'बीबी या टिबी' के साथ सरकार न बनाने के वादे पर अडे लिबरमैन, इजरायल में नया सियासी घमासान
मध्य पूर्व (Middle East) के बेहद संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण देश इजराइल की घरेलू राजनीति में एक बार फिर से भारी अस्थिरता और तीखा सियासी घमासान छिड़ गया है। इजराइल के पूर्व रक्षा मंत्री और दक्षिणपंथी पार्टी 'इसराइल बेतनु' (Yisrael Beiteinu) के कद्दावर नेता एविगडोर लिबरमैन (Avigdor Lieberman) के एक कड़े और अड़ियल रुख ने देश के भावी राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मचा दी है। लिबरमैन ने सार्वजनिक मंच से अपना पुराना और बहुचर्चित रुख दोहराते हुए साफ कर दिया है कि वे किसी भी सूरत में 'बीबी या टिबी' (Bibi or Tibi) के समर्थन से बनने वाली सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे। यहाँ 'बीबी' से तात्पर्य इजराइल के मौजूदा और लंबे समय से प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) से है, जबकि 'टिबी' से आशय प्रमुख अरब-इजराइली सांसद और ताआल पार्टी के नेता अहमद टिबी (Ahmad Tibi) से है। लिबरमैन के इस तीखे बयान और अडिग फैसले के बाद इजराइल में नई गठबंधन सरकार के गठन की संभावनाओं पर काले बादल मंडराने लगे हैं, जिससे देश एक बार फिर से राजनीतिक गतिरोध और समय से पहले आम चुनावों के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है।
कौन हैं एविगडोर लिबरमैन और क्यों इजराइली राजनीति में अहम मानी जाती है उनकी भूमिका?
इजराइली राजनीति के चाणक्य और किंगमेकर माने जाने वाले एविगडोर लिबरमैन का यह बयान कोई साधारण राजनीतिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह देश के भावी सत्ता समीकरणों को पूरी तरह से बदलने का मादा रखता है। पूर्व विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री रह चुके लिबरमैन की पकड़ देश के दक्षिणपंथी और विशेष रूप से पूर्व सोवियत संघ से आकर इजराइल में बसे यहूदी मतदाताओं के बीच बेहद मजबूत है। इजराइली संसद 'नेसेट' (Knesset) की 120 सीटों वाले सदन में जब भी किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तब लिबरमैन की पार्टी के पास मौजूद सीटें सरकार बनाने या गिराने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। लिबरमैन लंबे समय से इस बात की वकालत करते रहे हैं कि इजराइल को एक ऐसी धर्मनिरपेक्ष और राष्ट्रवादी सरकार की जरूरत है जिसमें न तो कट्टर धार्मिक दक्षिणपंथी दल शामिल हों और न ही अरब-इजराइली गठबंधन की बैसाखियों का सहारा लिया जाए।
नेतन्याहू और अहमद टिबी से दूरी क्यों? जानिए लिबरमैन के 'बीबी-टिबी' विरोध का पूरा गणित
लिबरमैन के 'बीबी या टिबी' वाले नारे के पीछे इजराइल की अंदरूनी विचारधारात्मक और सुरक्षा नीतियां छिपी हुई हैं। एक तरफ जहां बेंजामिन नेतन्याहू (बीबी) के साथ लिबरमैन के मतभेद व्यक्तिगत और नीतिगत दोनों स्तरों पर काफी पुराने हैं। लिबरमैन का आरोप है कि नेतन्याहू सत्ता में बने रहने के लिए अल्टर-ऑर्थोडॉक्स (कट्टर यहूदी) पार्टियों की अनुचित मांगों और तुष्टीकरण के आगे झुक जाते हैं, जिससे देश की धर्मनिरपेक्ष संरचना और सेना में अनिवार्य भर्ती (Haredi Conscription) के कानून प्रभावित होते हैं। दूसरी तरफ, अरब सांसद अहमद टिबी (टिबी) को लिबरमैन और उनके समर्थक इजराइल विरोधी और फिलिस्तीनी हितों का समर्थक मानते हैं। लिबरमैन का मानना है कि किसी भी इजराइली सरकार को चलाने के लिए अरब पार्टियों का समर्थन लेना देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने के समान है। इसी वजह से उन्होंने नेतन्याहू और टिबी दोनों से समान दूरी बनाए रखने का रणनीतिक संकल्प लिया है।
