इजरायल में बड़ा सियासी भूचाल! छिनने वाली है बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी? अरब पार्टियों के इस फैसले ने हिला दी सत्ता

इजरायल में बड़ा सियासी भूचाल! छिनने वाली है बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी? अरब पार्टियों के इस फैसले ने हिला दी सत्ता

इजरायल में आम चुनाव के नतीजों के बाद उपजे राजनीतिक गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर संकट के बादल गहरा गए हैं। 2023 में हमास के हमले के बाद देश में हुए इस पहले आम चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका है, जिससे 120 सीटों वाली नेसेट (संसद) में नई सरकार के गठन को लेकर भारी अनिश्चितता बनी हुई है। इस बीच नेतन्याहू के लिए सबसे बड़ा झटका अरब पार्टियों के रुख से लगा है।

19 सीटों का मजबूत जनादेश रखने वाली दो प्रमुख अरब पार्टियों—राआम (Ra'am) और जॉइंट लिस्ट (Joint List) ने नेतन्याहू को बेदखल करने के लिए इजरायली सेना (IDF) के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को अपना समर्थन देने की तैयारी शुरू कर दी है।

'टाइम्स ऑफ इजरायल' की रिपोर्ट के अनुसार, जॉइंट लिस्ट सीधे तौर पर कैबिनेट में शामिल होने के बजाय सरकार को बाहर से तकनीकी समर्थन देने पर विचार कर रही है। जॉइंट लिस्ट के नंबर-2 नेता और सांसद अहमद तिबी ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य इस मौजूदा सरकार को सत्ता से हटाकर देश में राजनीतिक बदलाव और नई उम्मीद लाना है। वहीं अरब राजनीतिक आंदोलन के प्रमुख चेहरा जाफर फराह के अनुसार, दोनों अरब दल इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के समक्ष आधिकारिक रूप से आइसेनकोट का नाम अगले प्रधानमंत्री के तौर पर प्रस्तावित कर सकते हैं, जिससे विपक्षी खेमे को सरकार बनाने का न्योता मिलने की राह आसान हो सकती है।

इस राजनीतिक समीकरण की तुलना 1990 के दशक के ऐतिहासिक दौर से की जा रही है। अहमद तिबी ने आइसेनकोट से पूर्व प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन की तरह साहस दिखाने का आह्वान किया है। गौरतलब है कि 1993 के ओस्लो समझौते के दौरान जब फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (PLO) के साथ बातचीत पर तीखा विरोध हुआ था, तब भी अरब दलों ने राबिन की अल्पमत सरकार को बाहर से समर्थन देकर टिकने में मदद की थी। मौजूदा गतिरोध को सुलझाने के लिए जॉइंट लिस्ट के चेयरमैन यूसुफ जबरीन ने भी स्वीकार किया है कि नेतन्याहू-विरोधी यहूदी दलों के साथ बातचीत के रास्ते खुले हैं और सकारात्मक चर्चा चल रही है।

चुनाव नतीजों के आंकड़े नेतन्याहू के घटते जनाधार को साफ दर्शाते हैं। 120 सीटों वाली संसद में बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 61 सीटों का है। नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी खेमे को इस बार सिर्फ 53 सीटें मिली हैं, जो कि पिछली संसद की 68 सीटों की तुलना में भारी गिरावट है। दूसरी तरफ नेतन्याहू का विरोध करने वाली प्रमुख यहूदी पार्टियों ने 48 सीटों पर कब्जा जमाया है। ऐसे में यदि गादी आइसेनकोट के 48 सीटों वाले खेमे को दोनों अरब दलों की 19 सीटों का बाहरी समर्थन मिल जाता है, तो यह आंकड़ा बढ़कर 67 सीटों पर पहुंच जाएगा। यह संख्या स्पष्ट बहुमत से कहीं अधिक होगी, जिसके चलते बेंजामिन नेतन्याहू को प्रधानमंत्री पद की कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है।