दक्षिण कोरिया की तरफ मुंह बाए खड़ी हैं तोपें, किम जोंग उन की नई चाल, क्या अब नई जंग की बारी है?
कोरियाई प्रायद्वीप में एक बार फिर युद्ध के काले बादल मंडराने लगे हैं और दोनों देशों के बीच का तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते हुए अपनी सैन्य तैयारियों को तेज कर दिया है, जिससे दक्षिण कोरिया और उसके सहयोगियों की नींद उड़ गई है। सीमावर्ती इलाकों से सामने आई ताजा रिपोर्टों और उपग्रह तस्वीरों से यह खुलासा हुआ है कि उत्तर कोरियाई सेना ने भारी मात्रा में अत्याधुनिक तोपों और लॉन्ग-रेंज आर्टिलरी को सीधे दक्षिण कोरिया की सीमा की तरफ मुंह करके तैनात कर दिया है। इस स्थिति ने न केवल एशियाई क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह महज शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि किसी बड़े सैन्य संघर्ष की आहट प्रतीत हो रहा है। सीमा पर लगातार बढ़ती सैनिकों की आवाजाही और हथियारों के जखीरे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कोरियाई प्रायद्वीप एक बार फिर इतिहास के सबसे खतरनाक दौर में प्रवेश करने जा रहा है।
किम जोंग उन की नई सैन्य चाल और सीमा पर तैनात खूंखार तोपें
उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन द्वारा उठाये जा रहे हालिया कदम इस बात की गवाही दे रहे हैं कि प्योंगयांग किसी भी समझौते या कूटनीतिक बातचीत के मूड में नहीं है। उत्तर कोरियाई सेना ने सीमाई चौकियों पर अपनी ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है और हाल ही में सामरिक रूप से संवेदनशील इलाकों में आधुनिक हॉवित्जर और लंबी दूरी तक मार करने वाली तोपों को तैनात किया गया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन हथियारों की मारक क्षमता सीधे तौर पर दक्षिण कोरियाई शहरों और सैन्य ठिकानों को अपनी चपेट में लेने के लिए पर्याप्त है। इसके साथ ही, उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को औपचारिक पत्र भेजकर हालिया सीमा विवादों और भूमि बारूदी सुरंग (लैंडमाइन) की घटनाओं के लिए सीधे तौर पर सियोल को जिम्मेदार ठहराया है। प्योंगयांग का यह आक्रामक कूटनीतिक और सैन्य दांव इस बात का संकेत है कि किम जोंग उन किसी भी उकसावे का जवाब सीधे और विनाशकारी सैन्य बल से देने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे हैं।
सियोल की कड़ी प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली
उत्तर कोरिया की इन आक्रामक गतिविधियों के बाद दक्षिण कोरियाई सेना भी पूरी तरह से हाई अलर्ट पर आ गई है। सियोल के रक्षा मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उत्तर कोरिया की तरफ से संप्रभुता का उल्लंघन करने का कोई भी प्रयास किया गया, तो उसका बेहद कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। सीमा के दोनों तरफ लाउडस्पीकर के जरिए मनोवैज्ञानिक युद्ध और प्रचार प्रसार की पुरानी तकनीकें भी फिर से जिंदा होने लगी हैं, जिससे कभी भी छोटा विवाद बड़े सैन्य टकराव का रूप ले सकता है। अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी देश भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। वैश्विक कूटनीति के जानकारों का मानना है कि उत्तर कोरिया की यह नई चालें केवल क्षेत्रीय अस्थिरता ही नहीं बढ़ा रही हैं, बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। यदि कूटनीतिक माध्यमों से इस बढ़ते तनाव को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया, तो कोरियाई प्रायद्वीप की यह धरती एक बार फिर भीषण जंग की आग में झुलस सकती है।