ईरान में फेल, अमेरिका अब बना रहा चीन के मिसाइल दीवार को भेदने वाली मिसाइलें
अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों और भू-राजनीतिक (Geopolitics) मंचों से इस वक्त दुनिया को चौंका देने वाली एक बेहद बड़ी और सामरिक खबर सामने आ रही है। मध्य पूर्व के देशों विशेषकर ईरान के मोर्चे पर अपनी रणनीतिक चुनौतियों और पूर्व के सैन्य अनुभवों से सबक लेते हुए महाशक्ति संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) ने अपनी सैन्य ताकत को एक बिल्कुल नए और घातक स्तर पर ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है। रक्षा अनुसंधान और पेंटागन की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका अब दुनिया के सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले ड्रैगन यानी चीन की भूमिगत मिसाइल साइट्स और मजबूत पहाड़ी बंकरों की 'दीवार' को नेस्तनाबूद करने के लिए अत्याधुनिक 'टॉमहॉक बंकर बस्टर' (Tomahawk Bunker Buster) क्रूज मिसाइलों का बड़े पैमाने पर विकास कर रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और उसके विशालकाय подземных (अंडरग्राउंड) मिसाइल नेटवर्क को मात देने के लिए अमेरिका का यह कदम भविष्य के किसी संभावित महायुद्ध की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है। आइए एक रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों के वरिष्ठ रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि इस नई घातक तकनीक की इनसाइड स्टोरी क्या है और इसके वैश्विक सुरक्षा पर क्या दूरगामी मायने हैं।
क्या थी ईरान के मोर्चे पर अमेरिकी रणनीतिक विफलता और क्यों पड़ी इस नए हथियार की जरूरत?
पिछले कुछ वर्षों के दौरान मध्य पूर्व के देशों में संघर्ष के दौरान यह बात खुलकर सामने आई थी कि पारंपरिक मिसाइलें और हवाई हमले ईरान या अन्य भूमिगत ठिकानों में छिपे सामरिक भंडारों और मजबूत बंकरों को पूरी तरह से नष्ट करने में उतने प्रभावी साबित नहीं हुए जितनी उम्मीद की जा रही थी। बंकर जमीन के सैकड़ों फीट नीचे कंक्रीट और चट्टानों की मोटी परतों के भीतर सुरक्षित बनाए जाते हैं, जहां तक पहुंचना सामान्य हथियारों के लिए असंभव सा होता है। इस रणनीतिक कमजोरी को महसूस करते हुए अमेरिकी रक्षा विभाग ने महसूस किया कि यदि भविष्य में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन जैसी महाशक्ति के साथ कोई बड़ा संघर्ष छिड़ता है, तो चीन के पास पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का 'अंडरग्रेट वॉल' या ग्रेट वॉल ऑफ मिसाइल्स जैसा विशाल नेटवर्क है, जिसे भेदने के लिए साधारण हथियारों से काम नहीं चलेगा। यही मुख्य कारण है कि अमेरिका अब विशेष रूप से अत्यधिक मजबूत भूमिगत संरचनाओं को नेस्तनाबूद करने वाली मिसाइलों के विकास पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा है।
क्या है टॉमहॉक बंकर बस्टर मिसाइल की खासियत और कैसे काम करती है यह तकनीक?
टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें अपनी लंबी दूरी की सटीकता और विध्वंसक क्षमता के लिए दुनिया भर में पहचानी जाती हैं, लेकिन इस बार अमेरिका इसमें एक खास 'पेनेट्रेटर वॉरहेड' (Penetrator Warhead) और अत्याधुनिक गाइडेड तकनीक को शामिल कर रहा है। यह नई मिसाइल हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद दुश्मन के इलाके में प्रवेश करती है और कंक्रीट या चट्टानों की कई परतों को चीरती हुई सीधे जमीन के अंदर कई सौ फीट नीचे जाकर विस्फोट करती है। इसमें लगे सेंसर्स और जीपीएस-मुक्त नेविगेशन प्रणालियां इसे तब भी सटीक निशाना लगाने में मदद करती हैं जब दुश्मन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग (Electronic Jamming) का इस्तेमाल किया जा रहा हो। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिसाइल चीन की उन गुप्त मिसाइल बेस और कमांड सेंटर के लिए सबसे बड़ा काल साबित हो सकती है जिन्हें चीन ने अपनी पहाड़ियों और जमीन के भीतर सुरक्षित छिपा रखा है।
चीन की 'मिसाइल दीवार' और ताइवान जलडमरूमध्य पर इसके क्या पड़ेंगे सामरिक असर?
चीन पिछले कई दशकों से अपनी नौसेना और मिसाइल शक्ति का विस्तार कर रहा है, विशेष रूप से ताइवान के करीब और दक्षिण चीन सागर में उसने अनगिनत भूमिगत ठिकाने बना रखे हैं ताकि किसी भी अमेरिकी हमले की स्थिति में उसकी मिसाइलें सुरक्षित रहें। अमेरिका द्वारा इन टॉमहॉक बंकर बस्टर मिसाइलों को विकसित किए जाने का सीधा अर्थ यह है कि अमेरिका अब चीन की इस अजेय मानी जाने वाली रक्षात्मक दीवार को तोड़ने की पुख्ता क्षमता हासिल करना चाहता है। इस खबर के सामने आते ही बीजिंग के सैन्य रणनीतिकारों की नींद उड़ गई है, क्योंकि यदि अमेरिका ऐसी मिसाइलों को अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों पर तैनात कर लेता है, तो चीन के अंदरूनी सामरिक ठिकाने भी सुरक्षित नहीं रह जाएंगे। इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन (Balance of Power) का पूरा समीकरण बदल सकता है।
वैश्विक हथियारों की दौड़ और भविष्य के युद्धों की खतरनाक दिशा
अमेरिका और चीन के बीच चल रही इस सामरिक रस्साकशी से एक बार फिर यह साबित हो गया है कि दुनिया धीरे-धीरे एक नए और खतरनाक शीत युद्ध (Cold War) की तरफ बढ़ रही है। जहां एक ओर देश अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हथियारों की होड़ में लगे हैं, वहीं पारंपरिक बंकर भेदी मिसाइलों का यह आधुनिकीकरण इस बात का संकेत है कि देश अपनी मारक क्षमताओं को किसी भी हद तक मजबूत करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। आम इंसानी आबादी के लिए यह भविष्य की आहट चिंता का विषय है, क्योंकि इस तरह के घातक हथियारों का विकास दुनिया को किसी भी पल एक बड़े विनाशकारी संघर्ष के मुहाने पर ला खड़ा कर सकता है। बहरहाल, रक्षा प्रयोगशालाओं में तैयार हो रही यह टॉमहॉक मिसाइल आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और कूटनीति की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाली है।