लिबरमैन की शर्त ने बढ़ाई बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें: इजराइली संसद में बहुमत का पेंच
एविगडोर लिबरमैन के इस सार्वजनिक और सख्त स्टैंड के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके लिकुड (Likud) गठबंधन के रणनीतिकारों की नींद उड़ गई है। नेसेट में बहुमत का आंकड़ा (61 सीटें) जुटाना नेतन्याहू के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। यदि लिबरमैन और उनकी पार्टी विपक्ष में बैठती है या नेतन्याहू के साथ हाथ मिलाने से पूरी तरह इनकार कर देती है, तो नेतन्याहू के पास केवल अति-दक्षिणपंथी और धार्मिक गुटों का ही सहारा रह जाता है, जिससे बनने वाली सरकार बेहद अस्थिर और अंतरराष्ट्रीय दबावों से घिरी होती है। वहीं दूसरी ओर, अगर विरोधी दल मिलकर नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें भी लिबरमैन के बिना जरूरी बहुमत जुटाने में पसीने छूट जाएंगे। इस स्थिति ने पूरे इजराइल के राजनीतिक पटल पर एक ऐसा गतिरोध पैदा कर दिया है जिसे सुलझाना किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं दिख रहा।
समय से पहले चुनाव या नई राष्ट्रीय एकता सरकार? क्या हैं इजराइल के सामने रास्ते
इस नए सियासी घमासान के सामने आने के बाद इजराइली मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक अब मुख्य रूप से दो संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। पहली संभावना यह है कि यदि कोई भी गठबंधन स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा साबित करने में विफल रहता है, तो इजराइल को बहुत जल्द एक बार फिर से मध्यावधि आम चुनावों (Snap Elections) का सामना करना पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि इजराइल में पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक अनिश्चितता के कारण कई बार चुनाव हो चुके हैं। दूसरी संभावना यह जताई जा रही है कि लिबरमैन के इस कड़े रुख के बाद देश की मुख्यधारा की पार्टियों पर एक 'राष्ट्रीय एकता सरकार' (National Unity Government) बनाने का भारी दबाव बनेगा, जिसमें नेतन्याहू की जगह किसी अन्य सहमति वाले नेता को आगे लाया जा सकता है या फिर बिना किसी कट्टरपंथी और अरब दलों के सहयोग के एक मध्यमार्गी-दक्षिणपंथी सरकार का गठन किया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय पटल और मध्य पूर्व की शांति पर इस राजनीतिक अनिश्चितता का असर
इजराइल की यह अंदरूनी राजनीतिक उठापटक केवल उसके अपने भूभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पूरे मध्य पूर्व (Middle East) के भू-राजनीतिक माहौल पर पड़ रहा है। गाजा, वेस्ट बैंक और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच इजराइल में एक मजबूत और निर्णय लेने में सक्षम सरकार की अनुपस्थिति से अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। इजराइल के सहयोगी देश चाहते हैं कि यरूशलेम में जल्द से जल्द एक स्थिर सरकार का गठन हो ताकि सुरक्षा और कूटनीतिक वार्ताओं को आगे बढ़ाया जा सके। हालांकि, एविगडोर लिबरमैन द्वारा उठाए गए इस सियासी तूफान ने यह साफ कर दिया है कि जब तक इजराइली राजनीति में 'बीबी' और उनकी नीतियों को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं हो जाता, तब तक देश में शांति और स्थिरता का रास्ता आसान नहीं होगा।