"गोलीबारी मत करो..." जानिए मध्यस्थ देशों के एक फ़ोन कॉल पर ट्रम्प ने आख़िर क्यों रोके ईरान पर हमले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि यदि चल रहे राजनयिक प्रयास विफल होते हैं, तो वे ईरान के खिलाफ "कड़ी सैन्य कार्रवाई" फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की है कि उन्होंने तेहरान के साथ बातचीत को एक और निष्पक्ष मौका देने के उद्देश्य से ही अपने नियोजित हमलों को फिलहाल रोक दिया है।

प्रतिष्ठित मीडिया रिपोर्ट 'एक्सियोस' के अनुसार, वर्तमान में चल रही यह बातचीत एक नए और महत्वपूर्ण समझौते पर केंद्रित है, जिसके जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जा सके और ईरान के साथ एक व्यापक परमाणु समझौते पर चर्चा की प्रक्रिया फिर से पटरी पर लाई जा सके।

राजनयिक वार्ताओं में इन देशों की है सक्रिय भूमिका

वर्तमान में इन संवेदनशील वार्ताओं का मुख्य नेतृत्व ईरान और ओमान के बीच चल रहा है। इसके अलावा इस पूरी कूटनीतिक पहल में कतर, पाकिस्तान, मिस्र के साथ-साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर भी बेहद सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

हम ईरान के साथ कर रहे हैं गहन बातचीत: डोनाल्ड ट्रंप

राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह संकेत दिया है कि हालांकि फिलहाल कूटनीति ही सबसे बेहतर और प्राथमिकता वाला रास्ता है, लेकिन यदि इन वार्ताओं से कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकलता है, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प हमेशा खुला रहेगा। ट्रम्प ने एक्सियोस को दिए अपने साक्षात्कार में कहा, "हम ईरान के साथ बेहद गहन बातचीत कर रहे हैं। यदि यह बातचीत सफल नहीं होती है, तो हम एक बार फिर से कड़ी सैन्य कार्रवाई करेंगे।"

जब ट्रम्प से यह सवाल किया गया कि वे कूटनीति को और कितना समय देने के लिए तैयार हैं, तो उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा, "ज्यादा समय नहीं। या तो यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी या बिल्कुल आगे नहीं बढ़ेगी।" इससे यह साफ जाहिर होता है कि तेहरान के साथ बातचीत का उनका समय सीमित है और कूटनीति के विफल होते ही सख्त सैन्य कदम उठाए जा सकते हैं।

मध्यस्थों के आग्रह पर रोके गए नियोजित हमले

ट्रम्प ने यह भी खुलासा किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता कर रहे देशों तथा क्षेत्र के अन्य प्रमुख राष्ट्रों के विशेष आग्रह पर ही उन्होंने शुक्रवार को अपने तयशुदा सैन्य हमलों को स्थगित करने का फैसला किया। इन देशों ने सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाने से पहले कूटनीति को एक और मौका देने की पुरजोर अपील की थी। ट्रम्प ने कहा, "ईरान से जुड़े सभी लोगों ने मुझसे कहा कि 'अभी गोलीबारी मत करो'," और इसी के साथ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें पूरा विश्वास है कि ईरान किसी समझोते तक पहुंचना चाहता है। मध्यस्थों के इस अनुरोध पर अपनी सहमति जताने के कारण को स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि इससे "न कुछ हासिल हुआ और न ही कुछ खोया है।"

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