बेसमेंट में छिपें, AC बंद करें, खिड़कियों से दूर... परमाणु हमला हो जाए तो कैसे बचे?

बेसमेंट में छिपें, AC बंद करें, खिड़कियों से दूर... परमाणु हमला हो जाए तो कैसे बचे?

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्ध के बादलों के बीच दुनिया के वैज्ञानिक और रक्षा विशेषज्ञ लगातार इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि यदि गलती से भी कहीं परमाणु हमला (Nuclear Attack) हो जाए, तो आम नागरिक अपनी जान कैसे बचा सकते हैं। परमाणु हमले का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में यह धारणा बन जाती है कि इसके बाद किसी का भी बचना नामुमकिन है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन और रक्षा विशेषज्ञों (FEMA एवं रेडक्रॉस) का कहना है कि सही रणनीति और त्वरित वैज्ञानिक कदमों को अपनाकर परमाणु धमाके के खौफनाक असर से भी जीवित बचा जा सकता है। आपातकालीन स्थिति में तुरंत बेसमेंट या पक्की कंक्रीट की इमारत में शरण लेना, घर का एसी और वेंटिलेशन सिस्टम बंद करना और कांच की खिड़कियों से दूर हटना वे लाइफ-सेविंग रूल्स हैं जो आपकी और आपके परिवार की जान बचा सकते हैं। परमाणु हमले की भयावहता, उसके घातक रेडिएशन (Fallout) और उससे बचाव के लिए अपनाए जाने वाले वैज्ञानिकों के गोल्डन नियमों को विस्तार से समझना हर किसी के लिए बेहद जरूरी है।

धमाके का पहला अहसास: फ्लैश लाइट और ब्लास्ट वेव से कैसे बचें?

परमाणु विस्फोट के ठीक बाद दो सबसे बड़े और तात्कालिक खतरे पैदा होते हैं: अत्यधिक तीव्र रोशनी (Flash) और शॉकवेव (Blast Wave)। जब भी ऐसा कोई भीषण धमाका होता है, तो उससे निकलने वाली रोशनी आंखों की रोशनी को हमेशा के लिए छीन सकती है या फिर अंधापन पैदा कर सकती है। इसलिए जैसे ही कोई तेज चमक दिखाई दे, कभी भी धमाके की दिशा में न देखें। विशेषज्ञों का कहना है कि धमाका होते ही तुरंत जमीन पर पेट के बल लेट जाएं, अपने हाथों से सिर और गर्दन को ढंक लें और मुंह खोलकर रखें ताकि शॉकवेव के दबाव से कान के पर्दे न फटने पाएं। कांच की खिड़कियों और शीशों से तुरंत दूर हट जाएं, क्योंकि ब्लास्ट वेव के टकराने से कांच के टुकड़े बेहद घातक मिसाइल की तरह उड़ते हैं जो जानलेवा साबित हो सकते हैं।

'गेट इनसाइड': बेसमेंट और पक्की इमारतों में लें शरण

परमाणु धमाके से बचने का पहला और सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है "इमारत के अंदर जाएं" (Get Inside)। यदि आप धमाके के वक्त बाहर हैं, तो बिना एक सेकंड गंवाए किसी मजबूत कंक्रीट की बहुमंजिला इमारत या भूमिगत बेसमेंट (Basement) में शरण लें। मिट्टी, कंक्रीट, ईंट और सीमेंट रेडिएशन की हानिकारक किरणों को रोकने में सबसे ज्यादा कारगर होते हैं। लकड़ी की संरचनाओं या गाड़ियों में छिपना सुरक्षित नहीं होता, क्योंकि रेडिएशन और शॉकवेव उन्हें आसानी से नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि इमारत में बेसमेंट मौजूद है, तो वह सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है। अगर बेसमेंट नहीं है, तो इमारत के सबसे मध्य भाग और सबसे निचले तल पर रहें ताकि आपके और बाहर के रेडिएशन के बीच मोटी दीवारें ढाल बनकर खड़ी रहें।

एसी और वेंटिलेशन तुरंत बंद करें, खिड़की-दरवाजों को करें सील

इमारत के अंदर पहुंचने के बाद दूसरा सबसे बड़ा काम बाहर की जहरीली हवा और रेडियोधर्मी कणों (Nuclear Fallout) को अंदर आने से रोकना होता है। जैसे ही आप सुरक्षित कमरे या बेसमेंट में पहुंचें, तुरंत घर के सभी एयर कंडीशनर (AC), हीटर, चिमनी और वेंटिलेशन फैन को बंद कर दें। एसी की बाहर से आने वाली हवा के साथ रेडियोधर्मी धूल के कण कमरे में दाखिल हो सकते हैं। दरवाजे और खिड़कियों को कसकर बंद कर दें और यदि संभव हो तो टेप या गीले कपड़े से दरवाजों के कोनों और खिड़कियों के छेदों को सील कर दें। इससे हवा में तैरने वाले खतरनाक रेडियोधर्मी रेडिएशन के कण आपके संपर्क में नहीं आ सकेंगे और आप फेफड़ों के गंभीर संक्रमण से बच पाएंगे।

