अमेरिका की स्ट्राइक के डर से भड़का ईरान, 'हिट लिस्ट' में 6 देशों के तेल कुएं; क्या भारत में भड़केंगे पेट्रोल के दाम

अमेरिका की स्ट्राइक के डर से भड़का ईरान, 'हिट लिस्ट' में 6 देशों के तेल कुएं; क्या भारत में भड़केंगे पेट्रोल के दाम

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित सैन्य कार्रवाई की योजना बनाई है, जिसका उद्देश्य ईरान की तेल उत्पादन क्षमता को कमजोर कर उसे अपनी शर्तों पर बातचीत के लिए मजबूर करना है। हालांकि अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन सभी सैन्य विकल्प तैयार बताए जा रहे हैं।

ईरान की 'हिट लिस्ट' में दुनिया के ये 6 बड़े देश

इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला किया गया, तो वह पश्चिम एशिया के प्रमुख तेल और गैस केंद्रों को निशाना बनाएगा। ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने छह देशों के महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों की एक संभावित टारगेट सूची तैयार की है। इनमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, कुवैत, बहरीन और इजरायल के प्रमुख तेल एवं गैस प्रतिष्ठान शामिल बताए गए हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब का गवार ऑयल फील्ड, अबकैक और खुरैस प्रोसेसिंग केंद्र, यूएई का जाकुम ऑयल फील्ड और रुवाइस रिफाइनरी, कतर का नॉर्थ फील्ड और रास लफान एलएनजी हब, कुवैत का बुरगान ऑयल फील्ड, बहरीन की सितरह रिफाइनरी तथा इजरायल के लेविआथन और तमार गैस फील्ड संभावित निशानों में शामिल हैं। ये सभी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कथित तौर पर कहा है कि किसी भी अमेरिकी या इजरायली हमले का "विनाशकारी जवाब" दिया जाएगा। साथ ही, ईरान ने यह दावा भी किया कि पहले हुए एक संघर्ष के दौरान कतर के गैस प्रतिष्ठान पर हमले के बाद ट्रंप को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी थी। हालांकि अमेरिका ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया है।

यदि इन ऊर्जा केंद्रों पर वास्तव में हमला होता है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में भारी वृद्धि की आशंका होगी। ऊर्जा संकट के कारण परिवहन, उद्योग और बिजली उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि, लेख में किए गए कई दावे संभावित परिदृश्यों और ईरानी मीडिया के हवाले से हैं तथा इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

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