हेग कोर्ट के फैसले पर भारत का दो टूक जवाब; पाकिस्तान को मिला सबसे बड़ा कूटनीतिक झटका

हेग कोर्ट के फैसले पर भारत का दो टूक जवाब; पाकिस्तान को मिला सबसे बड़ा कूटनीतिक झटका

जब भी अंतरराष्ट्रीय मंचों और अदालतों में भारत के खिलाफ कोई साजिश रची जाती है, तो देश का कूटनीतिक तंत्र पूरी मजबूती के साथ उसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए खड़ा हो जाता है। हाल ही में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत के एक फैसले को लेकर भू-राजनीतिक गलियारों में बड़ी हलचल देखने को मिली है, जहां पाकिस्तान एक बार फिर भारत के खिलाफ अपनी चालें चलने में नाकाम साबित हुआ है। हेग कोर्ट के इस निर्णय पर भारत सरकार ने बेहद आक्रामक, स्पष्ट और दो टूक अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान को आईना दिखा दिया है। भारत ने साफ शब्दों में कह दिया है कि इस पूरे मामले में अदालत या किसी अन्य बाहरी मंच के पास दखल देने का कोई कानूनी अधिकार ही नहीं है। भारत के इस कड़े और बेबाक रुख ने पड़ोसी मुल्क की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और उसे एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। यह घटना दर्शाती है कि नया भारत अपनी संप्रभुता और कानूनी मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को कतई बर्दाश्त नहीं करता है।

पाकिस्तान की नापाक चाल और हेग कोर्ट का कानूनी पेंच

पाकिस्तान की फितरत हमेशा से रही है कि वह अपनी आंतरिक विफलताओं और कूटनीतिक हार से ध्यान भटकाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ झूठे और आधारहीन मुद्दे उठाता रहता है। इस बार भी पाकिस्तान ने हेग कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर कुछ ऐसा ही प्रोपेगैंडा फैलाने की कोशिश की थी, ताकि वह दुनिया की नजरों में भारत को घेर सके। पाकिस्तानी रणनीतिकार यह उम्मीद कर रहे थे कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय उनके पक्ष में कोई ऐसा फैसला सुनाएगा जिससे वे भारत पर कूटनीतिक दबाव बना सकें। लेकिन भारत के कानूनी विशेषज्ञों और विदेश मंत्रालय के नुमाइंदों ने अदालत के समक्ष बेहद मजबूत और अकाट्य तर्क पेश किए। भारत ने कानूनी दस्तावेजों और संप्रभुता के नियमों का हवाला देते हुए यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान द्वारा उठाया गया यह कदम पूरी तरह से अनधिकृत और राजनीति से प्रेरित है। हेग कोर्ट की प्रक्रियाओं के बीच भारत के इस मजबूत पक्ष ने पाकिस्तानी वकीलों और हुक्मरानों की बोलती बंद कर दी।

भारत का ऐतिहासिक और करारा जवाब: अधिकार क्षेत्र पर बड़ा सवाल

जैसे ही हेग कोर्ट से इस मामले में कोई ठोस या पाकिस्तान-समर्थक राहत नहीं मिली, भारत ने कड़े शब्दों में अपनी बात रखते हुए स्पष्ट कर दिया कि इस अदालत के पास इस मामले में सुनवाई करने या कोई अधिकार क्षेत्र उपयोग करने का कोई कानूनी हक ही नहीं है। भारतीय कूटनीतिज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले पाकिस्तान के हर एक झूठ को सिलसिलेवार तरीके से बेनकाब किया। भारत ने दुनिया को यह याद दिलाया कि द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष या बाहरी अदालत की दखलअंदाजी अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों के खिलाफ है। भारत के इस दो टूक बयान ने यह साफ कर दिया कि देश अपने आंतरिक और रणनीतिक फैसलों पर किसी भी विदेशी या अंतरराष्ट्रीय अदालत के दबाव में आने वाला नहीं है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत का यह करारा जवाब न केवल पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि यह उन सभी देशों के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो भारत के खिलाफ कानूनी मंचों का दुरुपयोग करने की कोशिश करते हैं।

पाकिस्तान को मिला सबसे बड़ा कूटनीतिक झटका और आंतरिक निराशा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद इस्लामाबाद के राजनीतिक और सैन्य हलकों में भारी निराशा और सन्नाटा पसर गया है। पाकिस्तान की जनता पहले ही गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और भुखमरी से जूझ रही है, ऐसे में वहां की सरकार का इस तरह अंतरराष्ट्रीय अदालतों में मुंह की खाना उनके झूठे दावों की पोल खोल देता है। पाकिस्तान की अवाम अब अपने नेताओं से यह सवाल पूछने लगी है कि वे देश के गंभीर मुद्दों को सुलझाने के बजाय बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाकर देश की फजीहत क्यों कराते हैं। हेग कोर्ट के इस मामले में भारत की कानूनी और कूटनीतिक जीत ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक पटल पर भारत का प्रभाव और उसकी बात रखने का वजन कितना मजबूत हो चुका है। पाकिस्तान के हर कुप्रयास को भारत ने अपनी सूझबूझ और मजबूत कूटनीति से हर बार की तरह इस बार भी पूरी तरह विफल कर दिया है, जिससे पाकिस्तानी हुक्मरानों के पास अब सफाई देने के लिए कोई शब्द नहीं बचा है।

मजबूत होती भारतीय विदेश नीति और भविष्य के वैश्विक संकेत

यह पूरी घटना इस बात का प्रमाण है कि भारत की वर्तमान विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा का दृष्टिकोण कितना स्पष्ट और अडिग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया को यह दिखा दिया है कि देश अपने हितों की रक्षा करना अच्छी तरह जानता है, चाहे वह युद्ध का मैदान हो या फिर हेग जैसी अंतरराष्ट्रीय अदालतें। भारत ने हर मोर्चे पर यह साबित किया है कि वह न्याय और अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में रहकर काम करता है, लेकिन अपनी संप्रभुता से समझौता कभी नहीं करेगा। पाकिस्तान को मिला यह करारा झटका इस बात की चेतावनी है कि प्रोपेगैंडा और झूठ के सहारे भारत को नीचा दिखाने के दिन अब लद चुके हैं। आने वाले समय में भारत का यह कड़ा रुख अन्य देशों के लिए भी एक मिसाल बनेगा कि जब देश के सम्मान और अधिकारों की बात आती है, तो भारत किसी भी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी शर्तों पर कड़ा और सही फैसला लेना अच्छी तरह जानता है।