पाकिस्तानी फौज पर BLA का कहर, हफ्ते भर में 27 से ज्यादा जवान मारने का दावा

पाकिस्तानी फौज पर BLA का कहर, हफ्ते भर में 27 से ज्यादा जवान मारने का दावा

पाकिस्तान के अशांत और संसाधन समृद्ध प्रांत बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के खिलाफ अपनी हिंसक और आक्रामक गतिविधियों को काफी तेज कर दिया है। बीएलए के लड़ाकों ने पिछले एक हफ्ते के भीतर बलूचिस्तान के विभिन्न जिलों में सिलसिलेवार और सुनियोजित हमले करके पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया है। संगठन के आधिकारिक मीडिया विंग द्वारा जारी किए गए विस्तृत बयान में यह दावा किया गया है कि अलग-अलग अभियानों और घातक घात लगाकर किए गए हमलों में पाकिस्तानी सेना के 27 से अधिक जवानों और अधिकारियों को ढेर कर दिया गया है। इन अचानक हुए हमलों के बाद से पूरे बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य छावनियों और सुरक्षा जांच चौकियों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और सेना का शीर्ष नेतृत्व इस बड़े नुकसान से पूरी तरह बौखला गया है।

आईईडी धमाकों और स्नाइपर हमलों से थराया बलूचिस्तान, रिमोट इलाकों में पाकिस्तानी सेना की बढ़ीं मुश्किलें

बलूच लिबरेशन आर्मी द्वारा चलाए गए इस विशेष सैन्य अभियान के दौरान रणनीति में बड़ा बदलाव देखा गया है। बीएलए के मजीद ब्रिगेड और फतेह स्क्वाड के लड़ाकों ने सीधे मोर्चे पर लड़ने के बजाय आधुनिक आईईडी (Improvised Explosive Devices), रिमोट-कंट्रोल ब्लास्ट और अत्याधुनिक स्नाइपर राइफलों का इस्तेमाल करके सैन्य काफिलों को निशाना बनाया है। केच, पंजगुर, बोलान और क्वेटा के बाहरी इलाकों में गश्त पर निकली पाकिस्तानी सेना की गाड़ियों को बारूदी सुरंगों से उड़ा दिया गया। इन धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सेना की कई बख्तरबंद गाड़ियां पूरी तरह से चकनाचूर हो गईं। अचानक हुए इन हमलों में दर्जनों सैनिक गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिन्हें नजदीकी सैन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कई की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।

सीपैक प्रोजेक्ट और चीनी नागरिकों की सुरक्षा पर मंडराया बड़ा खतरा, पाकिस्तान सरकार की उड़ीं नींदें

बलूचिस्तान में बीएलए के बढ़ते प्रभाव और हालिया हमलों ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। चीन इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत बलूचिस्तान और ग्वादर पोर्ट में अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है, लेकिन बलूच अलगाववादी संगठन इस परियोजना को अपनी जमीन और संसाधनों का अवैध दोहन मानते हैं। बीएलए ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे बलूच सरजमीं पर किसी भी विदेशी निवेश या कब्जे को बर्दाश्त नहीं करेंगे। पाकिस्तानी सेना द्वारा चीनी इंजीनियरों और प्रोजेक्ट्स को सुरक्षा देने के बावजूद इस तरह के घातक हमलों ने इस्लामाबाद और बीजिंग दोनों के राजनीतिक व सैन्य गलियारों में खलबली मचा दी है, जिससे चीनी अधिकारियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन और पाकिस्तानी वायुसेना का क्रूर सर्च ऑपरेशन

27 से ज्यादा जवानों के मारे जाने के बाद पाकिस्तानी सेना और फ्रंटियर कोर (FC) ने बौखलाहट में आकर बलूचिस्तान के ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर क्रूर तलाशी अभियान (Search Operation) शुरू कर दिया है। स्थानीय सूत्रों और बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सैन्य बलों ने गनशिप हेलीकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों का सहारा लेकर निर्दोष नागरिकों के घरों को निशाना बनाया है। कई गांवों में घरों को आग के हवाले कर दिया गया है और दर्जनों निर्दोष बलूच युवाओं को जबरन उठाकर गायब (Enforced Disappearances) कर दिया गया है। सेना की इस दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोगों, महिलाओं और बच्चों में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है, जिससे क्षेत्र में नागरिक असंतोष और ज्यादा भड़क गया है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर इस सैन्य संकट का गहरा असर

बलूचिस्तान में बीएलए का यह नया आक्रामक रुख पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और डगमगाती आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक विनाशकारी झटका साबित हो रहा है। एक तरफ जहां पाकिस्तान की सेना भारत से लगती पूर्वी सीमा और अफगानिस्तान से सटी डूरंड लाइन पर सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ बलूचिस्तान में उग्रवाद का यह नया ज्वार उसके सैन्य बजट और जनबल पर भारी दबाव डाल रहा है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि पाकिस्तान सरकार ने बलूच जनता की जायज मांगों और मानवाधिकारों का सम्मान करने के बजाय केवल सैन्य ताकत के इस्तेमाल की नीति जारी रखी, तो आने वाले समय में बलूचिस्तान पूरी तरह से पाकिस्तान के प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर हो सकता है।