अमेरिका को ईरान की खुली चुनौती, पेजेश्कियान बोले- डॉलर की गुलामी खत्म करने का वक्त आ गया

अमेरिका को ईरान की खुली चुनौती, पेजेश्कियान बोले- डॉलर की गुलामी खत्म करने का वक्त आ गया

ब्रिक्स 2026 के वैश्विक मंच पर इस बार पश्चिमी एशिया के सुलगते हालात और ईरान का आक्रामक रुख केंद्र बिंदु बना हुआ है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान सम्मेलन में सबसे चर्चित चेहरा बनकर उभरे हैं। उन्होंने मंच से न केवल अमेरिकी प्रतिबंधों और डॉलर की मनमानी को खुली चुनौती दी, बल्कि दुनिया भर में चल रही अटकलों पर पूर्ण विराम लगाते हुए अपने सुप्रीम लीडर की सुरक्षा पर भी कड़ा संदेश दे दिया है।

'सुप्रीम लीडर जिंदा हैं और काम कर रहे हैं'

हालिया दिनों में ईरान के सुप्रीम लीडर की मौजूदगी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कई तरह की अफवाहें थीं। इंडिया टुडे को दिए विशेष साक्षात्कार में जब राष्ट्रपति पेजेश्कियान से सीधा सवाल पूछा गया कि सुप्रीम लीडर कहां और किस हाल में हैं, तो उनका जवाब बेहद तीखा था। पेजेश्कियान ने स्पष्ट कहा कि शुक्र है कि हमारे सर्वोच्च नेता पूरी तरह सुरक्षित, जीवित हैं और अपना कामकाज सामान्य रूप से कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब विरोधी उनका सुराग नहीं लगा पाते, तो तरह-तरह की झूठी अफवाहें फैलाने लगते हैं। पेजेश्कियान ने पश्चिमी ताकतों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे जिसे चाहते हैं उसे मार देते हैं और बाद में दुनिया के सामने दावा कर देते हैं कि वह आतंकवादी था।

अमेरिकी एकतरफावाद और डॉलर के खिलाफ साझा मोर्चे की अपील

सम्मेलन के सत्रों में ईरानी राष्ट्रपति ने आर्थिक प्रतिबंधों को अमानवीय करार देते हुए विकासशील देशों को एकजुट होने का आह्वान किया। पेजेश्कियान ने कहा कि ब्रिक्स की स्थापना ही अमेरिकी दबदबे और एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ संतुलन बनाने के लिए हुई है। वाशिंगटन अपनी मर्जी से किसी भी संप्रभु देश पर पाबंदियां थोप देता है। उन्होंने सभी सदस्य देशों से अपील की कि वे अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता खत्म करें और ऐसा स्वतंत्र व्यापारिक व वित्तीय तंत्र तैयार करें जो किसी तीसरे देश के फैसलों से प्रभावित न हो।

'नागरिकों पर हमला छोड़ो, हिम्मत है तो सेना से लड़ो'

पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष पर ईरान की स्थिति स्पष्ट करते हुए मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि तेहरान अमेरिका और इजरायल की किसी भी तरह की दादागिरी, सैन्य दबाव या धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका को युद्ध का इतना ही शौक है, तो वह आम नागरिकों, खाद्य आपूर्ति और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के बजाय सीधे सैन्य बलों का सामना करे। निर्दोष जनता को भुखमरी और हमलों के जरिए दबाने की नीति को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।