कार से टक्कर मारकर बुजुर्ग की मौत, जज के बेटे को मिल गई बेल; सड़क पर उतरा पीड़ित परिवार
कोच्चि के चेरापल्ली क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब तेज रफ्तार मर्सिडीज कार ने एक 55 वर्षीय बुजुर्ग बिजनेसमैन जयबालकृष्णन को जोरदार टक्कर मार दी। यह हादसा इतना भीषण था कि बुजुर्ग ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी चालक को हिरासत में ले लिया। जांच के दौरान पता चला कि दुर्घटना के समय लग्जरी कार चला रहा नाबालिग आरोपी कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि एक एडीशनल डिस्ट्रिक्ट जज का 17 वर्षीय बेटा है। आरोपी बिना किसी वैध ड्राइविंग लाइसेंस के देर रात तेज रफ्तार में गाड़ी सड़क पर दौड़ा रहा था। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है और स्थानीय लोगों में पुलिस की शुरुआती भूमिका को लेकर भारी नाराजगी दिखाई दे रही है।
आरोपी को मिली बेल, सड़क पर उतरा पीड़ित परिवार
हादसे के बाद आरोपी नाबालिग को हिरासत में लिया गया था, लेकिन पुलिस और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) द्वारा प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी को तुरंत जमानत दे दी गई। जैसे ही यह खबर मृतक के परिजनों तक पहुंची, उनका गुस्सा फूट पड़ा। न्याय की मांग को लेकर पीड़ित परिवार, रिश्तेदार और स्थानीय नागरिक पुलिस स्टेशन के बाहर सड़क पर उतर आए और जमकर विरोध-प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शन के दौरान माहौल इतना भावुक हो गया कि मृतक की बेटी रोते-बिलखते सड़क पर ही बेहोश हो गई, जिसे तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी के पिता के रसूख और पद के दबाव में आकर पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की और कमजोर धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को आसानी से जमानत दिला दी। परिजनों ने गाड़ी के मालिक यानी जज के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल और निष्पक्ष जांच की मांग
इस हाई-प्रोफाइल सड़क हादसे के बाद स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आम जनता और नागरिक समाज के संगठनों ने आरोप लगाया है कि जब मामला किसी रसूखदार व्यक्ति या जज के परिवार से जुड़ा होता है, तो कानून के हाथ ढीले पड़ जाते हैं। लोगों का कहना है कि एक तरफ आम आदमी पर मामूली सड़क हादसे में भी सख्त कार्रवाई की जाती है, वहीं दूसरी तरफ जानलेवा दुर्घटना में शामिल नाबालिग आरोपी को इतनी आसानी से जमानत मिल गई। भारी सार्वजनिक आक्रोश और मीडिया के दबाव के बाद गृह विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच में किसी भी तरह का पक्षपात नहीं किया जाएगा, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और वाहन के मालिक की कानूनी जिम्मेदारी तय करने के लिए विस्तृत कानूनी राय ली जा रही है।
सड़क हादसों में नाबालिग ड्राइवरों और कानूनी जवाबदेही पर बड़ी बहस
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर देश में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और उनके अभिभावकों की जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। मोटर वाहन कानून के तहत नाबालिग को गाड़ी देने पर वाहन मालिक पर भी सख्त धाराओं में मामला दर्ज करने का प्रावधान है। पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक इस मामले में निष्पक्ष न्याय नहीं मिलता और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा नहीं दी जाती, वे अपना आंदोलन बंद नहीं करेंगे। स्थानीय नागरिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी पीड़ित परिवार के समर्थन में आगे आए हैं और निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं ताकि न्याय प्रणाली पर आम जनता का विश्वास कायम रह सके।