलावल की शादी को लेकर झूठी और सनसनीखेज अफवाहें उड़ाई जा रही हैं। शहबाज शरीफ सरकार के इस कथित 'शादी वाले बम' को बिलावल भुट्टो ने पूरी तरह फुस्स करते हुए अपनी ही गठबंधन सरकार को आईना दिखाया है और तीखी फटकार लगाई है।
14 नवजातों की दर्दनाक मौत पर मची खलबली
पाकिस्तान के एक प्रमुख अस्पताल से हाल ही में बेहद दिल दहला देने वाली और झकझोर देने वाली खबर सामने आई, जहां ऑक्सीजन और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी के चलते 14 मासूम नवजात बच्चों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस भीषण त्रासदी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है और आम जनता के बच्चों की जिंदगी की यहां कोई कीमत नहीं है। इस भयानक हादसे के बाद पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई, और जनता तथा विपक्षी नेता सरकार से कड़े सवाल पूछने लगे। ऐसे वक्त में जब हुक्मरानों को फौरन एक्शन लेना चाहिए था और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरानी चाहिए थी, तब सत्ता के करीबी सूत्रों से कुछ ऐसी खबरें प्लांट की जाने लगीं जो जनता का ध्यान इस मानवीय त्रासदी से भटका सकें। बच्चों की दर्दनाक मौतों पर पर्दा डालने के लिए अचानक बिलावल भुट्टो की शादी की अफवाहों को तूल दिया जाने लगा, ताकि मीडिया और अवाम का फोकस स्वास्थ्य सेवाओं की नाकामी से हटकर गॉसिप पर चला जाए।
बिलावल भुट्टो ने लगाई सरकार की क्लास
अपनी ही सरकार और सहयोगियों की इस ओछी हरकत से बिलावल भुट्टो जरदारी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने एक तीखे और आक्रामक बयान में साफ कर दिया कि देश में मासूम बच्चे दम तोड़ रहे हैं और सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए उनकी शादी की झूठी अफवाहों का सहारा ले रही है। बिलावल ने कहा कि उन्हें इस बात से सख्त नाराजगी है कि जब पूरा देश 14 नवजातों की मौत के गम में डूबा हुआ है, ऐसे संवेदनशील समय में व्यक्तिगत जीवन और निकाह की फर्जी खबरें गढ़ी जा रही हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में अपनी सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा कि उनकी शादी या निजी मामलों से ज्यादा जरूरी देश के गरीबों के बच्चों की जान बचाना है। बिलावल के इस तेवर ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है और यह दिखा दिया है कि गठबंधन के भीतर किस स्तर की खींचतान और अविश्वास का माहौल चल रहा है।
गंदी राजनीति और मीडिया मैनेजमेंट का खेल
पड़ोसी मुल्क में यह कोई पहली बार नहीं है जब बड़े हादसों और विफलताओं को छुपाने के लिए इस तरह के हथकंडों का इस्तेमाल किया गया हो। जब भी सरकार आर्थिक मोर्चे पर या प्रशासनिक सेवाओं में बुरी तरह फेल होती है, तो ध्यान भटकाने के लिए फिल्मी ड्रामे जैसा माहौल बना दिया जाता है। बिलावल भुट्टो की शादी की खबरों को हवा देना भी उसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है ताकि लोग अस्पतालों में हुई 14 बच्चों की मौत के मामले को भूल जाएं। लेकिन इस बार बिलावल के मुखर होने से सरकार का यह पैंतरा उल्टा पड़ गया। जनता अब सोशल मीडिया पर सरकार से सीधे सवाल पूछ रही है कि शादियों की अफवाहें उड़ाने से क्या मरे हुए बच्चों की सांसें वापस आ जाएंगी? इस पूरे घटनाक्रम ने शहबाज शरीफ प्रशासन की कार्यशैली और संवेदनहीनता पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
जनता के सवालों के घेरे में हुक्मरान
आज पाकिस्तान की आवाम महंगाई, भुखमरी, बेरोजगारी और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के बोझ तले पिस रही है। ऐसे में राजनेताओं की ऐसी नौटंकियां जनता के गुस्से को और अधिक भड़का रही हैं। बिलावल भुट्टो द्वारा अपनी ही सरकार की खिंचाई किए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि सत्ता का यह गठबंधन सिर्फ कुर्सी बचाने और लीपापोती करने तक सीमित है। 14 मासूमों की मौत का यह मामला अब एक राष्ट्रीय नासूर बन चुका है, जिसे कोई भी अफवाह या प्रोपेगैंडा छुपा नहीं सकता। बिलावल के इस कदम ने भले ही फिलहाल शहबाज के 'शादी वाले बम' को फुस्स कर दिया हो, लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या इन बेकसूर बच्चों के परिवारों को कभी न्याय मिल पाएगा या यह मामला भी हमेशा की तरह सियासत की भेंट चढ़ जाएगा।