लेबनान में ऐतिहासिक फैसला: मौत की सजा पर लगी पाबंदी, अरब दुनिया का बना पहला देश
लेबनान की संसद ने एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाते हुए देश में सजा-ए-मौत (Capital Punishment) को पूरी तरह से समाप्त करने के कानून को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही लेबनान अरब दुनिया का ऐसा पहला देश बन गया है, जिसने आधिकारिक रूप से मौत की सजा को खत्म कर उसकी जगह कठोर श्रम के साथ उम्रकैद का प्रावधान किया है। हालांकि लेबनान में साल 2004 के बाद से ही किसी भी कैदी को फांसी नहीं दी गई थी और वहां अघोषित तौर पर रोक (Moratorium) जारी थी, लेकिन अब इसे कानूनी रूप से हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया है। इस कानून के तहत देश की जेलों में बंद सभी डेथ रो (Death Row) के कैदियों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाएगा। हालांकि, इस फैसले का हिजबुल्लाह के संसदीय गुट ने विरोध किया और सत्र के दौरान वॉकआउट भी किया।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के बाकी देशों में क्या है सजा-ए-मौत का हाल?
मध्य पूर्व (Middle East) के ज्यादातर देशों में शरिया कानून या सख्त आपराधिक न्याय प्रणालियों के तहत आज भी सजा-ए-मौत का प्रावधान है और कई देश इसका सक्रिय रूप से पालन भी करते हैं:
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सउदी अरब (Saudi Arabia): दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी देने वाले देशों में सऊदी अरब शामिल है। यहां हत्या, आतंकवाद, और ड्रग्स तस्करी जैसे गंभीर अपराधों के लिए सरेआम या जेल के अंदर तलवार से गर्दन काटने या फायरिंग स्क्वाड द्वारा मौत की सजा दी जाती है। हालांकि, हाल के वर्षों में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सुधारों के बाद से कुछ मामलों में सजा कम करने की कोशिशें हुई हैं, लेकिन कानूनन यह बरकरार है।
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ईरान (Iran): चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा मौत की सजा ईरान में दी जाती है। यहां राजनीतिक असंतोष, हत्या, बलात्कार और ड्रग्स से जुड़े मामलों में खुलेआम या जेलों में फांसी देने के अलावा कई बार अन्य सख्त तरीकों से सजा दी जाती है। मानवाधिकार संगठन लगातार ईरान की इन सजाओं की आलोचना करते रहे हैं।
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इराक और यमन (Iraq & Yemen): इन देशों में युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवाद के चलते आतंकवादियों, देशद्रोहियों और खतरनाक अपराधियों के लिए निचली अदालतों द्वारा धड़ल्ले से मौत की सजा सुनाई जाती है और उनका क्रियान्वयन भी किया जाता है।
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत और बहरीन (UAE, Qatar, Kuwait & Bahrain): इन खाड़ी देशों में भी हत्या, आतंकवाद और ड्रग्स तस्करी जैसे जघन्य अपराधों के लिए मौत की सजा का कानून है। हालांकि, गंभीर मामलों में ही बहुत सोच-विचारकर और उच्च स्तर की कानूनी प्रक्रियाओं के बाद ही इसे अमलीजामा पहनाया जाता है।
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इजराइल (Israel): इजराइल के नागरिक कानूनों में सैद्धांतिक रूप से देशद्रोह या नाजी अपराधों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है, लेकिन व्यावहारिक रूप से सदियों से इसका इस्तेमाल बहुत ही दुर्लभ मामलों को छोड़कर नहीं किया गया है। हालांकि, समय-समय पर वहां की राजनीति में आतंकवादियों के लिए इसे अनिवार्य बनाने की मांग उठती रही है।
लेबनान द्वारा मौत की सजा को खत्म करने के इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों (जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच) ने 'मानवाधिकारों की ऐतिहासिक जीत' बताया है, जबकि मिडिल ईस्ट के बाकी देशों में अभी भी यह पुरानी आपराधिक न्याय प्रणाली का एक अहम हिस्सा बना हुआ है।