'न्यूक्लियर फॉलआउट' का खतरा और 24 से 48 घंटे का नियम

परमाणु धमाके के बाद असली और सबसे जानलेवा खतरा होता है 'रेडियोधर्मी फॉलआउट' (Radioactive Fallout)। यह वह धूल, राख और मलबे के कण होते हैं जो अंतरिक्ष में ऊपर उठने के बाद वातावरण में बिखर जाते हैं और बारिश की तरह जमीन पर गिरते हैं। फॉलआउट के इन कणों से निकलने वाला गामा रेडिएशन शरीर के अंगों और डीएनए को नष्ट कर सकता है। हालांकि, रेडिएशन की यह तीव्रता समय के साथ बहुत तेजी से घटती है। वैज्ञानिकों का '7/10 रूल' कहता है कि हर 7 घंटे बाद रेडिएशन का असर 10 गुना कम हो जाता है। इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि धमाके के बाद कम से कम शुरुआती 24 से 48 घंटे तक शेल्टर या बेसमेंट से बाहर बिल्कुल न निकलें। जब तक आधिकारिक आपातकालीन निर्देश न मिले, अंदर ही रहें।

दूषित कपड़ों को उतारें और शरीर की ऐसे करें सफाई

यदि परमाणु विस्फोट के समय आप खुले आसमान के नीचे थे और फॉलआउट के संपर्क में आए हैं, तो शेल्टर में प्रवेश करते ही अपने बाहरी कपड़ों को तुरंत उतार दें। आपके कपड़ों पर जमा रेडियोधर्मी धूल ही रेडिएशन का सबसे बड़ा स्रोत बन जाती है। इन कपड़ों को किसी प्लास्टिक की थैली में सील करके दूर फेंक दें या अलग रख दें। कपड़ों को हटाने से ही लगभग 90 फीसदी बाहरी रेडिएशन कम हो जाता है। इसके बाद हल्के गुनगुने पानी और साबुन से अपने पूरे शरीर, सिर के बालों और त्वचा को अच्छी तरह धोएं। धोते समय त्वचा को रगड़ें नहीं ताकि रेडियोधर्मी कण त्वचा के छिद्रों में न समाएं। यदि पानी की कमी है, तो गीले कपड़े या वाइप्स से शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें।

भोजन और पानी की सुरक्षा: केवल डिब्बाबंद वस्तुओं का करें इस्तेमाल

परमाणु हमले के बाद खुले में रखा पानी, फल, सब्जियां या बिना ढका भोजन रेडियोधर्मी फॉलआउट से दूषित हो जाता है। ऐसे भोजन का सेवन करने से रेडियोधर्मी तत्व सीधे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं जो बेहद घातक हो सकता है। इसलिए केवल वही पानी और खाना इस्तेमाल करें जो पैक्ड, कैन (Canned) या एयरटाइट बोतलों में बंद हो। रेफ्रिजरेटर या अलमारी के अंदर रखा खाना और डिब्बाबंद सामान इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है, बशर्ते बर्तन या कैन की बाहरी सतह को इस्तेमाल से पहले किसी साफ कपड़े से पोंछ लिया जाए। आपातकालीन स्थिति के लिए अपने शेल्टर में पहले से ही सूखा राशन, बोतलबंद पानी और प्राथमिक चिकित्सा किट (First Aid Kit) जमा करके रखना सबसे अक्लपुर्ण रणनीति होती है।

रेडियो संचार और आधिकारिक निर्देशों पर बनाए रखें नजर

परमाणु धमाके से उत्पन्न इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) की वजह से इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क और पावर ग्रिड पूरी तरह ठप्प हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में समाचार पाने और सरकारी निर्देशों को सुनने का एकमात्र जरिया बैटरी से चलने वाला पोर्टेबल एएम/एफएम रेडियो (Battery-operated Radio) ही बचता है। पैनिक में आकर बाहर भागने की गलती कभी न करें। रेडियो पर आने वाली आपातकालीन चेतावनियों और दिशा-निर्देशों को ध्यान से सुनें। जब राहत एजेंसियां रेडिएशन का स्तर सुरक्षित घोषित कर दें और निकासी (Evacuation) की आधिकारिक घोषणा करें, तभी अपने शेल्टर से बाहर निकलें। अनुशासन, धैर्य और सही वैज्ञानिक जानकारी ही आपको और आपके परिवार को इस प्रलयंकारी आपदा में सुरक्षित रख सकती है।