12 देशों के नागरिकों पर हमला और 300 से ज्यादा घायल: हौथी विद्रोहियों की इस मिसाइल स्ट्राइक के पीछे किसका हाथ
सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रविवार तड़के हुए भीषण मिसाइल हमले में 12 लोगों की जान चली गई, जबकि 300 से अधिक यात्री और कर्मचारी घायल हो गए हैं। नागरिक उड्डयन अधिकारियों के अनुसार, कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है। यमन में सक्रिय सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस बर्बर हमले के लिए ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ा सैन्य जवाब देने का ऐलान किया है। इसे ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से खाड़ी क्षेत्र में हुआ सबसे बड़ा और घातक हमला माना जा रहा है।
मिसाइल हमला सीधे हवाई अड्डे के घरेलू टर्मिनल 3 और 4 पर हुआ, जिससे भारी तबाही मची। सऊदी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मारे गए 12 लोगों में चार स्थानीय सऊदी नागरिक हैं, जबकि अन्य मृतक अमेरिका, बांग्लादेश, फिलिस्तीन, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया और सूडान के नागरिक हैं। घटना के तत्काल बाद हवाई अड्डे का परिचालन पूरी तरह रोक दिया गया। सुरक्षा बलों ने पूरे परिसर को सील कर दिया है और फ्लाइटराडार24 के आंकड़ों के अनुसार आने-जाने वाली सभी उड़ानों को वैकल्पिक हवाई अड्डों पर डायवर्ट कर दिया गया है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने तुरंत अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर हवाई अड्डे के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है। ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वाशिंगटन हौथी विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के सैन्य अभियानों में सीधे तौर पर शामिल होने पर विचार कर रहा है और प्रशासन जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लेगा। वहीं सऊदी गठबंधन ने हमले को स्पष्ट युद्ध अपराध बताया और जोर देकर कहा कि निशाना बनाए गए स्थान पर कोई सैन्य ढांचा मौजूद नहीं था। हूथियों की ओर से इस पर तुरंत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, हालांकि उन्होंने सऊदी अरब पर यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर बमबारी का आरोप लगाया था।
हौथी विद्रोहियों द्वारा लाल सागर के तटीय इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने और सऊदी ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। साल 2015 से यमन में जारी इस संघर्ष में 2022 के युद्धविराम के बाद शांति की उम्मीद जगी थी, लेकिन हालिया हमलों ने मध्य पूर्व में तेल निर्यातक देशों की सुरक्षा और लाल सागर के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है।