US को किया गुमराह! ट्रंप के करीबी जनरल ने PAK का उतार दिया पानी; मुस्लिम मुल्कों को भी धोया
डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जनरल एच.आर. मैकमास्टर ने पाकिस्तान को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज और बड़ा खुलासा किया है, जिसने पूरी दुनिया की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मैकमास्टर ने अपनी किताब और साक्षात्कारों में अमेरिकी प्रशासन के उस दौर की पोल खोल दी है, जब पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का दिखावा कर अमेरिका से अरबों डॉलर की मदद ऐंठ रहा था, लेकिन हकीकत में वह अमेरिकी सेना को ही भारी नुकसान पहुंचा रहा था। इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की नीति पूरी तरह से बेनकाब हो गई है।
ट्रंप के करीबी जनरल का पाकिस्तान पर तीखा हमला
जनरल एच.आर. मैकमास्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के मुद्दे पर लंबे समय तक अमेरिका को पूरी तरह से गुमराह किया। अमेरिकी सत्ता के गलियारों में यह बात अब खुलकर सामने आ रही है कि किस प्रकार पाकिस्तान ने अमेरिका की आंख में धूल झोंककर अपनी दोहरी राजनीति को अंजाम दिया। मैकमास्टर के अनुसार, एक तरफ पाकिस्तान खुद को अमेरिका का प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी बताता था और आतंकवाद के खिलाफ जंग में साझीदार होने का दावा करता था, तो वहीं दूसरी तरफ वह अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ लड़ने वाले चरमपंथी संगठनों को सुरक्षित ठिकाने और रसद मुहैया कराता था।
मुस्लिम मुल्कों और क्षेत्रीय राजनीति पर भी खरी-खरी
सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि जनरल मैकमास्टर ने मध्य पूर्व और दुनिया के अन्य मुस्लिम देशों की भूमिका पर भी तीखी और खरी-खरी टिप्पणियां की हैं। उन्होंने उन देशों की नीतियों की कड़ी आलोचना की है जो कथनी और करनी में अंतर रखते हैं। मैकमास्टर का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के वित्तपोषण और कूटनीतिक पाखंड के खिलाफ पश्चिमी देशों का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। उनके इन बयानों से पाकिस्तान और उसके समर्थकों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी किरकिरी हो रही है।
अमेरिकी नीति में आया बड़ा बदलाव
जनरल मैकमास्टर के इन खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि क्यों अमेरिका और पश्चिमी देशों का पाकिस्तान पर से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। ट्रंप प्रशासन के दौरान ही अमेरिकी नेतृत्व ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य और आर्थिक मदद पर बड़ी पाबंदियां लगानी शुरू कर दी थीं। इस पूरी रिपोर्ट ने एक बार फिर से यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद को पालने-पोसने वाले देश अंततः वैश्विक मंच पर अकेले पड़ जाते हैं और उनकी पोल दुनिया के सामने खुल ही जाती है।