गधों ने रेगिस्तान में कर दिया चमत्कार! जहां थी सिर्फ रेत, वहां अब उग आए जंगल

गधों ने रेगिस्तान में कर दिया चमत्कार! जहां थी सिर्फ रेत, वहां अब उग आए जंगल

आमतौर पर गधों को सिर्फ भारी बोझा ढोने वाला जानवर मान लिया जाता है, लेकिन इजरायल के एक वैज्ञानिक प्रयोग ने इस सोच को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। साल 1982 में दुनिया के सबसे सूखे और बेरहम इलाकों में गिने जाने वाले नेगेव रेगिस्तान में महज 28 जंगली गधे छोड़े गए थे।

44 साल बीत जाने के बाद इन जीवों ने उस बंजर जमीन पर जो चमत्कार कर दिखाया है, उसने अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। यह सिर्फ एक वन्यजीव संरक्षण की कहानी नहीं, बल्कि इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि कैसे एक अकेला जीव उजड़ चुके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में नई जान फूंक सकता है। अत्यधिक शिकार के कारण नेगेव के इलाके से ये जीव दशकों पहले विलुप्त हो चुके थे, लेकिन रीवाइल्डिंग की वैज्ञानिक योजना ने इस पूरे मरुस्थल का भूगोल बदल दिया।

ईरान के शाह का तोहफा और वैज्ञानिकों का जेनेटिक मास्टरस्ट्रोक

इस पूरी योजना की नींव विज्ञान और कूटनीति के एक अद्भुत मेल पर रखी गई थी। साल 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति से ठीक पहले जब इजरायल और ईरान के संबंध मधुर थे, तब इजरायली अधिकारियों ने ईरान के तत्कालीन शाह मोहम्मद रजा पहलवी से गोपनीय बातचीत कर 11 दुर्लभ 'पर्शियन ओनेजर' (Persian Onager) हासिल किए। इसके बाद 1970 के दशक में इथियोपिया से अफ्रीकी जंगली गधों का एक दल भी लाया गया।

इजरायली जीव वैज्ञानिकों ने यहां किसी एक नस्ल की शुद्धता पर जोर देने के बजाय दोनों प्रजातियों का क्रॉस-ब्रीड कराने का साहसिक निर्णय लिया। इस हाइब्रिड क्रॉस से एक ऐसा 'सुपर-सर्वाइवर' जीव तैयार हुआ, जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद मजबूत थी, पैर छोटे घोड़ों जैसे फुर्तीले थे और वे शिकारियों से जान बचाने के लिए 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकते थे। इन्हीं में से 28 हाइब्रिड गधों को 1982 में रेमन क्रेटर के बेहद शुष्क माहौल में आजाद किया गया।

रेत खोदकर निकालते हैं पानी, बने रेगिस्तान के 'नेचुरल वाटर पंप'

नेगेव के इस बंजर इलाके में इन जीवों की सबसे चौंकाने वाली खूबी पानी खोजने का उनका प्राकृतिक हुनर साबित हुआ। जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाता है, तब ये गधे अपने शरीर के कुल वजन का 30 फीसदी हिस्सा डिहाइड्रेशन में गंवाने के बाद भी आसानी से जीवित रहते हैं। पानी की बूंद-बूंद सूंघने की क्षमता के दम पर ये अपने कठोर खुरों से सूखी रेत को खोद डालते हैं और करीब 6.5 फीट (लगभग 2 मीटर) गहरे कुएं बना देते हैं। अपनी प्यास बुझाकर जब ये आगे बढ़ जाते हैं, तो इनके बनाए यही गड्ढे रेगिस्तानी लोमड़ियों, पहाड़ी हिरणों (Gazelles) और चमगादड़ों के लिए भीषण गर्मी में जीवन रक्षक जल स्रोत का काम करते हैं।

चलते-फिरते 'सीड प्लांटर्स' और नए जंगलों का निर्माण

यह प्रजाति केवल पानी तलाशने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने रेगिस्तान में हरियाली फैलाने वाले प्राकृतिक माली की भूमिका भी निभाई। ये गधे दिनभर रेगिस्तान में भटकते हुए बबूल (Acacia) के पेड़ों की फलियां खाते हैं, जो इस इलाके में छाया और मिट्टी को नाइट्रोजन देने का सबसे अहम जरिया है। गधे के पेट में मौजूद पाचक रस बबूल के सख्त बीजों के बाहरी खोल को नुकसान पहुंचाए बिना उसे मुलायम बना देता है। जब ये गोबर करते हैं, तो बीज प्राकृतिक नमी और खाद के साथ जमीन पर गिरता है, जिससे बीजों के अंकुरण की दर कई गुना बढ़ जाती है। अनजाने में ही सही, इन गधों के झुंड ने नेगेव के मीलों फैले बंजर इलाके में लाखों नए पेड़ खड़े कर दिए।

पैरों के निशान बने जलाशय और बाढ़ से मिट्टी का बचाव

रेगिस्तान की पथरीली और रेतीली सतह पर इन गधों के लगातार चलने से हजारों छोटे-छोटे गड्ढे और लकीरें बन गईं। जब सर्दियों के मौसम में कभी-कभार नेगेव में तेज बारिश या अचानक बाढ़ आती है, तो पैरों के ये निशान प्राकृतिक 'माइक्रो-रिजर्वयर' यानी छोटे जलाशयों में तब्दील हो जाते हैं। यह पानी को तेज बहाव के साथ बहकर बर्बाद होने से रोकते हैं, जिससे जमीन के भीतर नमी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। इस प्राकृतिक प्रयास को मजबूती देने के लिए वैज्ञानिकों ने प्राचीन नाबातियन (Nabataean) जल संरक्षण तकनीकों का सहारा लिया और मिट्टी के छोटे बांध व चबूतरे बनाए, जिससे भूजल स्तर ऊपर बना रहे।

44 साल में 28 से 600 तक पहुंचा कुनबा, बंजर भूमि बनी हरा-भरा नखलिस्तान

दशकों की इस निरंतर प्रक्रिया का नतीजा आज सबके सामने है। 1982 में छोड़े गए महज 28 गधों का कुनबा आज बढ़कर 500 से 600 की एक स्वस्थ और आत्मनिर्भर आबादी में तब्दील हो चुका है। अपनी प्राकृतिक दिनचर्या से इन जानवरों ने दम तोड़ते रेगिस्तान को एक हरे-भरे नखलिस्तान (Oasis) का रूप दे दिया है। वर्तमान समय में इजरायल के रेमन क्रेटर की यह सफलता दुनिया भर के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में इकोलॉजिकल रीवाइल्डिंग और पर्यावरण बहाली के सबसे सफल केस स्टडी के रूप में पढ़ाई जा रही है।