9 नवंबर की 'काली रात' और ट्रंप का सबसे खतरनाक प्लान... क्या खत्म हो जाएगा ईरान?

9 नवंबर की 'काली रात' और ट्रंप का सबसे खतरनाक प्लान... क्या खत्म हो जाएगा ईरान?

वॉशिंगटन में अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजों ने रिपब्लिकन पार्टी को बैकफुट पर धकेल दिया है। सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस) दोनों जगह डेमोक्रेट्स के कब्जे के बावजूद राष्ट्रपति और मौजूदा सत्तासीन डोनाल्ड ट्रंप पश्चिम एशिया में अपने कड़े रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं दिखते। चुनावी हार की धूल अभी बैठी भी नहीं थी कि व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में बुधवार और गुरुवार को बैक-टू-बैक हाई-लेवल राष्ट्रीय सुरक्षा बैठकों का दौर शुरू हो गया, जिसका केंद्र बिंदु बना—ईरान पर सैन्य कार्रवाई की नई रणनीति।

फॉक्स न्यूज़ की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, इन बैठकों में सैन्य रणनीतिकारों ने ट्रंप को 9 नवंबर की तारीख का खास ब्योरा सौंपा। मध्य पूर्व में यह दिन अमावस्या का है, यानी आसमान में चांद की रोशनी बेहद मद्धम या न के बराबर होगी। सामरिक भाषा में इसे 'लो-मूनलाइट विंडो' कहा जाता है, जो रडार और विजुअल सर्विलांस से बचकर किए जाने वाले नाइट-ऑपरेशंस के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है। सुरक्षा सलाहकारों का तर्क है कि यह अंधेरी रात किसी भी नए सर्जिकल या एयर स्ट्राइक के लिए सबसे सटीक मौका साबित हो सकती है।

ओवल ऑफिस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए 80 वर्षीय ट्रंप ने साफ किया कि वह अंतिम फैसला लेने की कगार पर हैं। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा, "मैं किसी पूरे मुल्क को बर्बाद नहीं करना चाहता, लेकिन मुमकिन है कि हालात मुझे इसके लिए मजबूर कर दें... इसका जवाब जल्द दुनिया के सामने होगा।" ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि अगर अमेरिका ने कदम उठाया, तो वह इतना निर्णायक होगा कि सामने वाले देश को दोबारा संभलने में 25 साल लग जाएंगे।

इस संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर वॉशिंगटन के भीतर भी तीखा घमासान मचा है। जहां इजरायल समर्थक गुट अमेरिका पर तुरंत हमले दोबारा शुरू करने का दबाव बना रहा है, वहीं मिडटर्म में हारे कई रिपब्लिकन सांसद इस खिंचते हुए युद्ध को ही जनता की नाराजगी और अपनी चुनावी शिकस्त की सबसे बड़ी वजह मान रहे हैं।

दूसरी तरफ, राजनयिक मोर्चे पर कतर के जरिए एक पर्दे के पीछे की कोशिश भी सामने आई है। ईरान ने वॉशिंगटन को एक गुप्त प्रस्ताव भेजा है, जिसमें उसने अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (High-Enriched Uranium) के जखीरे को किसी तीसरे तटस्थ देश में शिफ्ट करने और रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को सात दिनों के भीतर पूरी तरह खोलने की पेशकश रखी है। हालांकि, तेहरान की यह शर्त है कि अमेरिका अपने प्रतिबंध हटाए और हमले स्थायी रूप से रोके।

वॉशिंगटन ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रमों पर पूर्ण विराम लगाने की अपनी पुरानी जिद दोहराई है, जबकि ईरान अपनी शर्तों से टस से मस होने को तैयार नहीं। मिडटर्म के चुनावी सदमे के बाद ट्रंप अब बैकफुट पर रक्षात्मक कूटनीति चुनते हैं या अमावस्या के अंधेरे में सैन्य प्रहार का रास्ता, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।