बाढ़ से तबाह नेपाल में अब इस बीमारी का खौफ, WHO की मदद से भेजी गईं 21 हजार खुराकें

बाढ़ से तबाह नेपाल में अब इस बीमारी का खौफ, WHO की मदद से भेजी गईं 21 हजार खुराकें

पड़ोसी देश नेपाल में प्राकृतिक आपदा और भीषण बाढ़ के बाद अब जनस्वास्थ्य को लेकर एक नया और गंभीर संकट मंडराने लगा है। बाढ़ के पानी के दूषित होने के कारण देश के कई हिस्सों में हैजा जैसी जानलेवा बीमारी फैलने का खतरा तेजी से बढ़ गया है।

इस खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने तुरंत कदम उठाते हुए रसुवा जिले के लिए हैजा रोधी वैक्सीन की इक्कीस हजार खुराकें रवाना की हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेष सहयोग से उपलब्ध कराई गई इन जीवनरक्षक टीकों को रविवार की सुबह नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर के माध्यम से आपातकालीन तौर पर रसुवा भेजा गया है, ताकि समय रहते स्थिति पर काबू पाया जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता के निर्देश पर युद्ध स्तर पर राहत कार्य

नेपाल की स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्री निशा मेहता ने बाढ़ और भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित इलाकों का कड़ा संज्ञान लेते हुए साफ निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में हैजा और अन्य जलजनित संक्रामक बीमारियों को रोकने के लिए दवाओं, वैक्सीन, जरूरी मेडिकल किट और स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती में कोई कोताही न बरती जाए। मंत्री के आदेश के बाद से ही प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया है और प्रभावित इलाकों में युद्ध स्तर पर मेडिकल सप्लाई भेजने के साथ-साथ बीमारी की नियमित निगरानी और सर्विलांस का काम भी तेज कर दिया गया है।

पेयजल स्रोतों के दूषित होने से बढ़ा संक्रमण का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ के सैलाब के कारण पीने के पानी के मुख्य स्रोत और वाटर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम पूरी तरह तबाह या दूषित हो चुके हैं, जिसके चलते डायरिया, हैजा और अन्य जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका सबसे ज्यादा बनी हुई है। इसे ही ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रभावित इलाकों में सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति, स्वच्छता और लोगों में जागरूकता फैलाने के काम को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बना लिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें इस बात पर विशेष जोर दे रही हैं कि बीमारी के लक्षणों की समय रहते पहचान कर ली जाए और तुरंत इलाज शुरू किया जाए ताकि किसी भी बड़ी जनहानि को टाला जा सके।