विदेशों में हर दिन 20 से ज्यादा भारतीयों की मौत! खाड़ी देशों से आई रिपोर्ट ने उड़ाए सबके होश, जानिए क्या है खौफनाक सच
सुनहरे भविष्य और बेहतर नौकरी की तलाश में हर साल लाखों भारतीय अपना घर छोड़कर खाड़ी देशों (Gulf Countries) का रुख करते हैं। मगर विदेश मंत्रालय के हालिया आधिकारिक आंकड़े एक बेहद डरावनी तस्वीर पेश कर रहे हैं।
इन आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि विदेशों में काम करने वाले कई प्रवासी भारतीयों को जानलेवा खतरों का सामना करना पड़ रहा है। 2021 से 2025 के बीच विभिन्न कारणों से विदेश में 37,740 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जिसमें से 86% से ज्यादा मौतें केवल खाड़ी देशों में हुई हैं। यह आंकड़ा हर दिन औसतन 20 से ज्यादा मौतों का है।
वर्कप्लेस हादसों में गई 800 से ज्यादा की जान
अगर केवल काम की जगह (Workplace) पर हुए हादसों की बात करें, तो 2023 से 2025 के बीच 800 से ज्यादा भारतीय कामगारों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 55% मौतें सिर्फ खाड़ी देशों में हुई हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि इस क्षेत्र में हर हफ्ते औसतन तीन भारतीय मजदूर काम के दौरान हादसों का शिकार हो रहे हैं।
सऊदी अरब और UAE में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक
खाड़ी देशों में काम के दौरान जान गंवाने वाले भारतीयों के मामले में सऊदी अरब सबसे ऊपर है। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां काम की जगह पर हुए हादसों में 182 भारतीयों की मौत दर्ज की गई। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का नंबर आता है, जहां 128 कामगारों ने जान गंवाई। इसी दौरान कतर की रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए एक भयानक गैस विस्फोट का भी जिक्र है, जिसमें 12 भारतीयों की अकाल मृत्यु हो गई थी।
हार्ट अटैक, हादसा या कुछ और? मौत के पीछे की खौफनाक सच्चाई
आखिर खाड़ी देशों में इतनी बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों की मौत क्यों हो रही है? इसके पीछे कई गंभीर चुनौतियां और खराब हालात जिम्मेदार हैं-
भीषण गर्मी और शारीरिक श्रम: खाड़ी देशों के अत्यधिक तापमान में लगातार भारी शारीरिक मेहनत करना जानलेवा साबित हो रहा है।
कमजोर सुरक्षा मानक: कई जगहों पर सुरक्षा की उचित ट्रेनिंग और उपकरणों का घोर अभाव है।
मानसिक तनाव और आत्महत्या: परिवार से दूरी और काम के दबाव के कारण मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जिससे आत्महत्या के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है।
खराब जीवन स्तर: 12 घंटे की लंबी शिफ्ट, रहने की छोटी और भीड़-भाड़ वाली जगहें, और वेतन में कटौती या देरी मजदूरों को तोड़ देती है।
मुआवजे से बचने का खेल: रिपोर्ट बताती है कि कई बार वर्कप्लेस पर हुए हादसों को प्राकृतिक मौत या 'हार्ट अटैक' बता दिया जाता है, ताकि नियोक्ताओं को मुआवजे का भुगतान न करना पड़े।
प्रवासी भारतीयों की मदद के लिए सरकार के कदम
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने विदेशों में रह रहे भारतीय कामगारों की सहायता के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। दुबई, रियाद, जेद्दा और नई दिल्ली में 'प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र' (Pravasi Bharatiya Sahayata Kendra) स्थापित किए गए हैं, जो संकट के समय मजदूरों की मदद करते हैं। इसके अलावा, महिला कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'ई-माइग्रेट पोर्टल' (e-Migrate Portal) के माध्यम से एक सख्त नियम लागू किया गया है। इसके तहत महिलाओं की भर्ती केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसियों के जरिए ही की जा सकती है।