ईरान की राजनीति में उबाल: राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने खोला आंतरिक कलह का राज, बाहरी ताकतों पर बरसे तेवर

ईरान की राजनीति में उबाल: राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने खोला आंतरिक कलह का राज, बाहरी ताकतों पर बरसे तेवर

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के सबसे संवेदनशील केंद्र ईरान से एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। खाड़ी देशों के बदलते समीकरणों और अंदरूनी राजनीतिक उठापटक के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान (Masoud Pezeshkian) ने देश की शीर्ष लीडरशिप के भीतर चल रही उथल-पुथल और बगावत के संकेतों पर खुलकर अपनी बात रखी है। एक टेलीविजन संबोधन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति का यह दर्द और गुस्सा खुलकर सामने आया, जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

दुश्मनों की चाल और आंतरिक बगावत की सुगबुगाहट

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अपने देश को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ शत्रु शक्तियों ने इस्लामिक गणराज्य को भीतर से कमजोर करने और सत्ता पलटने की नापाक कोशिशें की थीं। उन्होंने इशारों-इशारों में यह स्वीकार किया कि ईरान की सत्ता के शीर्ष स्तर पर किस तरह से बाहरी दबावों और आंतरिक असंतोष का लाभ उठाने की साजिश रची जा रही थी। जानकारों का मानना है कि ईरान के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और कड़े प्रतिबंधों के बाद से ही आंतरिक राजनीति में असंतोष की चिंगारी सुलग रही थी, जिसे अब राष्ट्रपति ने खुद स्वीकार कर लिया है।

सीरिया जैसी तबाही का था खतरनाक प्लान

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अपने इस तीखे संबोधन में पश्चिमी देशों और क्षेत्रीय विरोधियों पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने दो टूक कहा कि दुश्मनों की मंशा ईरान को भी सीरिया जैसी गृहयुद्ध और बर्बादी की आग में झोंकने की थी। इसके लिए लगातार आर्थिक प्रतिबंधों, राजनीतिक दबाव और सामरिक मोर्चे पर चक्रव्यूह रचे गए। राष्ट्रपति ने दावा किया कि तमाम अंदरूनी कलह और बाहरी धमकियों के बावजूद देश के नए सुप्रीम लीडर और जनता की एकजुटता ने इन खतरनाक साजिशों को नाकाम कर दिया है।

एकता ही ईरान की सबसे बड़ी ढाल

अपने दिल का गुबार निकालते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा संकट के समय में देश की एकता ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान के विरोधी देश की किसी भी स्वतंत्र और प्रगतिशील नीति को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। यही वजह है कि शीर्ष नेतृत्व को अस्थिर करने के लिए अंदरखाने तमाम प्रयास किए गए, लेकिन सामूहिक दृढ़ संकल्प के आगे तमाम साजिशें धरी की धरी रह गईं।

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