अंतरिक्ष से धरती की तरफ आ रहा नासा का 1100 किलो का टेलीस्कोप, आग के गोले में बदल जाएगा

अंतरिक्ष से धरती की तरफ आ रहा नासा का 1100 किलो का टेलीस्कोप, आग के गोले में बदल जाएगा

अंतरिक्ष की दुनिया से एक बेहद रोमांचक, खौफनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने स्पेस लवर्स और वैज्ञानिकों की धड़कनें तेज कर दी हैं। अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन नासा (NASA) का एक भारी-भरकम और पुराना टेलीस्कोप अब अपनी अंतरिक्ष यात्रा का सफर पूरा कर चुका है और अनियंत्रित होकर सीधे धरती के वायुमंडल की तरफ तेजी से खिंचा चला आ रहा है। बताया जा रहा है कि इस डीकमीशंड टेलीस्कोप का वजन करीब 1100 किलोग्राम (1.1 टन) है। अंतरिक्ष में अपनी लंबी पारी खेलने के बाद यह स्पेसक्राफ्ट अब गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव के कारण नीचे गिर रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जैसे ही यह भारी-भरकम टेलीस्कोप धरती के घने वायुमंडल में प्रवेश करेगा, भयंकर घर्षण (Friction) और तापमान के कारण यह किसी चमकते हुए आग के गोले में बदलकर पूरी तरह से राख हो जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर स्पेस एजेंसियों की पैनी नजर बनी हुई है कि इसका मलबा कहां और किस हिस्से में गिर सकता है।

क्या है इस 1100 किलो के टेलीस्कोप का इतिहास और इसका मकसद?

यह रहस्यमयी और भारी टेलीस्कोप कई साल पहले नासा द्वारा अंतरिक्ष के रहस्यों को खंगालने, ब्रह्मांडीय किरणों और खगोलीय पिंडों का अध्ययन करने के लिए अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था। अपने सक्रिय कार्यकाल के दौरान इस अत्याधुनिक वैज्ञानिक यंत्र ने वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के कई अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने में मदद की थी और अमूल्य डेटा पृथ्वी पर भेजा था। लेकिन, हर तकनीक की एक निश्चित उम्र होती है और समय के साथ इसके ईंधन और नियंत्रण प्रणालियों ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद से यह अंतरिक्ष के कचरे (Space Debris) के रूप में पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में चक्कर काट रहा था। अब गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव और वायुमंडलीय खिंचाव (Atmospheric Drag) के कारण यह अपनी कक्षा से बाहर निकलकर लगातार नीचे की ओर उतर रहा है।

वायुमंडल में प्रवेश करते ही क्यों बन जाएगा आग का गोला?

जब अंतरिक्ष में यात्रा कर रहा कोई भारी ऑब्जेक्ट तेज रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल होता है, तो भौतिकी का एक बेहद तीव्र नियम काम करता है। हमारे वायुमंडल में मौजूद हवा के अणुओं के साथ जब इस 1100 किलो के धातु और कांच से बने टेलीस्कोप की टक्कर होती है, तो भयंकर घर्षण (Friction) पैदा होता है। इस घर्षण की वजह से तापमान कई हजार डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इतनी भयंकर गर्मी और दबाव को कोई भी धातु सहन नहीं कर पाती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह टेलीस्कोप जैसे ही वायुमंडल के संपर्क में आएगा, यह एक विशालकाय आग के गोले (Fireball) में तब्दील हो जाएगा। आसमान में यह नजारा किसी उल्कापिंड (Meteor) के टूटने या शूटिंग स्टार जैसा दिखाई दे सकता है, जो देखते ही देखते जलकर हवा में विलीन हो जाएगा।

क्या धरती पर रहने वाले लोगों के लिए कोई खतरा है?

आम जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि 1100 किलोग्राम वजनी कोई वस्तु अगर अंतरिक्ष से गिरेगी, तो क्या वह इंसानों के लिए खतरा बन सकती है? इस पर नासा और दुनिया भर की अंतरिक्ष निगरानी एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इस विशाल टेलीस्कोप का अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में प्रवेश करते ही अत्यधिक तापमान के कारण जलकर राख हो जाएगा। हालांकि, इसकी कुछ अत्यधिक मजबूत टाइटेनियम या विशेष धातु से बनी छोटी-सभ्य प्लेट्स या टुकड़े इस आग की भट्टी से बचकर समुद्र या किसी निर्जन इलाके में गिर सकते हैं। चूँकि पृथ्वी का 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है और अधिकांश भूभाग पर इंसानी बस्तियां नहीं हैं, इसलिए इसके किसी आबादी वाले क्षेत्र पर गिरने की संभावना न के बराबर है।

अंतरिक्ष का बढ़ता कचरा और री-एंट्री की बढ़ती घटनाएं

यह घटना एक बार फिर से इस बात की याद दिलाती है कि अंतरिक्ष में इंसानों द्वारा भेजा गया कबाड़ या पुराना मलबा अब हमारे अपने ही ग्रह के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों पुराने उपग्रह (Satellites) और रॉकेट के हिस्से अनियंत्रित होकर धरती के वायुमंडल में वापस लौट चुके हैं। स्पेस एजेंसियां अब 'ऑर्बिटल डीब्रिज मिटिगेशन' (Space Debris Mitigation) पर बहुत सख्ती से काम कर रही हैं ताकि भविष्य में इस तरह के अंतरिक्ष कचरे को नियंत्रित तरीके से सुरक्षित समुद्र में गिराया जा सके। नासा का यह 1100 किलो का टेलीस्कोप भी इसी बढ़ती अंतरिक्षीय वापसी की सूची में शामिल हो गया है, जिस पर दुनिया भर के खगोलविदों की रडार निगाहें टिकी हुई हैं।

कब और कहां होगी इस खगोलीय घटना की अंतिम एंट्री?

वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष ट्रैकर्स के अनुसार, इस टेलीस्कोप के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने का समय और सटीक स्थान आने वाले कुछ घंटों या दिनों में पूरी तरह साफ हो जाएगा। पृथ्वी की परिक्रमा करने की इसकी गति और सौर तूफानों के कारण इसके नीचे आने की रफ्तार में थोड़ा बदलाव भी हो सकता है। जैसे-जैसे यह धरती के करीब आएगा, अंतरिक्ष वैज्ञानिक इसके जलने के मार्ग और समय की सटीक गणना कर लेंगे। तब तक यह खगोलीय घटना विज्ञान प्रेमियों के लिए एक बार फिर से इस बात का अहसास कराती है कि अंतरिक्ष का विज्ञान जितना सुंदर है, उसका अंत उतना ही रोमांचक और ऊर्जावान होता है।