ट्रंप के तीखे तेवर के बीच जोधपुर में F-35 की गूंज: एक हफ्ते में भारत-अमेरिका के बीच हुईं 10 महाडील्स

ट्रंप के तीखे तेवर के बीच जोधपुर में F-35 की गूंज: एक हफ्ते में भारत-अमेरिका के बीच हुईं 10 महाडील्स

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की सख्त आर्थिक नीतियों और व्यापारिक चेतावनियों के बीच भारत-अमेरिका रक्षा रिश्तों में एक अभूतपूर्व रणनीतिक उछाल दर्ज किया गया है।

कूटनीतिक गलियारों में भले ही यह चर्चा रही हो कि ट्रंप की नीतियों ने द्विपक्षीय संबंधों को दो दशक पीछे धकेल दिया है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। राजस्थान के जोधपुर के आसमान में अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स की गर्जना ने साफ कर दिया है कि व्यापारिक तल्खियों के बावजूद दोनों देशों की रणनीतिक और सामरिक साझेदारी अब तक के सबसे मजबूत दौर में है।

जोधपुर में पहली बार गरजे अमेरिकी F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स

राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर आयोजित बहुराष्ट्रीय वायुसेना युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति 2026' के दौरान रक्षा इतिहास का एक नया अध्याय लिखा गया। अमेरिका ने अपने बेड़े के सबसे घातक और आधुनिक 5th जनरेशन फाइटर जेट F-35A लाइटनिंग-II के 6 विमान भारत भेजे हैं। यह सैन्य इतिहास में पहला अवसर है जब F-35 विमानों ने भारतीय सरजमीं से उड़ान भरी और भारतीय वायुसेना (IAF) के लड़ाकू विमानों के साथ जटिल टैक्टिकल मिशन पूरे किए। यह कदम दर्शाता है कि पेंटागन भारत को अपने सबसे विश्वसनीय और रणनीतिक साझेदारों की पहली कतार में रखता है।

7 दिनों में 10 बड़े समझौते: टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से भारी निवेश तक

पिछले मात्र एक हफ्ते के भीतर दोनों देशों के बीच 10 ऐसे अहम रक्षा और रणनीतिक कदम उठाए गए हैं जो अमूमन अमेरिका अपने सबसे करीबी सहयोगियों के साथ ही साझा करता है। अमेरिकी दिग्गज कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने भारतीय वायुसेना के मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) प्रोग्राम के तहत C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान के लिए 'टेक्नोलॉजी ट्रांसफर' और भारत में ही स्थानीय उत्पादन (Local Production) का बड़ा प्रस्ताव दिया है। इससे घरेलू रक्षा विनिर्माण को सीधी मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने 99 GE F414 जेट इंजनों के भारत में सह-उत्पादन को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति साझा की है, जिसके तहत नए इंजन सौंपने पर सहमति बन चुकी है। यह तकनीक भारत के स्वदेशी तेजस मार्क-2 फाइटर जेट के लिए रीढ़ साबित होगी।

निजी और तकनीकी क्षेत्र में भी रिश्तों को नई उड़ान मिली है। भारत की प्रमुख स्पेसटेक कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस अमेरिकी निवेशकों से 280 से 300 मिलियन डॉलर जुटाने के लिए अंतिम चरण की वार्ता कर रही है। वहीं, आधुनिक चिप और एआई क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मिथिक एआई (Mythic AI) ने बेंगलुरु में अपना 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है।

कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रियता: क्वाड से लेकर परमाणु ऊर्जा तक साझा विजन

रणनीतिक मंचों पर भी दोनों देशों के उच्चाधिकारियों के बीच मैराथन बैठकें जारी हैं। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से द्विपक्षीय मसलों पर उच्चस्तरीय वार्ता की। इसी क्रम में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों एलिसन हुकर, पॉल कपूर और हेलबर्ग के साथ ऊर्जा और असैन्य परमाणु सहयोग (Civil Nuclear Cooperation) को आगे बढ़ाने पर गहन मंथन किया।

बहुपक्षीय सहयोग को धार देते हुए इंडो-पैसिफिक प्राथमिकताओं पर मंथन के लिए भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के क्वाड राजदूत एथेंस में मिले। ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में 'क्वाड-एट-सी शिप ऑब्जर्वर मिशन' के लिए भारतीय तटरक्षक जहाज ICGS शौनक को तैनात किया गया, जबकि 20 सितंबर को फिलीपींस के सुबिक बे में अमेरिकी और भारतीय नौसेनाओं ने छह अन्य मित्र देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा अभ्यास को अंजाम दिया।

ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और भारत की सामरिक अहमियत

व्यापार, टैरिफ और वीजा नियमों पर डोनाल्ड ट्रंप का 'अमेरिका फर्स्ट' रुख निश्चित रूप से सख्त रहा है, जिसके चलते कई बार आर्थिक मोर्चे पर मतभेद उभरे हैं। इसके बावजूद भू-राजनीतिक वास्तविकताएं यह तय करती हैं कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए वॉशिंगटन को नई दिल्ली की उतनी ही दरकार है जितनी भारत को आधुनिक तकनीक की। हथियारों, जेट इंजनों के सह-उत्पादन, अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर और नौसैनिक साझा मिशनों से स्पष्ट है कि व्यापारिक उतार-चढ़ाव के बीच भी भारत-अमेरिका की सामरिक धुरी पहले से कहीं अधिक मजबूत और अटूट बनी हुई है।